जगन्नाथ रथ यात्रा को लेकर पुरी मंदिर समिति और इस्कॉन के बीच विवाद क्यों? समझें टाइमिंग को लेकर क्यों उलझे

भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा को असमय कराने को लेकर पुरी मंदिर समित और इस्कॉन के बीच विवाद सामने आ रहा है. पुरी के राजा ने इस मामले को लेकर राष्ट्रपति और पीएम मोदी को खत लिखकर गुहार भी लगाई है.

जगन्नाथ रथ यात्रा को लेकर पुरी मंदिर समिति और इस्कॉन के बीच विवाद क्यों? समझें टाइमिंग को लेकर क्यों उलझे
जगन्नाथ रथ यात्रा को लेकर पुरी मंदिर समिति और इस्कॉन में विवाद क्यों

दुनियाभर में निकाली जाने वाली भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा को लेकर पुरी मंदिर की समिति और इस्कॉन के बीच विवाद खड़ा हो गया है. ये यात्रा पुरी में इस बार 16 जुलाई से शुरू होगी, लेकिन इस्कॉन पहले ही कई देशों में इस यात्रा का आयोजन कर चुका है. साथ ही कई देशों में अलग-अलग तारीखों पर ये यात्रा निकाली जाने वाली है. पूरा विवाद इन्हीं तारीखों को लेकर है. इस मामले पर पुरी के राजा गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब ने नाराजगी जताई है. बता दें कि गजपति महाराजा मंदिर के फैसले लेने वाली जगन्नाथ मंदिर समिति (SJTMC) के अध्यक्ष भी हैं. उन्होंने कहा कि भगवान की रथ यात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीय स्थिति से शुरू होनी चाहिए. स्कंद पुराण में इसका जिक्र भी है और अन्य शास्त्रों में भी उल्लेख है. इस्कॉन परंपरा तोड़ रहा है. जब हर धर्म और मजहब में पर्वों की तिथि तय होती है तो इस्कॉन शास्त्रों के मुताबिक तय नियमों का पालन क्यों नहीं कर रहा? बता दें कि पुरी मंदिर से जुड़े  विद्वानों ने इस्कॉन से जुड़े लोगों से बात की है,  लेकिन मामला वहीं का वहीं है. पुरी के गजपति महाराजा का कहना है कि भगवान जगन्नाथ के मामले में कैसे नियमों के खिलाफ जा सकते हैं. वे महर्षि वेदव्यास और स्कंद पुराण के विरुद्ध क्यों जा रहे हैं?

इस्कॉन कृष्ण जन्माष्टमी पर नियम मानता है तो भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में क्यों नहीं- पुरी मंदिर समिति

पीटीआई से बातचीत में गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब ने बताया कि दो दशक से इस्कॉन से इस पर बातचीत जारी थी. 2021 में उन्होंने भारत में होने वाली रथयात्राओं को लेकर सहमति भी दे दी थी, लेकिन भारत के बाहर वह तय तिथि पर यात्रा निकालने के लिए तैयार नहीं हैं, ये बहुत निराशाजनक है. हमने उनसे अनुरोध किया था कि फैसले पर विचार करें, लेकिन उन्होंने चिट्ठी लिखकर मना कर दिया है. जब वे कृष्ण जन्माष्टमी पर नियमों का उल्लंघन नहीं करते तो रथ यात्रा पर क्यों करते हैं. 

