कर्नाटक में आखिरकार वही हो गया जो लंबे समय से चर्चा में था. सत्ता का ट्रांसफर. सिद्धारमैया ने इस्तीफा दे दिया और अब डीके शिवकुमार की ताजपोशी तय मानी जा रही है. लेकिन असली सवाल ये है कि जो काम कांग्रेस राजस्थान और छत्तीसगढ़ में नहीं कर पाई, वो कर्नाटक में इतनी आसानी से कैसे हो गया?
दरअसल, इस बार पूरा खेल दिल्ली से तय हुआ. राहुल गांधी ने सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दोनों को बुलाया, मीटिंग की और फिर सिद्धारमैया को अलग से बुलाकर साफ कहा- अब आपको इस्तीफा देना चाहिए और डीके शिवकुमार को कुर्सी सौंप देनी चाहिए. साथ में ये भी ऑफर दिया कि आप राज्यसभा के जरिए दिल्ली आ जाइए, आपके अनुभव की जरूरत पड़ेगी.
-
NDTV World Summit 2026: PM मोदी समेत शामिल होंगे ये बड़े दिग्गज, जानिए क्या कुछ होगा खास? -
NDTV World Summit 2026: दिल्ली में दो दिन दुनिया के दिग्गजों का महामंथन -
NDTV World Summit 2026 का काउंटडाउन शुरू, एक मंच पर जुटेंगे दुनिया के दिग्गज -
NDTV World Summit 2026: 22-23 अक्टूबर को फिर सजेगा दुनिया के दिग्गजों का महामंच, देखिए पहली झलक -
दुनिया की सबसे असरदार और सबसे दमदार आवाजों के साथ लौट रहा है NDTV World Summit, देखिए सिर्फ NDTV पर -
NDTV World Summit 2026: AI, कूटनीति और अर्थव्यवस्था पर चर्चा, आज एक मंच पर जमा होंगे दुनिया के दिग्गज -
भारत की आर्थिक बढ़त से मानवता पर AI के खतरों तक, NDTV World Summit 2026 के दूसरे दिन किन मुद्दों पर होगी बात -
NDTV World Summit 2026: दुनिया की पहली AI एक्ट्रेस टिली नॉरवुड होंगी शामिल, कृति सेनन भी बनेंगी हिस्सा -
डिजिटल इकोनॉमी, एनर्जी, ग्लोबल ट्रेड... NDTV World Summit में पहले दिन किन-किन मुद्दों पर होगी बात -
NDTV World Summit 2026: दुनिया भर में कैसे बदल रहा है भारतीय खाने का स्वाद? वीर सांघवी बताएंगे देसी शेफ्स का ज
सिद्धारमैया ने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की. उन्होंने कहा कि सरकार अच्छी चल रही है, गारंटी योजनाएं लागू हो रही हैं और अगला चुनाव उनके नेतृत्व में लड़ा जाना चाहिए. यहां तक कहा कि 2028 में वे खुद सत्ता डीके शिवकुमार को सौंप देंगे. लेकिन इस बार राहुल गांधी नहीं माने. राहुल ने सीधा फैसला सुनाया और कोई समझौता नहीं किया.

दिल्ली से हुआ कर्नाटक का फैसला.
Photo Credit: PTI
दिल्ली से तय हुआ फैसला, विधायकों की राय नहीं
सबसे अहम बात यह रही कि इस बार न कोई ऑब्जर्वर बेंगलुरु भेजा गया, न विधायकों की राय ली गई. वजह साफ थी, ज्यादातर विधायक सिद्धारमैया के साथ थे. अगर उनकी राय ली जाती तो मामला अटक सकता था, जैसा पहले हो चुका है.
यह भी पढ़ें- सिद्धारमैया ने ठुकराया राज्यसभा का ऑफर, CM पद छोड़कर बोले- 'हाईकमान का आदेश था, इसलिए इस्तीफा दिया'
राजस्थान-छत्तीसगढ़ में क्यों फेल हुआ फॉर्मूला?
अब जरा राजस्थान की तरफ चलते हैं. 2022 में कांग्रेस आलाकमान अशोक गहलोत को हटाकर सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाना चाहता था. इसके लिए ऑब्जर्वर जयपुर भेजे गए, लेकिन गहलोत कैंप ने विधायकों की ताकत दिखा दी. पूरा प्लान वहीं फेल हो गया. आलाकमान को पीछे हटना पड़ा और बाद में चुनाव भी हार गए.
छत्तीसगढ़ की कहानी भी लगभग ऐसी ही रही. वहां 90 सीटों की विधानसभा में कांग्रेस के पास 68 विधायक थे. जबरदस्त बहुमत. फॉर्मूला बना कि भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री रहेंगे. लेकिन जब भी बदलाव की बात आई, बघेल समर्थक विधायक जुटा लेते थे. हाईकमान हर बार दबाव में आ गया और फैसला टलता गया. नतीजा यह हुआ कि अंदरूनी लड़ाई के चक्कर में चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा.
केरल का भी अहम किस्सा
केरल का उदाहरण भी दिलचस्प है. वहां विधायकों का झुकाव केसी वेणुगोपाल की तरफ बताया जाता था, लेकिन फैसला वीडी सतीशन के पक्ष में गया. यानी राहुल गांधी अब यह संकेत दे रहे हैं कि अंतिम फैसला दिल्ली में ही होगा, सिर्फ विधायकों की संख्या से नहीं.

सिद्धारमैया ने लोकभवन के सचिव को सौंपा इस्तीफा. राज्यपाल मौजूद नहीं थे.
कांग्रेस में भी दिख रहा हाईकमान कल्चर
अब फर्क साफ दिख रहा है. कर्नाटक में राहुल गांधी ने न तो विधायकों की परेड देखी, न ही किसी गुट का दबाव माना. सीधे फैसला लिया और लागू कराया. ये वही मॉडल है जो अब तक बीजेपी में देखने को मिलता था. केंद्रीय नेतृत्व तय करता है कि कौन मुख्यमंत्री होगा.
पार्टी के अंदर भी यही चर्चा है कि राहुल गांधी अब किसी क्षेत्रीय क्षत्रप के दबाव में नहीं आ रहे. फैसले लेने से पहले वे खड़गे, केसी वेणुगोपाल और अपने फीडबैक सिस्टम पर भरोसा कर रहे हैं. बताया जाता है कि कर्नाटक पर फैसला लेने से पहले वे 10 जनपथ भी गए थे.
यह भी पढ़ें- ओपिनियन: कर्नाटक से क्या संदेश दे रही है कांग्रेस, क्या बढ़ गया है राहुल का आत्मविश्वास
कांग्रेस के एक बड़े नेता का कहना है कि पहले फैसले टल जाते थे, अब सीधे लागू हो रहे हैं. और इसके पीछे बड़ी वजह है 2027-28 के विधानसभा चुनाव और 2029 का लोकसभा चुनाव. यानी साफ है, कर्नाटक सिर्फ CM बदलने की खबर नहीं है, ये कांग्रेस के बदलते पावर स्ट्रक्चर की कहानी है. अब देखना होगा कि राहुल गांधी का ये ‘नया हाईकमान मॉडल' आगे कितने राज्यों में सफल होता है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं