विज्ञापन

वामपंथी मिट्टी से निकले, बने उत्तर बंगाल में BJP के 'चाणक्य', जानें कौन हैं शंकर घोष जो बन सकते हैं डिप्टी CM

एक जमाने में वामपंथी राजनीति से जुड़े रहे शंकर घोष ने हिंदुत्व की ऐसी राह पकड़ी कि उत्तर बंगाल को बीजेपी का सबसे बड़ा गढ़ बनाने में जान लगा दी.

वामपंथी मिट्टी से निकले, बने उत्तर बंगाल में BJP के 'चाणक्य', जानें कौन हैं शंकर घोष जो बन सकते हैं डिप्टी CM

बीजेपी के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के अगले मुख्यमंत्री होंगे. शुक्रवार को बीजेपी विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर मुहर लगा दी गई. सूत्र बताते हैं कि बंगाल में बीजेपी दो डिप्टी सीएम बना सकती है. संभावित नामों में शंकर घोष भी शामिल हैं. दूसरा नाम अग्निमित्रा पॉल का बताया जा रहा है. अमित शाह ने भी दोनों से अलग से मुलाकात की है. इससे ये चर्चाएं जोर पकड़ गई हैं कि सिलीगुड़ी से जीतकर आए शंकर घोष को उपमुख्यमंत्री पद दिया जा सकता है. आइए बताते हैं कि शंकर घोष के बारे में और ये भी कि क्यों उन्हें उत्तर बंगाल में बीजेपी का 'चाणक्य' कहा जाता है. 

शुरुआती जीवन

पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले के विष्णुपुर में 12 जून 1974 को शंकर घोष का जन्म हुआ. उन्होंने 2013 में उत्तर बंगाल यूनिवर्सिटी से माइक्रोबायलॉजी में पीएचडी की. वह टीचर भी रहे हैं. उनकी पत्नी आईटी प्रोफेशनल हैं. 

Latest and Breaking News on NDTV

वाम राजनीति में एंट्री

  • 1991 में उन्होंने सीपीएम की छात्र शाखा स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) में शामिल होकर राजनीतिक जीवन की शुरुआत की. 
  • 1995 में वह सीपीएम की यूथ विंग डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) के मेंबर बने.
  • 2015 में सिलीगुड़ी नगर निगम के वार्ड नंबर 24 से पार्षद चुने गए और मेयर-इन-काउंसिल के रूप में शिक्षा, स्वास्थ्य और खेल जैसे विभाग संभाले. 
सीपीएम नेता शंकर घोष की बीजेपी में एंट्री को लेकर एक दिलचस्प किस्सा मशहूर है. 2021 में बंगाल के विधानसभा चुनाव से पहले शंकर एक सीपीएम कार्यकर्ता के दाह संस्कार में शामिल होने श्मशान घाट गए थे. उसी दौरान उनके पास दार्जिलिंग के बीजेपी सांसद राजू बिष्ट का फोन आया. कहा जाता है कि उस फोन कॉल ने शंकर घोष की राजनीतिक विचारधारा को पूरी तरह बदल दिया. बरसों से मार्क्सवादी विचारधारा की राह पर चलने वाले शंकर ने हिंदुत्व की राह चुन ली.

पहले चुनाव में 'गुरु' को मात दे पहुंचे विधानसभा

बीजेपी ने 2021 के बंगाल चुनाव में शंकर घोष को सिलीगुड़ी से उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा. इस चुनाव में शंकर घोष ने अपने ही राजनीतिक गुरु और दिग्गज वामपंथी नेता अशोक भट्टाचार्य को मात दी और पहली बार विधानसभा की सीढ़ी चढ़ गए. 

Latest and Breaking News on NDTV

शुभेंदु के करीबी, सदन में चीफ व्हिप  

विधानसभा में अपनी पहली पारी से ही शंकर घोष ने अपनी उपस्थिति दर्ज करानी शुरू कर दी थी. अनोखे अंदाज और तीखी शैली से धाक जमा ली. धीरे-धीरे वह उस वक्त के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के विश्वासपात्र बन गए. धोती पहनकर विधानसभा में उन्होंने ममता सरकार के खिलाफ खूब मोर्चा संभाला. 2024 में उन्हें सदन में बीजेपी का मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) बना दिया गया. इस दौरान उन्होंने ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ मुद्दों को जोरशोर से उठाया.

देखें- Bengal CM: 8 प्रस्ताव, केवल एक ही नाम, बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के नाम पर यूं लगी मुहर

Latest and Breaking News on NDTV

मार्शलों से बाहर निकलवा दिया था

पिछले साल सितंबर में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी ने बीजेपी शासित राज्यों में बंगाली प्रवासी श्रमिकों के उत्पीड़न का आरोप लगाकर सदन में प्रस्ताव पेश किया था. इस पर ममता जैसे ही बोलने के लिए खड़ी हुईं, बीजेपी विधायकों ने जोरदार हंगामा कर दिया. इस पर शंकर घोष, अग्निमित्रा पॉल समेत 5 बीजेपी विधायकों को सदन से निलंबित कर दिया गया था. लेकिन शंकर घोष ने सदन छोड़ने से इनकार कर दिया. इसके बाद मार्शलों के जरिए उन्हें बाहर ले जाया गया था. 

एक जमाने में वामपंथी राजनीति का बड़ा चेहरा रहे शंकर घोष ने हिंदुत्व की ऐसी राह पकड़ी कि उत्तर बंगाल को बीजेपी का सबसे बड़ा गढ़ बनाने में जान लगा दी. शंकर घोष की काबिलियत को देखते हुए पार्टी ने उन्हें उत्तर बंगाल की जिम्मेदारी सौंपी. 2026 में बीजेपी महासचिव बनकर उन्होंने टीएमसी के खिलाफ माहौल तैयार करने के लिए काफी काम किया. 

इस बार सिलीगुड़ी के मेयर को दी मात

2026 के विधानसभा चुनाव में शंकर घोष फिर से उत्तर बंगाल के सबसे बड़े शहर सिलीगुड़ी से मैदान में उतरे. टीएमसी ने उनके खिलाफ सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देब को मैदान में उतारा, लेकिन घोष ने 73,192 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल कर ली. घोष को कुल 1,20,760 वोट मिले थे. तीसरे नंबर पर सीपीएम के शारदेंदु चक्रवर्ती रहे, जिन्हें महज 9,168 वोट मिले. 

शंकर घोष की छवि उत्तर बंगाल में बीजेपी के 'चाणक्य' की तरह है. वह बंगाल के इस इलाके में बीजेपी के सबसे बड़े चेहरा हैं. क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने में उन्हें माहिर माना जाता है. उनकी साफ सुथरी छवि और शहरी मतदाताओं में लोकप्रियता ने दार्जिलिंग-सिलीगुड़ी में पार्टी का जनाधार खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई है. माना जा रहा है कि इन्हीं खूबियों को देखते हुए पार्टी उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाने पर विचार कर रही है. 

देखें- भय मुक्त बंगाल, संस्कृति, राष्ट्रीय सुरक्षा... शपथ ग्रहण से पहले शुभेंदु अधिकारी ने जनता से किए 5 बड़े वादे

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com