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Explained: क्या है आर्टिकल 3 जिसका इस्तेमाल करके केंद्र केरल को बनाएगा ‘केरलम’

केरल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले नए प्रधानमंत्री कार्यालय भवन ‘सेवा तीर्थ’ में मंगलवार को पहली कैबिनेट बैठक में केरल का नाम बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है.

Explained: क्या है आर्टिकल 3 जिसका इस्तेमाल करके केंद्र केरल को बनाएगा ‘केरलम’
  • सेवा तीर्थ में केंद्रीय कैबिनेट की पहली बैठक में केरल का नाम बदलकर केरलम करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई
  • केरल विधानसभा ने 2023 और उसके बाद 2024 में सर्वसम्मति से राज्य का नाम बदलने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था
  • संविधान के आर्टिकल 3 के तहत केंद्र सरकार को राज्य के नाम, सीमा या क्षेत्र में बदलाव का विधिक अधिकार है
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट ने नए पीएमओ सेवातीर्थ में मंगलवार को हुई पहली बैठक में केरल को लेकर अहम प्रस्ताव पारित किया. सरकार ने केरल का नाम बदलकर केरलम करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले इसे बड़ा कदम माना जा रहा है. मोदी सरकार ने संविधान के आर्टिकल 3 के तहत यह कदम उठाया है. जानिए इस आर्टिकल में केंद्र को ऐसे क्या अधिकार दिए गए हैं, जिनका इस्तेमाल करके वह किसी राज्य की सीमा, क्षेत्र या नाम में बदलाव कर सकता है. 

1 नवंबर 1956  को केरल का गठन

केरल का गठन 1 नवंबर 1956 को भाषाई आधार पर किया गया था. केरल की आधिकारिक भाषा मलयालम है. मलयालम में केरल को केरलम ही कहा जाता है. स्वतंत्रता संग्राम के दौरान मलयालम भाषी लोगों ने संयुक्त केरल के गठन की पुरजोर मांग उठाई थी. लेकिन संविधान की पहली अनुसूची में इसका नाम केरल दर्ज कर दिया गया. तभी से इसका ये नाम चला आ रहा था. 

2024 में केरल ने भेजा था प्रस्ताव

केरल विधानसभा ने 24 जून 2024 को एक प्रस्ताव आम सहमति से पारित किया था. इसमें राज्य का नाम बदलकर केरल से ‘केरलम' करने का आग्रह केंद्र से किया गया था. मुख्यमंत्री पिनराई विजयन चाहते हैं कि केंद्र राज्य के नाम के अलावा संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं में दक्षिणी राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम' कर दे. 

2023 में भी दिया गया था प्रस्ताव

केरल विधानसभा ने इस संबंध में प्रस्ताव को दूसरी बार सर्वसम्मति से पारित करके भेजा था. इससे पहले, केरल विधानसभा ने अगस्त 2023 में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करके केंद्र को भेजा था. उसके बाद गृह मंत्रालय ने इसमें कुछ तकनीकी बदलावों का सुझाव दिया था. उन सुझावों पर अमल करते हुए तकनीकी बदलाव करके दोबारा प्रस्ताव पारित करके भेजा गया था. 

सेवातीर्थ में पहली कैबिनेट बैठक में मुहर

केरल सरकार की तरफ से लंबे समय से केंद्र सरकार से संविधान के आर्टिकल 3 के तहत अधिकारों का इस्तेमाल करके केरल का नाम बदलकर केरलम करने की मांग हो रही थी. अब नए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) भवन ‘सेवा तीर्थ' में मंगलवार को आयोजित मंत्रिमंडल पहली बैठक में इस प्रस्ताव पर मंजूरी की मुहर लगा दी गई. कैबिनेट के इस फैसले की टाइमिंग अहम है, क्योंकि ये कदम अप्रैल-मई में होने वाले केरल विधानसभा के चुनाव से पहले उठाया गया है. 

देखें- केरलम, श्रीनगर में नया एयरपोर्ट टर्मिनल, रेलवे प्रोजेक्ट... सेवा तीर्थ में कैबिनेट की पहली बैठक के 8 बड़े फैसले

क्या है संविधान का आर्टिकल 3?

संविधान का आर्टिकल 3 संसद को यह अधिकार देता है कि वह किसी भी राज्य की सीमा, क्षेत्र या उसके नाम में बदलाव कर सके. इसी अनुच्छेद का इस्तेमाल करके केंद्र सरकार किसी नए राज्य का गठन कर सकती है या मौजूदा राज्य का नाम बदल सकती है. आर्टिकल 3 के मुताबिक, ऐसा कोई भी विधेयक संसद में तब तक पेश नहीं किया जा सकता, जब तक कि राष्ट्रपति की हरी झंडी न मिल जाए. राष्ट्रपति इस विधेयक को प्रभावित होने वाले राज्य की विधानसभा के पास उसके विचार जानने के लिए भेजते हैं. उसी की राय के आधार पर नाम बदलने का प्रस्ताव आगे बढ़ता है. 

राज्य का नाम बदलने की प्रक्रिया 

  • किसी भी राज्य का नाम बदलना कोई छोटा काम नहीं है, इसके लिए लंबा कानूनी रास्ता अपनाना पड़ता है:
  • सबसे पहले केंद्रीय कैबिनेट इसके प्रस्ताव को मंजूरी देती है. केरल के मामले में मंगलवार को यह कदम उठाया जा चुका है.
  • अब राष्ट्रपति केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को केरल विधानसभा में भेजेंगे और इस पर राज्य की राय मांगेंगे. 
  • गृह मंत्रालय और कानून मंत्रालय पहले ही इस पर कानूनी सहमति दे चुके हैं, जिससे इस प्रक्रिया में अड़चन आने की आशंका नहीं है. 
  • केरल चूंकि खुद यह बदलाव चाहता है  इसलिए वहां से सहमति मिलना तय है. केरल विधानसभा को एक तय समय में अपनी राय देनी होगी. 
  • राज्य की राय मिलने के बाद राष्ट्रपति की सिफारिश पर इस बिल को लोकसभा और राज्यसभा में पेश किया जाएगा.
  • यह बिल पास करने के लिए विशेष बहुमत की जरूरत नहीं होगी. संसद के आधे से अधिक सदस्य अगर इसके पक्ष में वोट देंगे तो यह पारित हो जाएगा. 
  • दोनों सदनों से पारित होने के बाद राष्ट्रपति के आदेश से केरल का नाम बदलकर केरलम हो जाएगा.  

आगे क्या होगा?

संसद से बिल पास होने के बाद संविधान की पहली अनुसूची में बदलाव होगा. इसके बाद आधिकारिक तौर पर सरकारी दस्तावेजों, नक्शों और बोर्ड वगैरा पर 'केरल' की जगह 'केरलम' लिखा जाने लगेगा. 

देखें- केरल का नाम अब केरलम होगा, सेवा तीर्थ में कैबिनेट की बैठक में हुआ फैसला

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