- पीएम मोदी ने बंगाल के मतुआ ठाकुर मंदिर में पूजा-अर्चना कर श्री हरिचंद ठाकुर और गुरुचंद ठाकुर को याद किया
- पीएम मोदी ने मतुआ ठाकुर मंदिर की अपनी पिछली यात्रा की याद साझा करते हुए बोरो मां का आशीर्वाद भी प्राप्त बताया
- बनगांव की सभा में मोदी ने मतुआ, नामशूद्र और शरणार्थी परिवारों को नागरिकता और सभी अधिकार देने का आश्वासन दिया
पश्चिम बंगाल में चुनावी अभियान के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मतुआ ठाकुर मंदिर में पूजा-अर्चना की. इस दौरान, उन्होंने श्री श्री हरिचंद ठाकुर और श्री श्री गुरुचंद ठाकुर को भी याद किया. पीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर मतुआ मंदिर में दर्शन की तस्वीरें शेयर कीं. उन्होंने पोस्ट में लिखा, "आज दिन में मैंने मतुआ ठाकुर मंदिर में पूजा-अर्चना की. श्री श्री हरिचंद ठाकुर जी और श्री श्री गुरुचंद ठाकुर जी के आदर्श हमारे समाज को निरंतर आलोकित कर रहे हैं."
Prayed at the Matua Thakur Temple earlier today. The ideals of Sri Sri Harichand Thakur Ji and Sri Sri Guruchand Thakur Ji continue to illuminate our society. pic.twitter.com/spKlzwDhZC
— Narendra Modi (@narendramodi) April 26, 2026
एक अन्य पोस्ट में पीएम मोदी ने एक पुरानी तस्वीर शेयर की, जिसमें वे 'बोरो मां' के साथ दिखाई दे रहे हैं. उन्होंने पोस्ट में लिखा, "आज, जब मैं मतुआ ठाकुर मंदिर में था, तो मुझे कुछ साल पहले इस मंदिर की अपनी पिछली यात्रा याद आ गई, जब मुझे 'बोरो मां' का आशीर्वाद भी प्राप्त हुआ था."
Today, when I was at the Matua Thakur Mandir, I remembered my previous visit to this Temple a few years ago, when I had also got the blessings of Boro Ma Binapani Thakur. Here is a photograph from that visit… pic.twitter.com/MZ8jgSSwBC
— Narendra Modi (@narendramodi) April 26, 2026
इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम बंगाल के बनगांव में 'विजय संकल्प सभा' को संबोधित किया. उन्होंने कहा, "मैं मतुआ-नामशूद्र और अन्य सभी शरणार्थी परिवारों से कहूंगा कि आपको नागरिकता भी मिलेगी, आपको पक्का एड्रेस मिलेगा, आपको हर वो कागज मिलेगा, हर वो हक मिलेगा, जो किसी भी भारतवासी को मिलता है."
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जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, "बंगाल का ये चुनाव अब अंतिम चरण में है, लेकिन आपने एक बात नोटिस की होगी, 15 साल पहले टीएमसी 'मां-माटी-मानुष' की बातें करके सत्ता में आई थी, लेकिन अब इनके मुंह से 'मां-माटी-मानुष' ये शब्द तक नहीं निकलते. ये टीएमसी वाले अगर 'मां-माटी-मानुष' की याद दिलाएंगे तो इनके पाप सामने आ जाएंगे. क्योंकि टीएमसी की निर्ममता ने मां को रुला दिया, माटी को सिंडिकेट और घुसपैठियों के हवाले कर दिया और बंगाल के मानुष को पलायन के लिए मजबूर कर दिया."
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