पश्चिम बंगाल का आधा चुनाव खत्म हो चुका है. पहले चरण में 152 सीटों पर अप्रत्याशित वोटिंग हुई है. जानकारों का मानना है कि इस बंपर वोटिंग से जनता ने बहुत बड़ा संदेश दिया है. अब जिसकी भी जीत होगी, वो प्रचंड होगी. NDTV के सीईओ और एडिटर इन चीफ राहुल कंवल ने देश के खान-पान के साथ राजनीति पर चर्चा के लिए खास शो 'चाय स्टॉप' के जरिए कोलकाता में वोटरों के इसी मिजाज को समझने की कोशिश की.
कोलकाता के मशहूर पार्क स्ट्रीट इलाके में 'चाय स्टॉप शो' में एनडीटीवी की सीनियर एडिटर मनोज्ञा लोइवाल ने कहा कि बीजेपी के नेताओं को लग रहा है कि इस बार बंगाल जीतना बहुत जरूरी है. आजादी के बाद कोई राइटविंग सरकार बंगाल में नहीं रही है. इसके लिए बीजेपी ने ग्राउंड लेवल पर बहुत होमवर्क किया है. दूसरी तरफ ममता बनर्जी ने भी पूरी जान लगा दी है. वह सिर्फ अधिकारियों से बात नहीं करतीं, वो आम लोगों के भी संपर्क में रहती हैं. इसका फायदा उन्हें मिलेगा.
एनडीटीवी कंसलटेंट महुआ चटर्जी ने बंपर वोटिंग की एक वजह बताते हुए कहा कि बंगाल में एसआईआर में 90 लाख से ज्यादा वोट कटे हैं. इसकी वजह से बाकी वोटर डरे हुए हैं. उन्हें लग रहा है कि अगर इस बार हम वोट नहीं डालते हैं तो आगे चलकर हमारा नाम कट सकता है.
राहुल कंवल ने याद दिलाया कि 2006 के चुनाव में भी चुनाव आयोग ने भी मतदाता सूची से बड़ी संख्या में फर्जी वोटरों को हटाया था, उस वक्त 84 फीसदी कॉन्स्टिट्यूएंसी में 75 पर्सेंट से ज्यादा वोट पड़े थे. लेकिन तब जीत सत्ताधारी सीपीएम को ही मिली थी.
चर्चा के दौरान एनडीटीवी के कंसलटिंग एडिटर जयंतो घोषाल ने कहा कि जब भी ज्यादा वोटिंग होती है तो उसे एंटी इनकंबेंसी से जोड़कर देखा जाता रहा है. अब बंगाल में अभूतपूर्व 93 पर्सेंट वोटिंग हुई है. ऐसे में इसे अगर सत्ता विरोधी नहीं मानें तो यह फैक्चुअली गलत होगा.

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टीएमसी के प्रवक्ता रिजिजू दत्ता ने कहा कि बंगाल की जनता ने बंगाल की अस्मिता के पक्ष में वोट दिया है. बांग्ला विरोधी दिल्ली के जमींदारों के खिलाफ वोट किया है. जिन 152 सीटों पर वोटिंग हुई है, उनमें से टीएमसी को बस 20-25 सीटें चाहिए. बाकी तो लीड की बात है.
बीजेपी नेता भास्कर घोष का कहना था कि इस चुनाव में ममता दीदी को कहना पड़ रहा है कि सबको छोड़ो, मुझे वोट दो. इसके पीछे बड़ा मतलब है. 2021 के पहले वोटर बीजेपी 10.16 वोट मिले थे. लेकिन 2021 में वोटों का आंकड़ा 38 पर्सेंट तक पहुंच गया. ये संख्या शायद 60 पर्सेंट तक पहुंच सकती है.
इस बार चुनाव में बड़ी जीत होगी या कड़ा मुकाबला होगा, इस सवाल पर दासगुप्ता ने कहा कि बीजेपी और टीएमसी के बीच 2021 के चुनाव में 10 पर्सेंट वोटों का अंतर रहा था. एसआईआर से 11.6 फीसदी वोट कट गए. ऐसे में एक संभावना है कि इस बार टर्न अराउंड हो सकता है. हो सकता है कि एसआईआर का फायदा बीजेपी को मिले.

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जयंत घोषाल का कहना था कि बीजेपी को जीत हासिल करनी है तो सिर्फ उत्तर बंगाल को जीतने से काम नहीं चलेगा, दूसरे दौर को जीतना भी जरूरी है. जिस तरह से पीएम मोदी, अमित शाह और बीजेपी के अन्य नेता आक्रामक प्रचार कर रहे हैं, लगता है उसका फायदा दक्षिण बंगाल में भी मिल सकता है. उधर टीएमसी को अब भी जीत का विश्वास है. लेकिन बीजेपी जो कर रही है, वो 2021 में नहीं दिखा था. बीजेपी ने गलतियों से सबक लेकर आगे बढ़ रही है.
एनडीटीवी की सीनियर एडिटर मनोज्ञा लोइवाल ने कहा कि इस बार महिलाओं का वोट खिसकेगा, लेकिन कितना छिटकेगा, ये अभी तय नहीं है. उसका कारण 300 हजार रुपये और महिला सुरक्षा जैसे वादे हैं. महिलाओं को परिवर्तन चाहिए. चेंज को लाने के लिए किसी के पास कारण हैं, किसी के पास कारण नहीं है. ये बहुत बड़ा मैसेज है.
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