- पश्चिम बंगाल चुनाव में लगभग सत्तर सीटें निर्णायक होंगी जहां मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं
- SIR प्रक्रिया के तहत पूरे राज्य में 90 लाख से अधिक नाम हटाए गए हैं, जो कुल मतदाता सूची का लगभग बारह प्रतिशत है
- उत्तरी 24 परगना, मुर्शिदाबाद, मालदा और दक्षिण 24 परगना जैसे जिलों में हटाए गए नाम जीत के अंतर से ज्यादा हैं
पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव काफी दिलचस्प होने वाला है. वह इसलिए क्योंकि इस बार का चुनाव शायद उन 294 सीटों के गणित से तय न हो, जिनका जिक्र चुनावी भाषणों में ज्यादा होता है. बल्कि, यह उन करीब 65-70 सीटों से तय हो सकता है, जहां जीत और हार का फैसला कुछ ही बूथों के अंतर से होता है और जहां वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR ने अचानक चुनावी मैदान का नक्शा ही बदल दिया है.
इनमें नंदीग्राम से भवानीपुर जैसी अहम सीटें शामिल हैं. इनमें उत्तरी 24 परगना का मतुआ बेल्ट भी आता है. साथ ही मुर्शिदाबाद और मालदा के वे इलाके भी आते हैं, जहां अल्पसंख्यकों की आबादी ज्यादा है. 2024 के लोकसभा चुनाव में यहां की विधानसभा सीटों में हार-जीत का अंतर 8 हजार से 15 हजार था. 2021 के विधानसभा चुनावों में इन इलाकों में कई विधायक 1 हजार से 8 हजार वोटों के अंतर से बमुश्किल जीत पाए थे. और अब वोटर लिस्ट से हजारों नाम गायब हो गए हैं.
यही वजह है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस बार 2021 से भी बड़ी जीत का दावा कर रही हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दावा कर रहे हैं कि पिछली बार बीजेपी 77 सीटें जीती थीं लेकिन इस बार 170 सीटों का आंकड़ा पार कर लेगी. दोनों ही पार्टियां एक-एक बूथ, एक-एक हटाए गए वोटर और एक-एक करीबी मुकाबले वाली सीट के लिए लड़ रही है. 7 अप्रैल तक पूरे बंगाल में 90.83 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए हैं. यानी, पिछले अक्टूबर तक जितने वोटर थे, उनमें से 11.85% का नाम हट चुका है. इनमें से 27.83 लाख नाम अकेले 'अंडर एडजुडिकेशन' यानी 'जांच के दायरे में' श्रेणी में हटाए गए हैं.
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11 जिलों की लगभग 70 सीटों पर हुआ खेला?
पश्चिम बंगाल की 11 जिलों की लगभग 70 सीटों पर खेला हुआ है. इनमें से 25 सीटें कोलकाता और उससे सटे उत्तरी 24 परनगना, हावड़ा और हुगली इलाकों में हैं. बाकी सीटें मुर्शिदाबाद, मालदा, बांकुड़ा, पुरुलिया, पश्चिमी बर्धमान, पूर्वी बर्धमान और मेदिनीपुर जिलों में हैं.
सिर्फ उत्तरी 24 परगना में ही ऐसी 13 सीटें हैं, जहां मुकाबला बहुत कड़ा था. मुर्शिदाबाद में 10, बांकुड़ा-पुरुलिया में 9, हावड़ा-हुगली में 8 और मेदिनीपुर और बर्धमान में 8-8 सीटें हैं.
2021 के चुनाव ने दिखाया कि वोटों का अंतर कितना कम हो गया था. 8 हजार या उससे कम वोटों से तय हुई 57 सीटों में से, टीएमसी ने 29 और बीजेपी ने 28 सीटें जीतीं. जिन 19 सीटों पर जीत का अंतर 3 हजार से कम था. वहां बीजेपी ने 12 और टीएमसी ने 7 सीटें जीतीं.
पश्चिम बर्धमान की कुल्टी सीट बीजेपी ने सिर्फ 679 वोटों से जीती. दांतान 623, घाटाल 966, बांकुड़ा 1,468 और नंदीग्राम 1,956 वोटों से जीती. नंदीग्राम में तो बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हराया था. कुल्टी में लगभग 38,000 नाम हटे हैं. यह संख्या जीत के अंतर से 50 गुना ज्यादा है. नंदीग्राम में 14,462 नाम हटाए गए हैं, जो जीत के अंतर से 7 गुना ज्यादा है.
