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सिंगूर प्रोजेक्ट, सारदा की CBI जांच और अब SIR... 20 साल बाद फिर धरने की राजनीति पर क्यों लौटीं ममता?

लगभग दो दशक बाद ममता फिर से उसी जगह लौट आई हैं, जहां से सब कुछ शुरू हुआ था. लेकिन इस बार व्यवस्थाएं भव्य हैं और लड़ाई कहीं अधिक कठिन है. SIR के खिलाफ कोलकाता के धर्मतल्ला में धरना दे रहीं सीएम ममता बनर्जी की राजनीति का कारण समझिए.

सिंगूर प्रोजेक्ट, सारदा की CBI जांच और अब SIR... 20 साल बाद फिर धरने की राजनीति पर क्यों लौटीं ममता?
रविवार को LPG गैस की कीमत में बढ़ोतरी को लेकर धर्मतल्ला पर हाथों में बर्तन लिए प्रदर्शन करतीं नजर आईं बंगाल सीएम ममता बनर्जी.
  • बंगाल चुनाव से पहले ममता बनर्जी फिर अपने पुराने उग्र विपक्षी नेता की छवि में नजर आ रही हैं.
  • ममता बनर्जी ने SIR के विरोध में धरना शुरू किया है, लेकिन वो अन्य मुद्दों पर भी BJP पर हमले कर रही हैं.
  • धर्मतल्ला वहीं स्थान है जहां ममता ने 2006 में वामपंथी सरकार के खिलाफ भूख हड़ताल कर अपनी छवि मजबूत की थी.
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कोलकाता:

Mamata Banerjee Protest Kolkata: पश्चिम बंगाल में कुछ दिनों बाद होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज है. ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले सत्ताधारी TMC को इस बार बीजेपी से पूरी टक्कर मिलने की बात कही जा रही है. लगातार 3 बार से बंगाल की सत्ता संभाल रहीं ममता बनर्जी के लिए एंटी इनकंबेंसी की भी चर्चा है. दूसरी ओर दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करने वाली बीजेपी पूरी ताकत से बंगाल फतह की तैयारी में जुटी है. जानकारों का कहना है कि इस बार ममता बनर्जी को अपने सबसे कठिन चुनाव का सामना करना पड़ रहा है. क्योंकि बीते कुछ सालों में पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने अपनी ताकत काफी बढ़ा ली है. 

SIR को ममता ने राजनीतिक अभियान का बनाया केंद्र

BJP से मिल रही चुनौती को साधने के लिए ममता बनर्जी अपने 'कोर' पर लौटती नजर आ रही हैं. बंगाल में चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) को ममता बनर्जी ने अपने नवीनतम राजनीतिक अभियान का केंद्र बना लिया है. देश की राजधानी दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट से लेकर कोलकाता की सड़कों तक TMC प्रमुख जनता की राय को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं.

धर्मतल्ला में धरने को संबोधित करतीं ममता बनर्जी.

धर्मतल्ला में धरने को संबोधित करतीं ममता बनर्जी.

कोलकाता के बीचों-बीच धर्मतल्ला पर चल रहा ममता का धरना

राजधानी कोलकाता के बीचों-बीच ईडन गार्डन, राजभवन, कलकत्ता उच्च न्यायालय और विधानसभा के बीच स्थित एक व्यस्त चौराहे पर ममता बनर्जी  ने SIR के विरोध में धरना शुरू कर दिया है और भाजपा के खिलाफ अपने आंदोलन को सड़कों पर उतार दिया है. उनके राजनीतिक अभियान का केंद्र मेट्रो वाई चैनल या धर्मतल्ला है.

2006 में यहीं से ममता बनर्जी ने की शुरुआत

यहीं पर 2006 में तत्कालीन विपक्षी नेता ममता ने ज्योति बसु के नेतृत्व वाली वामपंथी सरकार के खिलाफ 26 दिनों की भूख हड़ताल की थी. ममता बनर्जी के इसी भूख हड़ताल के कारण सिंगूर में लगने वाला टाटा नैनो का प्रोजेक्ट गुजरात में शिफ्ट हुआ था. 2006 में ममता की इस भूख हड़ताल ने देश के राजनीतिक इतिहास में उनकी जुझारू छवि को और मजबूत किया, जिसके चलते वे 2011 में राज्य के सर्वोच्च पद तक पहुंचीं.

