राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने मंगलवार को तीन मई को आयोजित मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'नीट-यूजी-2026' को रद्द कर दिया. दरअसल इस परीक्षा का पेपर लीक होने की खबरें आई थीं. सरकार ने इस मामले की सीबीआई से जांच के आदेश दिए हैं. मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए ली जाने वाली यह परीक्षा अब बाद में आयोजित की जाएगी. परीक्षा की नई तिथियों का ऐलान अभी एनटीए ने नहीं किया है.लेकिन ऐसा पहली बार नहीं है कि नीट-यूजी की परीक्षा का पेपर लीक होने की खबरें आई हैं. इससे पहले 2024 में भी ऐसा हो चुका है.
इससे पहले NEET-UG पर कब हुआ था विवाद
साल 2024 की NEET-UG की परीक्षा में भी गड़बड़ी के आरोप लगे थे. उस समय झारखंड और बिहार के छात्रों ने आरोप लगाया कि पेपर लीक हुआ था. सीबीआई जांच में भी यह बात साबित हुई थी कि कुछ छात्रों को परीक्षा से पहले साल्व क्वेश्चन पेपर उपलब्ध कराए गए थे. लेकिन परीक्षा रद्द नहीं की गई. मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा था. अदालत ने परीक्षा रद्द करने से इनकार कर दिया था. उस साल 1563 छात्रों को दिए गए ग्रेस मार्क पर भी विवाद हुआ था. बाद में इन छात्रों का री टेस्ट हुआ था.लेकिन इसमें केवल 813 छात्र ही शामिल हुए. इस री-नीट के टॉपर के 680 नंबर आए थे, जबकि पहले हुई परीक्षा में उसे 720 नंबर मिले थे.
नीट-2024 का रिजल्ट विवादों से भरा हुआ था. जून 2024 के नीट एग्जाम में कुल 67 लोगों ने परीक्षा टॉप की थी. इन्हीं में से एक छात्रा गुजरात के एक बड़े डॉक्टर की बेटी थी. उसने नीट की परीक्षा में 720 में से 705 अंक हासिल किए थे. लेकिन आश्चर्यजनक बात यह थी कि वह 12वीं की बोर्ड परीक्षा के फिजिक्स और केमेस्ट्री की परीक्षा में फेल हो गई थी.वह सप्लीमेंट्री परीक्षा में भी इन पेपरों में पास नहीं हो पाई.इसका परिणाम यह हुआ कि नीट टॉपर किसी मेडिकल कॉलेज में दाखिला नहीं ले पाई थी.
NEET-UG में सीटों के लिए क्यों रहती है मारामारी
दरअसल नीट की परीक्षा में धांधली की एक बड़ी वजह सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की फीस का विशाल अंतर भी है. सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई की फीस 20 हजार से 60 हजार रुपये सालाना में हो जाती है.वहीं प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में यह फीस 15 से 45 लाख रुपये सालाना तक की है.इस वजह से सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के लिए मारामारी रहती है.

सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की फीस का यह बड़ा अंतर NEET की परीक्षा में अनियमितता, पेपर लीक और छात्रों की आत्महत्या को जन्म देता है. यहीं से शुरू होता है परीक्षा माफिया या पेपर लीक माफिया का रोल. वह लोगों से पैसे लेकर मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिलाने का सपना दिखाते हैं. अभिभावक भी सोचते हैं कि कुछ लाख खर्च कर उनका बच्चा सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन ले लेगा और वो प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की भारी-भरकम फीस देने से बच जाएंगे. यहीं से शुरू हो जाता है पेपर लीक, प्रॉक्सी कैंडिडेट और साल्वर गैंग का खेल. इस नेक्सस को तोड़ पाने में एनटीए आजतक नाकाम रहा है.
क्या NEET-UG की परीक्षा मेरिटोक्रेसी है
साल 2024 में भारत में एलोपैथिक डॉक्टरों के सबसे बड़े संगठन आईएमए के प्रमुख डॉक्टर आरवी अशोकन ने एनडीटीवी से बातचीत में एनटीए की ओर से परीक्षा आयोजित कराए जाने के तरीके पर सवाल उठाए थे.उन्होंने कहा था कि भारत जैसे विविधता वाले देश में एक राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा को इस तरह से संपन्न कराना नाइंसाफी की तरह है. उनका कहना था कि नीट की शुरुआत से पहले तमिलनाडु जैसे राज्य के मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेने वाले 98 फीसद छात्र वहां के शिक्षा बोर्ड और सरकारी स्कूलों से पढ़े-लिखे होते थे. उन्होंने नीट को मेरिटोक्रेसी बताया था. उन्होंने कहा था कि इससे सामाजिक न्याय और समानता का सिद्धांत पीछे छूट जाता है. डॉक्टर आशोकन ने बताया था कि NEET गरीब और सामाजिक रूप से पिछड़े बच्चों की आकंक्षाओं को समझने में नाकाम रहा है.उनके मुताबिक एक खास तरह के पैटर्न की वजह से नीट में सफलता के लिए कोचिंग सेंटर से पढ़ाई जरूरी हो गई है.