Advertisement - Scroll to continue
Latest and Breaking News on NDTV

(फोटो- इस्कॉन मंदिर द्वारा आयोजित भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा )

विदेशों में मौसम और नियम अलग तो एक ही तिथि पर रथयात्रा कैसे संभव- इस्कॉन

वहीं पुरी जगन्नाथ मंदिर की प्रमुख समिति ने इस्कॉन के इस दावे को खारिज कर दिया की मनमाने दिनों में रथयात्रा का आयोजन शास्त्रों के मुताबिक है. उन्होंने कहा कि ये दुनियाभर में भक्तों को गुमराह करने का प्रयास है. श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने इसे लेकर कहा कि 12 जुलाई को मीडिया में प्रसारित इस्कॉन की ओर से जारी बयान झूठे हैं और इसका उद्देश्य असमय जगन्नाथ रथ यात्रा के संबंध में जनता को गुमराह करना है. पीटीआई ने फोन पर संपर्क किया तो इस्कॉन के राष्ट्रीय प्रवक्ता युधिष्ठिर गोविंद दास ने SJTA के विचारों पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया. उन्होंने कहा कि हमने एसजेटीए का बयान नहीं देखा, इसलिए टिप्पणी करना कठिन है. हालांकि एक चैनल से बातचीत में युधिष्ठिर गोविंद दास ने कहा कि दुनियाभर में 1000 से अधिक भगवान जगन्नाथ की यात्राएं निकलती हैं, उनमें से 500 तो भारत के अलग-अलग शहरों में निकलती हैं. भारत में जो यात्राएं निकलती हैं उनकी तिथि जगन्नाथ मंदिर प्रशासन से बातचीत के बाद तय होती है, लेकिन दुनिया के अलग-अलग देशों का मौसम और नियम कानून अलग हैं, इसलिए हर जगह एक साथ यात्रा निकलना संभव नहीं हैं. 

Latest and Breaking News on NDTV

(फोटो- पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर)

इस्कॉन पर लगाया पुरी मंदिर समिति ने ये आरोप

पुरी जगन्नाथ मंदिर की प्रमुख समिति ने बताया कि एसजेटीए और इस्कॉन के विद्वानों ने 20 मार्च 2025 को भुवनेश्वर में एक मीटिंग की थी, उस बैठक में शास्त्रों और कुछ अन्य आधारों पर विभिन्न तिथियों पर भारत के बाहर रथ यात्रा के आयोजन को उचित ठहराने का प्रयास किया गया, हालांकि मंदिर के विद्वानों प्रामाणिक शास्त्रों का हवाला देते हुए इन्हें खारिज कर दिया. उन्होंने इस्कॉन पर ये आरोप भी लगाया कि वे ये साबित करने की कोशिश कर रहे हैं पुरी के राजा गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब ने रथ यात्रा को असमय आयोजित करने को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मंजूरी दी है. इस पर पुरी मंदिर समिति ने साफ किया है कि ये जानबूझकर और दुर्भावना से पूर्ण बयान है, जो गजपति महाराजा की सत्यनिष्ठा पर एक कलंक जैसा है. 

इस्कॉन की बेंगलुरु इकाई ने कहा- पुरी के जगन्नाथ मंदिर द्वारा तय तारीखों पर ही रथ यात्रा करेंगे 

उधर अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) की बेंगलुरु इकाई ने कहा कि वे पुरी के जगन्नाथ मंदिर द्वारा तय किए नौ दिनों के दौरान ही अपने केंद्रों पर रथ यात्रा का आयोजन करेंगे. ये फैसला मायापुर मुख्यालय वाले इस्कॉन समूह के इस मामले पर अपनाए गए रुख से अलग है. उन्होंने साथ ही ये भी स्पष्ट किया की इस्कॉन की बेंगलुरु इकाई दूसरे इस्कॉन समूह जिनका मुख्यालय पश्चिम बंगाल के मायापुर में है, उनसे अलग और स्वतंत्र संस्था है. बता दें कि इस्कॉन के मायापुर मुख्यालय ने पुरी के जगन्नाथ मंदिर की उस अपील को ठुकरा दिया, जिसमें दुनियाभर के देशों में अलग अलग तारीखों पर रथयात्रा आयोजित करने पर फिर से विचार करने को कहा गया. इस्कॉन ने अपने बयान में कहा कि वह सम्मानपूर्वक इस चर्चा से हमेशा अलग हो रहा है.

