
वक्फ बिल को लेकर चल रही बयानबाजी के बीच जेडीयू ने कहा है कि उसने इस विधेयक को लेकर सरकार को अहम सुझाव दिए हैं. वहीं हमारे सुझावों को तरजीह भी दी गई है. हालांकि बिल अभी सर्कुलेट नहीं किया गया है और बिल देखने के बाद ही जेडीयू फैसला करेगी.
सूत्रों के अनुसार जेडीयू ने सरकार से कहा है कि नए कानून को पिछली तारीख से लागू नहीं करना चाहिए. यानी मौजूदा पुरानी मस्जिद, दरगाह या अन्य मुस्लिम धार्मिक स्थान के साथ कोई छेड़छाड़ न हो. वक्फ कानून में इसका स्पष्ट प्रावधान होना चाहिए.
सूत्रों के अनुसार जेपीसी द्वारा सुझाए गए 14 महत्वपूर्ण संशोधनों में इन्हें भी शामिल किया गया है.
जेपीसी के सुझाए संशोधनों के आधार पर संशोधित बिल को कैबिनेट ने मंजूरी दी है, जिसमें महत्वपूर्ण संशोधन यह भी है कि यह पिछली तारीख से लागू नहीं होगा.

इसी तरह राज्य वक्फ बोर्डों में कलेक्टर के बजाए अधिकृत वरिष्ठ सरकारी अधिकारी को मध्यस्थ का अधिकार देने का संशोधन सुझाया गया है, जिसे कैबिनेट ने मंजूरी दी है.
यानी कोई संपत्ति वक्फ संपत्ति है या नहीं, यह तय करने के लिए अधिकारी नियुक्त करने का अधिकार कलेक्टरों के बजाए राज्य सरकारों को देने का संशोधन सुझाया गया है. इससे भी राज्य सरकारों की भूमिका बढ़ गई है.
इधर कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया ने वक़्फ संशोधन बिल का समर्थन किया है. संस्थान ने कहा कि मौजूदा वक़्फ क़ानून के कई प्रावधान संविधान और देश के सेक्यूलर प्रजातांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है. इसके लिए केरल का उदाहरण भी दिया.
केरल के मुनांबरम क्षेत्र में 600 से भी अधिक परिवारों की पैतृक संपत्ति को वक़्फ़ बोर्ड ने अपनी संपत्ति घोषित कर दिया है. पिछले तीन वर्षों से इस पर क़ानूनी विवाद चल रहा है. उन्होंने कहा कि केवल क़ानूनी संशोधन से ही स्थायी समाधान निकल सकता है. जनप्रतिनिधियों को यह बात समझनी चाहिए.
सरकार का कहना है कि वक्फ विधेयक में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन, संचालन और निगरानी के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुधार प्रस्तावित किए गए हैं. इस विधेयक का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के उपयोग में सुधार लाना है. जेपीसी ने विधेयक के बारे में विस्तृत चर्चा की और इस पर विभिन्न पक्षों से साक्ष्य प्राप्त किए. अब यह रिपोर्ट लोकसभा में पेश की जाएगी और आगे की विधायी प्रक्रिया को गति मिलेगी.
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