क्या मेडिकल के लिए मल्टीपल च्वाइस क्वेश्चन सिस्टम सही है
वहीं एनसीईआरटी के पूर्व प्रमुख और देश के जाने-माने शिक्षाविद कृष्ण कुमार ने नीट की परीक्षा प्रणाली और एमसीक्यू (मल्टीपल च्वाइस क्वेश्चन सिस्टम) पर ही सवाल उठाते रहे हैं. उन्होंने एनडीटीवी से कहा था कि बच्चों से उम्मीद की जाती है कि वो प्रश्न पढ़ते ही किसी सवाल के चार जवाबों में से सही जवाब की पहचान कर लें. उनका कहना है कि यह तभी संभव होगा जब बच्चे ने किताब और सवालों का कई बार अभ्यास किया हो. उनका कहना है कि यह कहीं से भी डॉक्टरी से जुड़ा नहीं है, क्योंकि डॉक्टर का काम सोच की प्रक्रिया से गुजरता है. लेकिन छात्रों के इस मूल्यांकन सिस्टम में यह सोच ही नहीं है.
एनटीए के तौर-तरीके पर इससे पहले भी सवाल उठते रहे हैं खासकर परीक्षा आयोजित करने को लेकर. इस पर सवाल उठाने वालों में सीबीएसई के पूर्व निदेशक अशोक गांगुली भी शामिल रहे हैं. उन्होंने सुझाव दिया था कि जिस परीक्षा में 10 लाख से अधिक बच्चे बैठते हों, उसे एक पाली में आयोजित करने की जगह कई पालियों में आयोजित किया जाए.
एनटीए के काम नहीं आईं उसकी तैयारियां
साल 2024 की NEET-UG परीक्षा में विवाद के बाद सरकार ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व प्रमुख के राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक सात सदस्यों वाली कमेटी का गठन किया था. इस समिति ने परीक्षाओं की सुरक्षा के लिए कई सुझाव दिए थे. इनमें परीक्षा केंद्रों की जिला प्रशासन और पुलिस की निगरानी में सील करना, जीपीएस लगे वाहनों से प्रश्न पत्रों को पहुंचाना, सीसीटीवी से निगरानी, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और सेंट्रलाइज्ड मानिटरिंग सिस्टम बनाना शामिल था. एनटीए ने कहा है कि NEET-UG-2026 की तीन मई, 2026 को परीक्षा निर्धारित समय पर और पूर्ण सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत आयोजित की गई थी.इसमें प्रश्न पत्रों को जीपीएस-ट्रैकिंग वाले वाहनों में ले जाया गया था, जिन पर विशिष्ट,'ट्रेस' करने योग्य 'वॉटरमार्क' लगे थे और परीक्षा केंद्रों की निगरानी एक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से एआई-सहायता प्राप्त सीसीटीवी निगरानी के जरिए की गई यानि की एनटीए ने समिति के सुझावों को आत्मसात किया. लेकिन पेपर को लीक होने से नहीं रोक पाई.
साल 2025-2026 के शैक्षणिक सत्र में एमबीबीएस की एक लाख 28 हजार 947 और पीजी की 80 हजार 291 सीटों पर काउंसलिंग हुई थी. सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की 65 हजार 193 और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में 63 हजार 682 सीटें थीं.
NEET-UG-2026 परीक्षा में कितने छात्र शामिल हुए थे
NEET-UG-2026 परीक्षा तीन मई को देश के 551 शहरों और दूसरे देशों के 14 शहरों में आयोजित की गई थी. इस परीक्षा के लिए करीब 23 लाख छात्रों ने पंजीकरण कराया था. NEET-UG-2026 की परीक्षा स्थगित करने के बाद एनटीए ने कहा है कि मई 2026 के सत्र में पंजीकृत उम्मीदवारों की जानकारी और चुने गए परीक्षा केंद्रों को दुबारा होने वाली परीक्षा में शामिल किया जाएगा.इन छात्रों को फिर से पंजीकरण कराने या फीस भरने की जरूरत नहीं होगी. एनटीए छात्रों को फीस वापस कर अपने संसाधन से दुबारा परीक्षा का आयोजन करेगा.
इससे पहले कब रद्द हुई थी मेडिकल परीक्षा
इससे पहले 2015 में ऑल इंडिया प्री मेडिकल/प्री डेंटल टेस्ट (एआईपीएमटी)को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर निरस्त कर दिया गया था. उस समय आरोप लगा था कि कुछ छात्रों ने ब्लूटूथ डिवाइस और माइक्रो सिम का इस्तेमाल परीक्षा के दौरान नकल करने के लिए किया. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दुबारा परीक्षा ली गई थी. इसके अगले साल 2016 में एआईपीएमटी की जगह NEET ने ले ली थी. 2025 में तत्कालीन शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने 2024 में लोकसभा में बताया था कि एनटीए ने 2018 में अपनी स्थापना के बाद से अब तक कम से कम 16 परीक्षाओं को स्थगित किया है. उन्होंने बताया था कि एनटीए ने अब तक 240 से अधिक परीक्षाओं का सफल आयोजन किया है, जिनमें 5.4 करोड़ से ज्यादा छात्र शामिल हुए हैं.
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