दुनिया के सबसे ऊंचे और भारत के सबसे चुनौतीपूर्ण रेलवे ट्रैक चिनाब ब्रिज पर अभी तक वंदे भारत कभी भी 100 किलोमीटर की स्पीड नहीं दौड़ी है. रेलवे ने इस बारे में कहा कि इस ब्रिज पर 100 किलोमीटर की रफ्तार से ट्रेन को चलाने की मंजूरी मिल चुकी है पर ट्रेन इस स्पीड से अभी इस ब्रिज पर नहीं दौड़ी है.
एफिल टावर से भी ऊंचा है चिनाब ब्रिज
बता दें कि चिनाब ब्रिज पर बना रेलवे ट्रैक एफिल टावर से भी ऊंचा है. यह रेल ब्रिज उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक का हिस्सा है. इतने ऊंचे रेलवे ट्रैक पर वंदे भारत का सरपट दौड़ना किसी सपने के साकार होने से कम नहीं है. चिनाब ब्रिज, चिनाब नदी से लगभग 359 मीटर ऊपर बना है. यह दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे ब्रिज में टॉप पर है. इसकी कुल लंबाई 1315 मीटर है. यह ब्रिज पेरिस के एफिल टावर से भी ज्यादा ऊंचा है.
भारत का गौरव, विश्व के सबसे ऊँचे रेल आर्च पुल चिनाब ब्रिज पर दौड़ती वंदे भारत एक्सप्रेस 🚆#vandebharatexpress #chenabridge pic.twitter.com/haZt8SeWMm
— Northern Railway (@RailwayNorthern) August 18, 2026
चिनाब ब्रिज
बता दें कि रेल मंत्रालय ने नॉर्दर्न रेलवे के जम्मू डिवीन में श्री माता वैष्णो देवी कटरा-बनिहाल के बीच 111 किमी. लंबे नए ब्रॉड गेज रेल सेक्शन पर ट्रेनों की अधिकतम अनुमत गति को बढ़ाकर 100 किमी प्रति घंटा करने को मंजूरी दी थी. इससे पहले, इस सेक्शन पर श्री माता वैष्णो देवी कटरा-संगलदान सेक्शन के लिए अनुमत गति को 85 किमी प्रति घंटा और संगलदान-बनिहाल सेक्शन के लिए 75 किमी प्रति घंटा थी.

नॉर्दर्न रेलवे ने बताया 'भारत का गौरव'
नॉर्दर्न रेलवे ने चिनाब ब्रिज पर दौड़ती वंदे भारत ट्रेन का एक वीडियो एक्स पर शेयर कर लिखा-भारत का गौरव, विश्व के सबसे ऊंचे रेल आर्च पुल चिनाब ब्रिज पर दौड़ती वंदे भारत एक्सप्रेस. बता दें कि चिनाब रेलवे ट्रैक पर जनवरी 2025 में आखिरी सफल परीक्षण किया गया था. इसके बाद इस ट्रैक पर श्रीनगर-कटरा वंदे भारत सेवा शुरू हुई. अप्रैल 2026 में इसे जम्मू तवी तक बढ़ा दिया गया.

भूकंप में भी ऐसे ही डंटा रहेगा चिनाब ब्रिज
चिनाब ब्रिज को इस तकनीक के साथ बनाया गया है कि भूकंप भी इसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता. इसे बनाना रेलवे के लिए बिल्कुल भी आसान नहीं था.कई चुनौतियां आईं. पल-पल बदलता खराब मौसम, संकरी सड़कें, ऊंची पहाड़ियां और अस्थिर चट्टानें. इन सभी ने इसे और भी चुनौतीपूर्ण बना दिया.दुर्गम क्षेत्र तक निर्माण सामग्री पहुंचना ही मुश्किल काम था. तमाम दिक्कतों के बावजूद इसे पूरा कर लिया गया. पुल को इस तरह डिजाइन किया गया है कि तेज भूकंप, तेज हवाएं और विस्फोट जैसी परिस्थितियों के सामने भी यह ऐसे ही डंटा रहेगा.
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