2006 में सिंगूर टाटा प्रोजेक्ट के खिलाफ ममता बनर्जी का प्रदर्शन.

2006 में सिंगूर टाटा प्रोजेक्ट के खिलाफ ममता बनर्जी का प्रदर्शन.

दो दशक बाद फिर वहीं लौटीं ममता, लेकिन इस बार लड़ाई कठिन

लगभग दो दशक बाद ममता फिर से उसी जगह लौट आई हैं जहां से सब कुछ शुरू हुआ था. लेकिन इस बार व्यवस्थाएं भव्य हैं और लड़ाई कहीं अधिक कठिन है. पंखों से सुसज्जित एक विशाल मंच, नेता के बैठने के लिए तकियों से सुसज्जित एक मंच. पृष्ठभूमि में केवल उनकी तस्वीर वाला एक फ्लेक्स लगा है, जिस पर लिखा है - भाजपा चुनाव आयोग के SIR के जरिए लोकतंत्र पर चोट कर रही है. जनता से मतदान का अधिकार छीन रही है. यह संदेश केवल बांग्ला में है, जो राज्य की आधिकारिक भाषा है.

TMC समर्थक बोलीं- जनता के बीच केवल ममता ही नजर आती हैं

इस धरने में शामिल हो रही तृणमूल समर्थक इंदिरा सरकार ने NDTV को बताया कि धर्मतल्ला में मुख्यमंत्री का विरोध हमेशा यह दर्शाता है कि वे जनता के साथ हैं. उन्होंने आगे कहा, "जब भी दीदी यहां विरोध-प्रदर्शन पर बैठती हैं, तो लोगों को यह संदेश मिलता है कि मुश्किल समय में जनता के बीच केवल एक ही नेता नजर आता है और वह हैं ममता बनर्जी."

ममता के धरनास्थल पर समर्थकों की भीड़ हर रोज जुट रही हैं.

ममता के धरनास्थल पर समर्थकों की भीड़ हर रोज जुट रही हैं.

2019 में ममता ने सारदा घोटाले की जांच में सीबीआई के खिलाफ दिया था धरना

यह वही जगह है, जहां मुख्यमंत्री ने 2019 में सारदा घोटाले की जांच में CBI के दायरे में आए अपने पूर्व कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार के समर्थन में धरना भी दिया था. यह धरना कोलकाता पुलिस कर्मियों द्वारा सीबीआई अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद हुए अभूतपूर्व टकराव के बाद दिया गया था. उस विरोध प्रदर्शन के दौरान भी कनिमोझी, तेजस्वी यादव, चंद्रबाबू नायडू और किरणमय नंदा जैसे नेता भी आए थे, जिसके बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया और कार्यालय में कार्यभार संभाला.

एसआईआर के साथ-साथ अन्य मुद्दों पर भी आवाज बुलंद कर रहीं ममता

लेकिन इस बार, यह मंच एसआईआर के अलावा विभिन्न मुद्दों पर केंद्र सरकार के खिलाफ उनके राजनीतिक हमले का मंच बन गया है. चाहे वह एलपीजी की कीमतों में वृद्धि हो, राष्ट्रपति मुर्मू की यात्रा के दौरान प्रोटोकॉल उल्लंघन का खंडन हो, या केंद्र द्वारा विपक्षी दलों की आवाज दबाने के लिए संविधान की अनदेखी करना हो. उनके दल के सांसद, विधायक, पार्षद और यहां तक ​​कि प्रतिष्ठित नागरिक भी उनके साथ बैठे, भाषण दिए और विरोध प्रदर्शन के तहत केंद्र सरकार के खिलाफ उनके द्वारा रचित गीतों में शामिल हुए.

धरने में ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी भी साथ नजर आते हैं.

धरने में ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी भी साथ नजर आते हैं.

