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जंतर-मंतर पुलिस आई, मंच को पर्दे से ढका, फिर वांगचुक के साथ... NDTV ने बताया आंखों देखा हाल

प्रदर्शनकारी साफ तौर पर नाराज दिखे. कई लोगों ने दिल्ली पुलिस के खिलाफ नारे लगाए और अधिकारियों पर लोकतांत्रिक विरोध को दबाने का आरोप लगाया. उन्होंने वांगचुक को हटाए जाने को विरोध करने के अधिकार पर हमला बताया.

जंतर-मंतर पुलिस आई, मंच को पर्दे से ढका, फिर वांगचुक के साथ... NDTV ने बताया आंखों देखा हाल
जंतर-मंतर पर आज क्या हुआ NDTV का आंखों देखआ हाल.
नई दिल्ली:

मैं शनिवार सुबह करीब 7 बजे जंतर-मंतर पहुंची. मुझे उम्मीद थी कि यह भी विरोध प्रदर्शन का बाकी दिनों जैसा होगा, क्योंकि समर्थक सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 21वें दिन की तैयारी कर रहे थे. लेकिन जल्द ही यह साफ हो गया कि कुछ असामान्य होने वाला है. विरोध स्थल पर सुरक्षा का भारी इंतजाम था. दिल्ली पुलिस के जवानों के साथ-साथ रैपिड एक्शन फोर्स, CRPF और अन्य अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियां बड़ी संख्या में तैनात थीं. कई पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में भी थे, जिससे उन्हें भीड़ से अलग पहचानना मुश्किल हो रहा था. प्रदर्शनकारियों में अनिश्चितता का माहौल था. वे बेचैन तो दिख रहे थे, लेकिन आगे क्या होने वाला है, ये वे नहीं जानते थे. 

हाई कोर्ट के आदेश पर अस्पताल ले जाए गए सोनम वांगचुक

सोनम वांगचुक 28 जून को विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे और तब से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे. प्रदर्शन से जुड़े लोगों के मुताबिक, उनका वजन लगभग 8.5 से 9 किलो  कम हो गया था और उनकी हालत गंभीर हो रही थी. उनकी बिगड़ती हालत को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें अदालत ने कहा था कि हर जीवन कीमती है. अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया था कि उनकी रोजाना मेडिकल जांच सुनिश्चित की जाए और डॉक्टरों और मेडिकल विशेषज्ञों की एक टीम लगातार उनकी सेहत पर नजर रखे.

मंच को पर्दों से ढका और वांगचुक को अस्पताल ले गए

हमारे पहुंचने के कुछ ही देर बाद घटनाक्रम तेजी से आगे बढ़ा. पुलिसकर्मियों का एक गुट उस मुख्य मंच की ओर बढ़ा, जहां वांगचुक लेटे हुए थे. उन्होंने तुरंत मंच को पर्दों से ढक दिया ताकि बाहर से वहां हो रही गतिविधियां दिखाई न दें. उन पर्दों के पीछे, वांगचुक को सावधानी से उठाया गया और वहां से ले जाया गया. इसके बाद उन्हें तुरंत उस एम्बुलेंस में ले जाया गया जो बैरिकेड लगे विरोध स्थल के ठीक बाहर खड़ी थी. NDTV पहला टेलीविजन चैनल था जिसने इन घटनाओं को होते हुए देखा और उनकी रिपोर्टिंग की.

कई मिनटों तक, बहुत से प्रदर्शनकारियों को ठीक से समझ नहीं आया कि ये हुआ क्या. जब यह खबर फैली कि वांगचुक को हटा दिया गया है, तो लोग मंच की ओर दौड़े और पुलिस को उन्हें ले जाने से रोकने की कोशिश की. थोड़ी देर के लिए रुकावट आई, लेकिन पुलिस ने लोगों से बार-बार शांत रहने की अपील करते हुए स्थिति को संभाला. अधिकारियों का कहना था कि वे सिर्फ वांगचुक की सेहत को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन कर रहे हैं.

अभिजीत दीपके कुछ देर बाद पहुंचे

एक खास बात यह थी कि जब वांगचुक को ले जाया गया, तो 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत दीपके वहां मौजूद नहीं थे. कई  प्रदर्शनकारियों ने NDTV को बताया कि दिपके एक दोस्त के घर पर वॉशरूम इस्तेमाल करने के लिए बाहर गए थे. बाद में दीपके ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ मारपीट की और उन्हें हिरासत में ले लिया. घटना के लगभग दो घंटे बाद, वह जंतर-मंतर लौटे और मंच से घोषणा की कि वह खुद भूख हड़ताल शुरू करके आंदोलन जारी रखेंगे.

वांगचुक को हटाए जाने के बाद, विरोध स्थल पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही. हजारों पुलिसकर्मियों के परिसर में दाखिल होने के की वजह से यह इलाका लगभग आधे घंटे तक पूरी तरह सील रहा. कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया जिन्होंने हंगामा करने की कोशिश की थी. लगभग दो घंटे तक माहौल तनावपूर्ण रहा. इस दौरान, पुलिस अधिकारियों ने लाउडस्पीकर पर बार-बार घोषणाएं कीं, प्रदर्शनकारियों को बताया कि हाई कोर्ट के निर्देशों के तहत वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया है और उनसे शांतिपूर्वक वहां से चले जाने की अपील की.

प्रदर्शनकारियों ने लगाया लोकतांत्रिक विरोध को दबाने का आरोप

हालांकि, प्रदर्शनकारी साफ तौर पर नाराज दिखे. कई लोगों ने दिल्ली पुलिस के खिलाफ नारे लगाए और अधिकारियों पर लोकतांत्रिक विरोध को दबाने का आरोप लगाया. उन्होंने वांगचुक को हटाए जाने को विरोध करने के अधिकार पर हमला बताया. तनावपूर्ण माहौल और भारी सुरक्षा तैनाती के बावजूद, विरोध प्रदर्शन खत्म नहीं हुआ.

इस बीच, सफदरजंग अस्पताल ने बाद में पुष्टि की कि सोनम वांगचुक को सुबह लगभग 7:40 बजे भर्ती कराया गया था. अस्पताल के अनुसार, लंबे समय तक उपवास और डिहाइड्रेशन के कारण वे कमजोर हो गए थे. डॉक्टरों ने कहा कि हालांकि भर्ती के समय उनकी हालत स्थिर थी, लेकिन उनकी सेहत ठीक करने के लिए लगातार निगरानी और मेडिकल इलाज की जरूरत थी.

वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी, उनके समर्थक जंतर-मंतर पर डटे रहे और अपना आंदोलन जारी रखने के लिए दृढ़ रहे. सुबह की घटनाओं ने चल रहे विरोध प्रदर्शन के सबसे नाटकीय पलों में से एक को चिह्नित किया, इसमें न्यायिक निर्देशों का पालन करते हुए भारी सुरक्षा के बीच आंदोलन के सबसे प्रमुख चेहरे को हटाया गया, जबकि मौके पर लोगों की भावनाएं उफान पर थीं.

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