- पश्चिम बंगाल में आज समान नागरिक संहिता विधेयक आएगा. भाजपा ने अपने चुनाव के संकल्प पत्र में बिल का वादा किया था
- यूसीसी बिल गुजरात, उत्तराखंड और असम के बाद अब पश्चिम बंगाल में यह बिल आ रहा है. बिल लाने वाला चौथा राज्य होगा.
- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने संकल्प पत्र में यूसीसी बिल लाने का वादा किया था.
पश्चिम बंगाल में भाजपा की शुवेंदु सरकार सोमवार को विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) बिल पेश करने वाली है. इस विधेयक के आने के बाद शादी, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति के बंटवारे समेत कई नियमों में बदलाव होगा और यह सबके लिए एक समान होगा. पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र में इसे शामिल किया था. जिसमें वादा किया गया था कि सरकार बनने के 6 महीने के अंदर ही राज्य में यूसीसी बिल आएगा. ऐसे में अब सरकार इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. जिसे आज विधानसभा में पेश किया जाएगा. गुजरात, उत्तराखंड और असम के बाद अब पश्चिम बंगाल में यह बिल आ रहा है.
क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड
यूनिफॉर्म सिविल कोड एक ऐसा कानून है. जिसमें समान नागरिक संहिता लागू होती है. यानि सभी धर्मों के लिए एक ही कानून. इसके तहत शादी, तलाक, बच्चे गोद लेना, संपत्ति का अधिकार, पारिवारिक अधिकार जैसे सभी नागरिक मामलों में समान अधिकार लागू होता है. भारत के अलग-अलग राज्यों में में अलग-अलग धर्मों के हिसाब से व्यक्तिगत कानून लागू हैं. लेकिन यूसीसी बिल लागू होने के बाद सभी व्यवस्थाओं में एक ही कानून लागू होता है.
क्या है यूसीसी बिल का उद्देश्य
पश्चिम बंगाल में यूसीसी बिल का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग धर्मों के आधार पर चल रहे कानूनों की जगह पर एक कानूनी व्यवस्था लागू होगी. इस प्रस्तावित कानून का मकसद शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों के लिए धर्म से अलग एक समान सिविल ढांचा बनाना है. ऐसे में आज पेश होने वाला यह विधेयक पश्चिम बंगाल विधानसभा के बजट सत्र में चर्चा मुख्य विषय रहेगा. क्योंकि यह विधेयक पहचान, समानता, धर्मनिरपेक्षता, संवैधानिक अधिकारों और पर्सनल लॉ व राज्य के अधिकार के बीच संबंधों पर व्यापक बहस का आधार बनेगा.
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बिल पर बीजेपी और विपक्ष आमने-सामने
बीजेपी के लिए यह बिल उसके मुख्य चुनावी वादे को पूरा करने और इस लंबे समय से चली आ रही बात को दोहराने जैसा है कि सभी नागरिकों पर एक जैसे सिविल कानून लागू होने चाहिए वहीं विपक्ष के लिए, यह सामाजिक सहमति, संवैधानिक सुरक्षा और इस बात पर सवाल उठाता है कि क्या अलग-अलग समुदायों पर असर डालने वाले सुधार को व्यापक बातचीत के बिना लागू किया जा सकता है.
यूसीसी से बाहर रहेंगे जनजातीय समुदाय: समिक भट्टाचार्य
पश्चिम बंगाल में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने यूसीसी बिल पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा 'यूसीसी बिल पर सरकार पूरी प्रक्रिया कर रही है. बीजेपी का इस मामले में क्लीयर स्टेंड रहा है. जनजातीय समुदाय यूसीसी बिल से बाहर रहेंगे. इसका काम सरकार को पता है और सरकार आपना काम करेगी. लेकिन 4 बीवी, 14 बच्चे पर रोक लगेगी.'
“पश्चिम बंगाल में जल्द UCC लागू होगा। जनजातीय समुदाय इससे बाहर रहेंगे,
— Samik Bhattacharya (@SamikBJP) June 29, 2026
लेकिन ‘'4 बीवी, 14 बच्चे' पर रोक लगेगी।” pic.twitter.com/DdDseSFKHP
बीजेपी के संकल्प पत्र में शामिल था यूसीसी बिल
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने जो संकल्प पत्र बनाया था. उसमें यूसीसी बिल को शामिल किया गया था. सरकार बनने के छह महीने के अंदर ही इसे लागू करने की बात थी. लेकिन भाजपा सरकार ने छह महीने के वादे की समय-सीमा से काफी पहले ही यूसीसी बिल ला रही है. घोषणापत्र जारी करते समय, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वादा किया था कि बीजेपी सरकार सत्ता में आने के छह महीने के भीतर पश्चिम बंगाल में UCC लागू करेगी. उन्होंने इसे धर्म से परे कानून के सामने समानता सुनिश्चित करने के उपाय के तौर पर पेश किया था.
यूसीसी लागू करने वाला पश्चिम बंगाल बनेगा चौथा राज्य
पश्चिम बंगाल भारत में यूसीसी विधेयक लागू करने वाले देश का चौथा राज्य बनेगा. इससे पहले गुजरात, उत्तराखंड और असम में यह बिल लागू हो चुका है. उत्तराखंड ने सबसे पहले यह बिल लागू किया था. जबकि अब पश्चिम बंगाल में भी इस बिल को लेकर प्रक्रिया शुरू हो रही है.
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