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विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक के लिए स्थायी समिति के सदस्यों के नाम का ऐलान, 31 सदस्य शामिल

लोकसभा अध्यक्ष ने डॉ डी पुरंदेश्वरी के नेतृत्व में विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक के लिए स्थायी समिति के सदस्यों के नाम का ऐलान कर दिया है.

विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक के लिए स्थायी समिति के सदस्यों के नाम का ऐलान, 31 सदस्य शामिल
डी पुरंदेश्वरी के नेतृत्व में स्थायी समिति के सदस्यों के नाम का ऐलान
नई दिल्ली:

विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 की गहन समीक्षा के लिए एक संयुक्त समिति  का गठन कर दिया गया है. लोकसभा सचिवालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, इस समिति की अध्यक्षता लोकसभा सांसद डॉ. डी. पुरंदेश्वरी को सौंपी गई है. समिति में लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के कुल 31 सदस्य शामिल किए गए हैं, जिनका दायित्व विधेयक के प्रावधानों की विस्तार से जांच कर संसद को रिपोर्ट देना होगा.

सदस्यों में ये सांसद शामिल 

लोकसभा से समिति में शामिल प्रमुख सदस्यों में डॉ. संबित पात्रा, तेजस्वी सूर्या, अनुराग सिंह ठाकुर, बांसुरी स्वराज, हेमांग जोशी, ललित वर्मा, प्रो. सौगत राय, टी.आर. बालू और अन्य सांसद शामिल हैं. वहीं राज्यसभा से सुधांशु त्रिवेदी, दिग्विजय सिंह, सागरिका घोष, सस्मित पात्रा, संजय कुमार झा और प्रो. रामगोपाल यादव जैसे सदस्य नामित किए गए हैं. समिति विभिन्न दलों के प्रतिनिधित्व के साथ विधेयक पर व्यापक विचार-विमर्श करेगी.

विधेयक का मकसद जानिए 

विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 का उद्देश्य देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए एक एकीकृत नियामक ढांचा तैयार करना है. प्रस्तावित कानून के तहत वर्तमान नियामक संस्थाओं जैसे यूजीसी, एआईसीटीई और एनसीटीई की जगह एक केंद्रीय निकाय “विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान” स्थापित किया जाएगा. इसके अंतर्गत नियमन, मान्यता और शैक्षणिक मानकों के लिए अलग-अलग परिषदें गठित होंगी.


कई नए प्रावधान 

विधेयक में सिंगल-विंडो डिजिटल अनुमति प्रणाली, संस्थानों को ग्रेडेड स्वायत्तता, पारदर्शी मूल्यांकन व्यवस्था और विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस स्थापित करने के प्रावधान शामिल हैं. नियमों के उल्लंघन पर आर्थिक दंड का भी प्रावधान प्रस्तावित है.

सिफारिश के बाद आगे की प्रक्रिया होगी तय 

सरकार का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप उच्च शिक्षा को अधिक आधुनिक, जवाबदेह और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार है. संयुक्त समिति की सिफारिशों के बाद विधेयक पर आगे की संसदीय प्रक्रिया तय होगी.

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