Jaipur News: नीट पेपर लीक (NEET-UG Paper Leak) मामले की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, मुख्य आरोपी दिनेश और मांगीलाल बिवाल के 'साम्राज्य' का काला चिट्ठा भी सामने आने लगा है. सीबीआई (CBI) की जांच में अब जो सबसे चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, वह आरोपियों की बेहिसाब संपत्ति और उनके बेटों के नाम पर खड़ी की गई कॉलोनियां से जुड़ा है. जांच के केंद्र में अब आरोपियों द्वारा काटी गई 'विकास नगर फर्स्ट', 'विकास नगर सेकंड' और 'विकास नगर थर्ड' जैसी कॉलोनियां आ गई हैं.
सीबीआई की शुरुआती जांच और स्थानीय स्तर पर जुटाए गए इनपुट के अनुसार, आरोपी मांगीलाल बिवाल प्रॉपर्टी के कारोबार की आड़ में पेपर लीक से होने वाली काली कमाई को सफेद कर रहा था. उसने अपने बेटे विकास के नाम पर जमवारामगढ़ इलाके में बड़े पैमाने पर जमीनें खरीदीं और वहां कॉलोनियां विकसित कर दीं. इलाके में इन कॉलोनियों को 'विकास-1, 2 और 3' के नाम से जाना जाता है. इन स्कीमों में धड़ल्ले से प्लॉट काटकर बेचे जा रहे थे, जिसकी वित्तीय जानकारी अब सीबीआई खंगाल रही है.
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— NDTV Rajasthan (@NDTV_Rajasthan) May 15, 2026
फार्म हाउस पर रेड, जब्त किए गए ये सामान
गुरुवार को सीबीआई की टीम ने आरोपियों के जमवारामगढ़ स्थित पैतृक मकान और आलीशान फार्म हाउस पर एक साथ छापेमारी की. घंटों चली इस कार्रवाई में सीबीआई ने न केवल पेपर लीक से जुड़े संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए, बल्कि परिवार के सदस्यों के मोबाइल फोन, बैंक पासबुक और प्रॉपर्टी से जुड़े वित्तीय लेनदेन के कागजात भी जब्त किए हैं. सीबीआई को शक है कि कॉलोनियां काटने और जमीनें खरीदने के लिए जिस फंड का इस्तेमाल हुआ, उसका सीधा संबंध नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक से जुड़ा हो सकता है.
8 साल में बदली 'किस्मत', गांव वाले भी हैरान
ग्रामीणों के बयानों ने सीबीआई के शक को और पुख्ता कर दिया है. स्थानीय लोगों के अनुसार, घनश्याम, मांगीलाल और दिनेश का परिवार करीब सात-आठ साल पहले तक बेहद सामान्य जीवन जीता था. लेकिन पिछले 5 सालों में अचानक इनकी जीवनशैली में ऐसा बदलाव आया कि सब दंग रह गए. मामूली घर से सीधा लग्जरी फार्म हाउस, महंगी गाड़ियां और परिवार के कई बच्चों का एक साथ मेडिकल कॉलेजों तक पहुंच जाना, पूरे गांव में चर्चा का विषय था. ग्रामीण बताते हैं कि इस परिवार ने आसपास की काफी जमीनें खरीद ली थीं और अचानक बेहद संपन्न हो गए थे.
प्रॉपर्टी का 'मुनाफा' या पेपर लीक का खेल?
जब भी ग्रामीणों ने इनकी अचानक बढ़ी अमीरी पर सवाल उठाया, परिवार की ओर से यही तर्क दिया गया कि उन्हें प्रॉपर्टी के धंधे में भारी मुनाफा हो रहा है. हालांकि, अब सीबीआई को संदेह है कि प्रॉपर्टी कारोबार सिर्फ एक 'कवर' था, जिसकी आड़ में अवैध कमाई खपाई जा रही थी. जांच में यह भी सामने आया है कि परिवार के रसूख और राजनीतिक संबंधों के डर से अब तक इलाके में कोई इनके खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं जुटा सका था. अब सीबीआई यह पता लगाने में जुटी है कि 'विकास' के नाम पर काटी गई इन कॉलोनियों में किन-किन सफेदपोशों ने निवेश किया था.
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