पुरी के राजा ने राष्ट्रपति और पीएम मोदी को खत लिखकर हस्तक्षेप की मांग की

पुरी के राजा गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है. उन्होंने मांग की मायापुर मुख्यालय वाले इस्कॉन को परंपरा से हटकर अलग-अलग तारीखों पर रथयात्रा आयोजित करने से रोका जाना चाहिए.

Interesting facts about jagannath Rath Yatra: जगन्नाथ रथ यात्रा के बारे में रोचक बातें

  1. बता दें कि इस साल जगन्नाथ यात्रा की शुरुआत 16 जुलाई से हो रही और 24 जुलाई तक चलेगी. इस दौरान भगवान जगन्नाथ अपनी बहन सुभद्रा माता और भाई बलराम के साथ तीन अलग-अलग रथों में सवार होगा गुंडिचा मंदिर जाते हैं. 
  2. इस रथ के लिए खास तरह की नीम के पेड़ की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है. रथ यात्रा के लिए समिति का गठन करके शुभ वृक्षों को चुना जाता है. 
  3. रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथजी के रथ को नंदीघोष, बलरामजी के रथ को तालध्वज और सुभद्रा माता के रथ को दर्पदलन पद्म नाम से जाना जाता है.
  4. यात्रा के दौरान रथ एक मुसलमान भक्त की मजार पर भी रुकता है. उसका नाम  सालबेग था, उसकी मां हिन्दू और पिता मुगल सिपाही थे.
  5. रथ को बनाने के लिए किसी भी प्रकार की नुकीली कील आदि का इस्तेमाल नहीं किया जाता

 9 Dayes Details of Jagannath Yatra: भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के नौ दिनों में क्या-क्या होता है

  • पहला दिन: भगवान जगन्नाथ (नंदीघोष रथ), माता सुभद्रा (दर्पदलन) और बलराम (तालध्वज)अपने रथों में सवार होकर पुरी के मुख्य मंदिर से गुंडिचा मंदिर के निकलते हैं.
  • दूसरा दिन: गुंडिचा मंदिर पहुंचते ही भगवान जगन्नाथ की पूजा की जाती है और उनके "आडप मंडप" पर दर्शन करते हैं.
  • तीसरा, चौथा और पांचवां दिन: भगवान को विशेष भोग लगाते हैं और भक्तगण उनके दर्शन और पूजा-अर्चना करते हैं.
  • छठा दिन (हेरा पंचमी): छठे दिन लक्ष्मी माता भगवान जगन्नाथ को ढूंढते हुए गुंडिचा मंदिर पहुंच जाती हैं, क्योंकि भगवान इतने दिनों के लिए छोड़कर जाते हैं. मान्यता है कि उनकी नाराजगी को शांत करने के लिए भगवान उन्हें खास तोहफा देते हैं.
  • सातवां और आठवां दिन : कहा जाता है इन दिनों में देवगण गुंडिचा मंदिर में विश्राम करते हैं और इस दौरान 'संध्या दर्शन' का विशेष महत्व होता है.
  • नौवां दिन (बहुड़ा यात्रा): नौवें दिन भगवान अपने मुख्य निवास के लिए गुंडिचा मंदिर से वापसी करते हैं और इस यात्रा को 'बहुड़ा यात्रा' कहते हैं. वापसी के मार्ग में रथ मौसी मां मंदिर के पास रुकता है, जहां उन्हें पोड़ा पीठा का खास भोग लगाया जाता है. इसके बाद तीनों देव गर्भगृह में चले जाते हैं और वहां से भक्तों को दर्शन देते हैं. 

मान्यताओं के मुताबिक- रथयात्रा में रथ की रस्सियों को छूने या खींचने वाले को भगवान सभी पापों से मुक्त करके आशीर्वाद प्रदान करते हैं उन्हें मोक्ष मिलता है.इसलिए लाखों आदमी रथयात्रा में पहुंचते हैं.ये भी कहा जाता है कि रथयात्रा में लाखों आदमियों के लिए प्रशाद कभी कम नहीं पड़ता.