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क्यों पासपोर्ट नहीं है नागरिकता का सबूत, 13 साल पुराने हाई कोर्ट के फैसले में हर सवाल का जवाब

अदालत ने कहा था कि आधार कार्ड, पासपोर्ट और यहां तक कि जन्म प्रमाण पत्र को भी नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता. बेंच का कहना था कि यदि आप 1 जुलाई, 1987 के बाद पैदा हुए हैं तो फिर आप सिर्फ जन्म के आधार पर भारत के नागरिक नहीं हो जाते.

क्यों पासपोर्ट नहीं है नागरिकता का सबूत, 13 साल पुराने हाई कोर्ट के फैसले में हर सवाल का जवाब
  • भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट केवल यात्रा दस्तावेज है, नागरिकता का प्रमाण नहीं है
  • सितंबर 2013 के हाई कोर्ट फैसले में भी पासपोर्ट और जन्म प्रमाण पत्र को नागरिकता प्रमाण नहीं माना गया था
  • कानून के अनुसार 1 जुलाई 1987 के बाद जन्मे व्यक्ति के लिए पैरेंट्स में से कम से कम एक का नागरिक होना जरूरी है
नई दिल्ली:

भारतीय विदेश मंत्रालय ने बुधवार को एक बार फिर से स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट नागरिकता साबित करने वाला दस्तावेज नहीं है. मंत्रालय का कहना है कि यह सिर्फ एक ट्रैवल डॉक्युमेंट है. यह नियम पहले से ही रहा है, लेकिन विदेश मंत्रालय की ओर से फिर आए स्पष्टीकरण के बाद कुछ लोग सवाल पूछ रहे हैं. जावेद अख्तर और आदित्य ठाकरे समेत कई लोगों ने सवाल किया है कि पासपोर्ट जारी करने की एक विस्तृत प्रक्रिया है और पुलिस वेरिफिकेशन भी होता है. ऐसे में यदि उसे भी नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा रहा है तो यह गलत है. हालांकि यह मामला ऐसा नहीं है कि विदेश मंत्रालय ने पहली बार ऐसी बात की है. पहले ही यह नियम है कि पासपोर्ट को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता. यही नहीं 13 साल पहले हाई कोर्ट के एक फैसले में भी इसके बारे में समझाया गया था.

सितंबर 2013 के एक फैसले में घुसपैठ के 4 आरोपियों को राहत देने से इनकार करते हुए अदालत ने कहा था कि आधार कार्ड, पासपोर्ट और यहां तक कि जन्म प्रमाण पत्र को भी नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता. बेंच का कहना था कि यदि आप 1 जुलाई, 1987 के बाद पैदा हुए हैं तो फिर आप सिर्फ जन्म के आधार पर भारत के नागरिक नहीं हो जाते, जब तक कि आपके पैरेंट्स में से कम से कम कोई एक भारतीय नागरिक न हो. नागरिकता कानून कहता है कि यदि आपका भारत में जन्म 26 जनवरी, 1950 से पहले या फिर बाद हुआ है तो आप भारतीय नागरिक कहे जाएंगे. हालांकि 1 जुलाई, 1987 के बाद भारत में जन्मे वही लोग नागरिकता के अधिकारी होंगे, जिनके पैरेंट्स में से कम से कम कोई एक भारत का नागरिक हो. यही नहीं एक पैरेंट यदि भारतीय नागरिक है और दूसरा घुसपैठ करके भारत आया है, तब भी नागरिकता नहीं मिलेगी.

उस केस के दौरान सरकारी वकील स्वप्निल पेडनेकर ने कहा था कि जन्म प्रमाण पत्र बताता है कि आपका जन्म भारत में हुआ है. इसके अलावा अन्य दस्तावेज बता सकते हैं कि आप भारत में रह रहे हैं. लेकिन कानूनन इन दस्तावेजों से यह साबित नहीं होता कि आप भारत के नागरिक हैं. इस पर आरोपियों के वकीलों ने कहा था कि उनके पास आधार कार्ड और जन्म के प्रमाण पत्र हैं. इससे पता चलता है कि वे जन्म से ही भारतीय नागरिक हैं. इसी पर अदालत ने साफ किया था कि पासपोर्ट या फिर बर्थ सर्टिफिकेट को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता.

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गैर-भारतीयों को भी जारी होता है पासपोर्ट, फिर कैसे माना जाए नागरिकता का प्रमाण

अब एक बात यह कि पासपोर्ट ऐक्ट 1967 के अनुसार ऐसे लोगों को भी यह ट्रैवल डॉक्युमेंट जारी हो सकता है, जो भारत नागरिक नहीं हैं. इसलिए यह कहना गलत है कि सरकार ने अभी ही कोई ऐसा आदेश दिया है या फिर पासपोर्ट को नागरिकता का प्रमाण मानने से इनकार किया है. सरकारी सूत्रों का कहना है कि ऐसा नियम तो पहले से ही है कि पासपोर्ट, आधार कार्ड, पैन या फिर अन्य कोई पहचान का प्रमाण नागरिकता का दस्तावेज नहीं है.

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