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मिडिल ईस्ट पर भारत की चिंताः आखिर विदेश मंत्रालय बार-बार क्यों कह रहा है- तनाव घटाइए, बातचीत कीजिए?

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव पर भारत ने अपने ताजा बयान में गहरी चिंता जताई है. इसके पीछे सिर्फ कूटनीति नहीं, बल्कि तेल, व्यापार, समुद्री रास्ते और लाखों भारतीयों की सुरक्षा से जुड़ी भारत की चिंता समझिए.

मिडिल ईस्ट पर भारत की चिंताः आखिर विदेश मंत्रालय बार-बार क्यों कह रहा है- तनाव घटाइए, बातचीत कीजिए?
मिडिल ईस्ट में ताजा हमले पर भारत का रुख
AFP/NDTV
  • मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव पर भारत चिंतित. विदेश मंत्रालय ने सभी पक्षों से संयम और बातचीत की अपील की.
  • भारत के लिए दांव पर तेल, व्यापार, समुद्री रास्ते और लाखों भारतीयों की सुरक्षा भी जुड़ी हुई है.
  • भारत का साफ संदेश. हालात बिगाड़ने की बजाय कूटनीति और संवाद से ही विवाद का समाधान निकले.

मिडिल ईस्ट एक बार फिर तनाव के दौर से गुजर रहा है. हाल के दिनों में क्षेत्र में हमलों और जवाबी कार्रवाई की घटनाएं बढ़ी हैं. अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों से गुजरने वाले कारोबारी जहाज भी निशाने पर आए हैं. इसी बीच भारत के विदेश मंत्रालय ने चिंता जताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के रास्ते पर लौटने की अपील की है. 

अब सवाल है कि भारत ने यह बयान क्यों दिया? आखिर मिडिल ईस्ट का तनाव भारत के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

सबसे पहले समझिए, भारत ने क्या कहा?

विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर हुए हमलों को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है. भारत ने सभी पक्षों से अपील की है कि वे हालात को और न बिगाड़ें, संयम बरतें और बातचीत के जरिए समाधान निकालें. भारत का संदेश साफ है. युद्ध नहीं, बातचीत ही समाधान का रास्ता है.

भारत के लिए मिडिल ईस्ट इतना अहम क्यों है?

इसकी सबसे बड़ी वजह है ऊर्जा और व्यापार. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस मिडिल ईस्ट के देशों से खरीदता है. अगर इस क्षेत्र में युद्ध या अस्थिरता बढ़ती है तो तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है. यानी मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा तो भारत में पेट्रोल, डीजल, गैस और कई जरूरी चीजें महंगी हो सकती हैं.

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Photo Credit: AFP

समुद्री रास्तों की चिंता क्यों?

मिडिल ईस्ट से दुनिया के कई देशों तक तेल और सामान समुद्री रास्तों से पहुंचता है. हाल में कारोबारी जहाजों पर हुए हमलों ने चिंता और बढ़ा दी है. अगर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो पूरी दुनिया की सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है. भारत के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उसके आयात और निर्यात का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों से होता है.

भारत किसी एक पक्ष का समर्थन क्यों नहीं कर रहा?

भारत लंबे समय से संतुलित विदेश नीति अपनाता रहा है.भारत के इजरायल से भी अच्छे संबंध हैं. ईरान से भी रणनीतिक और ऊर्जा संबंध हैं. वहीं खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत और ओमान भारत के बड़े व्यापारिक साझेदार हैं. मिडिल ईस्ट के विभिन्न देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं.

ऐसे में भारत किसी एक पक्ष के साथ खुलकर खड़ा होने की बजाय तनाव कम करने और बातचीत पर जोर देता है. यही उसकी कूटनीतिक रणनीति भी रही है.

भारतीय नागरिकों की चिंता भी अहम 

मिडिल ईस्ट में बड़ी संख्या में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा भी भारत के लिए अहम है. भारत इसे प्राथमिकता देता है. यही वजह है कि भारत लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और शांति की अपील कर रहा है.

ऐसे में अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो इसका असर केवल मिडिल ईस्ट तक ही सीमित नहीं रहेगा. इसका सबसे पहला असर तो ये होगा कि जहां एक ओर दुनिया भर में तेल की कीमतों में इजाफा होगा, वहीं समुद्री व्यापार के भी प्रभावित होने के आसार बनेंगे.

इससे महंगाई बढ़ सकती है और भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है.

यही वजह है कि भारत सिर्फ चिंता नहीं जता रहा, बल्कि सभी पक्षों से तनाव कम करने और बातचीत का रास्ता अपनाने की लगातार अपील कर रहा है.

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