उत्तर 24 परगना और नदिया में तो वोटों के अंतर और हटाए गए नामों के बीच का बेमेल और भी ज्यादा साफ दिखता है. उत्तर 24 परगना में 55% और नदिया में 78% नाम हटा दिए गए हैं. ये वो जिले हैं, जहां बीजेपी ने नागरिकता के मुद्दे को लेकर हिंदू शरणार्थियों और मतुआ समुदाय को साधने की कोशिश की थी.
बोगांव दक्षिण में जहां बीजेपी 2 हजार वोटों से जीती थी, वहां से लगभग 7 हजार नाम हटा दिए गए हैं. कल्याणी में भी बीजेपी ने 2 हजार के अंतर से चुनाव जीता था और यहां से लगभग 9 हजार नाम हटाए गए हैं.
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मुर्शिदाबाद और भवानीपुर में क्या हाल?
मुर्शिदाबाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सबसे मजबूत जिलों में से एक माना जाता है. यहां से सबसे ज्यादा 4.55 लाख नाम हटाए गए हैं. कुल मिलाकर यहां से लगभग 7.49 लाख वोटरों के नाम कट चुके हैं. मालदा में 4.59 लाख नाम हटाए गए हैं. दक्षिण 24 परगना में 10.91 लाख हटाए गए हैं.
कोलकाता में लगभग 6.97 लाख नाम हटाए गए हैं. कोलकाता की 16 विधानसभा सीटों में से सिर्फ बेलेघाटा और भवानीपुर में ही SIR के तहत हटाए गए नामों की संख्या पिछले चुनाव में जीत के अंतर से कम है. बाकी सभी सीटों पर हटाए गए नामों की संख्या जीत के अंतर से ज्यादा है.
टीएमसी के सबसे सुरक्षित गढ़ों में से एक भवानीपुर में 51,005 नाम हटाए गए हैं. 2021 के चुनाव में टीएमसी ने यहां से लगभग 29,000 वोटों से जीत हासिल की थी. बाद में ममता बनर्जी ने उपचुनाव में लगभग 58,000 वोटों के अंतर से इस सीट को फिर से जीत लिया था.
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बीजेपी और टीएमसी, दोनों पर ही असर
SIR का असर उन 44 विधानसभा सीटों पर साफ नजर आता है, जहां वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों की संख्या 2021 में जीतने वाले उम्मीदवार की जीत के अंतर से ज्यादा है. इनमें से 24 सीटों पर टीएमसी और 20 सीटों पर बीजेपी का कब्जा है. इससे यह साफ होता है कि वोटर लिस्ट में बदलाव का असर किसी भी पार्टी पर पड़ने से नहीं बचा है. बीजेपी के कब्जे वाली सीटों की लिस्ट में नंदीग्राम और गाइघाटा जैसी सीटें भी शामिल हैं.
यह बीजेपी के उत्तरी और पश्चिमी बंगाल में बढ़ते प्रभाव वाले इलाकों और टीएमसी के मजबूत गढ़ों को प्रभावित कर रही हैं. ऐसे में वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के इस असर को किसी भी पार्टी के लिए नजरअंदाज करना नामुमकीन है.
2021 के वोटिंग पैटर्न के आंकड़ों पर देखें तो अगर सिर्फ 1% वोट भी इधर-उधर होते हैं तो कम से कम 15 सीटों पर नतीजा पलट सकता है. अगर 2% वोटर पलटते हैं तो 20 से ज्यादा सीटों पर नतीजे बदलने की संभावना है.
टीएमसी नेता अरूप चक्रवर्ती ने कहा कि बीजेपी वोट चोरी करने और लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने के लिए चुनाव आयोग का इस्तेमाल कर रही है. इसका जवाब हम बैलेट बॉक्स के जरिए देंगे. वहीं, बीजेपी का दावा है कि SIR से 'अवैध बांग्लादेशी' और मृत वोटरों की पहचान हो गई है. बीजेपी नेता देबजीत सरकार ने दावा किया कि पिछली बार वामपंथियों ने टीएमसी विरोधी वोटों में सेंध लगा दी थी. अगर ये वोट एकजुट हो जाते हैं और वोटर लिस्ट से कुछ हजार फर्जी वोटरों के नाम भी हट जाते हैं तो ये 65 सीटें नतीजों को पूरी तरह बदल सकती हैं.
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