रोजाना 10 बजे मंच पर आती हैं ममता, जुटी रहती हैं भीड़

रोजाना सुबह लगभग 10 बजे, पर्दा उठता है और ममता बनर्जी मंच पर आती हैं और उनकी एक झलक पाने के लिए जमा हुए समर्थकों को हाथ हिलाकर अभिवादन करती हैं. व्यस्त दफ्तर जाने वाले लोग और स्कूल से लौट रहे छात्र भी अपने माता-पिता के साथ मुख्यमंत्री को देखने के लिए कार्यक्रम स्थल पर पहुंचते हैं, जिन्हें आमतौर पर केवल टेलीविजन स्क्रीन पर ही देखा जाता है. 

यातायात पुलिस अब तक यातायात को सुचारू रूप से नियंत्रित करने की आदी हो चुकी है, क्योंकि व्यस्त चौराहे के एक हिस्से को भीड़ और VIPआवागमन के लिए व्यस्त समय में बंद कर दिया जाता है.

BJP प्रदेश अध्यक्ष का तंज- चुनाव बाद धर्मतल्ला ही होगा ममता का स्थायी निवास

लेकिन भाजपा मुख्यमंत्री के धरने को और अधिक तवज्जो नहीं देना चाहती, जिस पर दिन भर टीवी कैमरे लगे रहते हैं. केंद्रीय राज्य मंत्री और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुकांत मजूमदार ने कहा, "यह उनके लिए एक अच्छा अभ्यास है, क्योंकि पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों में भाजपा की जीत के बाद वे राज्य में विपक्ष की नेता के रूप में लौट आएंगी. उसके बाद उन्हें विरोध प्रदर्शन के लिए धर्मतल्ला में स्थायी रूप से बैठना होगा."

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'SIR ने आम जनता को सचमुच परेशान कर दिया है'

लेकिन पश्चिम बंगाल में TMC का समर्थन करने वालों के लिए ऐसे विरोध-प्रदर्शन राजनीतिक लड़ाइयों को और तेज़ कर देते हैं. ममता बनर्जी के धरनास्थल पर मौजूद सुशांत चटर्जी ने NDTV से कहा, “SIR ने आम जनता को सचमुच परेशान कर दिया है. दस्तावेज़, अनिश्चितता, नाम हटाए जाने से कई लोगों का जीवन प्रभावित हुआ है. BJP ज़मीनी स्तर पर गायब है, केवल TMC ही जनता की मदद करती नज़र आ रही है ताकि उनके नाम छूट न जाएं,” 

एक्सपर्ट- डिफेंस में ममता अपनी पुरानी उग्र छवि को कर रही जिंदा 

NDTV के सलाहकार संपादक और राजनीतिक विश्लेषक जयंता घोषाल के अनुसार, ममता बनर्जी आक्रामक रुख अपनाकर अपनी रक्षा कर रही हैं.

जयंता घोषाल ने कहा, “वह पुरानी उग्र विपक्षी छवि को फिर से जिंदा करने की कोशिश कर रही हैं. वह इन हथकंडों से 15 साल के शासन के खिलाफ़ उमड़ी सत्ता विरोधी लहर को मोड़ने की कोशिश कर रही हैं. BJP को बदनाम करके उन पर इस तरह हमला कर रही हैं जैसे वह दिल्ली के खिलाफ़ लड़ने वाली विपक्षी नेता हों.” 

SIR की डॉफ्ट लिस्ट से 58.2 लाख वोटरों के नाम कटे

उल्लेखनीय हो कि पश्चिम बंगाल के कुल 7.66 करोड़ मतदाताओं में से 58.2 लाख मतदाताओं को SIR की डॉफ्ट लिस्ट से हटा दिया गया, जिससे नई मतदाता संख्या 7.04 करोड़ रह गई. हालांकि, केवल पश्चिम बंगाल में ही 60 लाख मतदाता विसंगति सूची में हैं, जिसकी अब सर्वोच्च न्यायालय में मामला पहुंचने के बाद न्यायपालिका द्वारा जांच की जा रही है.

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