विज्ञापन

लॉरेंस बिश्नोई के प्रत्यर्पण की मांग करेगा यूएस, अमेरिकी न्याय विभाग ने कर दिया कन्फर्म

भारत और यूएस के बीच प्रत्यर्पण की प्रक्रिया 1997 में हुई द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि और भारत के प्रत्यर्पण कानून, 1962 के तहत तय होती है.

लॉरेंस बिश्नोई के प्रत्यर्पण की मांग करेगा यूएस, अमेरिकी न्याय विभाग ने कर दिया कन्फर्म
  • अमेरिकी न्याय विभाग लॉरेंस बिश्नोई के प्रत्यर्पण की भारत से आधिकारिक मांग करेगा, जो गुजरात की जेल में बंद है
  • लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ पर खालिस्तान अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या सहित कई आरोप हैं
  • प्रत्यर्पण प्रक्रिया भारत और अमेरिका के बीच 1997 की द्विपक्षीय संधि और 1962 के प्रत्यर्पण कानून के तहत होती है
नई दिल्ली:

अमेरिका कनाडा में खालिस्तान अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या सहित कई गंभीर आपराधिक घटनाओं में आरोपी गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के प्रत्यर्पण की मांग करेगा. अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) ने इसकी पुष्टि भी की है. 2014 में गिरफ्तार बिश्नोई फिलहाल गुजरात की एक जेल में बंद है.

द इंडियन एक्सप्रेस के सवाल के जवाब में कैलिफोर्निया के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट स्थित अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय के जनसंपर्क अधिकारी, सियारन मैकएवॉय ने कहा कि लॉरेंस बिश्नोई भारत में जेल में बंद है. हम उसके अमेरिका प्रत्यर्पण की मांग करेंगे. बता दें कि प्रत्यर्पण एक लंबी कानूनी प्रक्रिया है और इसे पूरा होने में अक्सर कई साल लग जाते हैं.

इस हफ़्ते की शुरुआत में, अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) ने अपने 'ऑपरेशन हार्डबॉल' के तहत 37 लोगों पर आरोप लगाए. ये अमेरिका, कनाडा और यूरोप की कानून लागू करने वाली एजेंसियों की एक मिली-जुली कार्रवाई थी, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क वाले तीन भारतीय क्राइम सिंडिकेट से जुड़े 24 लोगों को गिरफ़्तार किया गया.'
Latest and Breaking News on NDTV

बिश्नोई और उसके साथी गोल्डी बराड़ के अलावा, जिन दूसरे गैंग लीडर्स के नाम यूएस के आरोप-पत्र में शामिल हैं, उनमें असम की जेल में बंद जग्गू भगवानपुरिया और कनाडा में रहने वाला रविंदर सिंह धांडा शामिल हैं. बिश्नोई और बराड़ पर निज्जर की हत्या का आदेश देने का आरोप है. FBI ने बराड़ की गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी देने पर $50,000 के इनाम की घोषणा की है.

भारत और यूएस के बीच प्रत्यर्पण की प्रक्रिया 1997 में हुई द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि और भारत के प्रत्यर्पण कानून, 1962 के तहत तय होती है. हालांकि, बिश्नोई के मामले में सबसे अहम कानूनी बात यह है कि वह पहले से ही न्यायिक हिरासत में है और उस पर भारत भर में कई आपराधिक मामले चल रहे हैं.

इसका मतलब है कि भारत कानूनी तौर पर यह तर्क दे सकता है कि बिश्नोई को प्रत्यर्पण से पहले हत्या, जबरन वसूली और संगठित अपराध के उन मामलों का सामना करना होगा जो उसके खिलाफ लंबित हैं और, यदि दोषी ठहराया जाता है, तो उसे कोई भी सजा काटनी होगी.

Latest and Breaking News on NDTV
इस बारे में कोई स्पष्टता नहीं है कि अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) लॉरेंस बिश्नोई के प्रत्यर्पण का अनुरोध कब भेजेगा. प्रक्रिया के अनुसार, प्रत्यर्पण अनुरोध अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा तैयार किया जाएगा और अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) को भेजा जाएगा. विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय और CBI जैसी एजेंसियों के साथ परामर्श करके, यह जांच करेगा कि क्या अनुरोध संधि और प्रत्यर्पण अधिनियम के अनुरूप है.

मैकएवॉय ने कहा कि ढांडा गिरोह के सदस्यों के लिए मुकदमे की तारीख लॉस एंजिल्स अदालत में 31 अगस्त तय की गई है, और भगवानपुरिया गिरोह के सदस्यों के लिए एक दिन बाद, उसी अदालत में तारीख है. अधिकारी ने कहा, "इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि उन तारीखों को आगे बढ़ा दिया जाएगा." इससे संकेत मिलता है कि मामलों को पुनर्निर्धारित किए जाने की संभावना है.

बिश्नोई गिरोह के बारे में, मैकएवॉय ने कहा कि उन्हें हमारे अधिकार क्षेत्र में आरोपी नहीं बनाया गया है. न्याय विभाग के अधिकारी ने कहा, "एक बार जब उन्हें यहां स्थानांतरित कर दिया जाएगा, तो उन्हें आरोपी बनाया जाएगा."

इसे भी पढ़ें: UP के बाहुबली नेता का करीबी, जेल से बात करता था लॉरेंस... दिल्ली पुलिस ने जिन शूटरों को पकड़ा, जानें उनकी कुंडली

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Lawrence Bishnoi, Lawrence Bishnoi Attack, Department Of Justice, Department Of Justice DoJ
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com