मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब पीने से 13 लोगों की मौत ने पूरे बुंदेलखंड को झकझोर दिया है. शुरुआती जांच में एक बार फिर उत्तर प्रदेश कनेक्शन की चर्चा है. वजह वही पुरानी है, यूपी में शराब सस्ती मिलती है और सीमावर्ती जिलों के लोग अक्सर बॉर्डर पार जाकर खरीदारी करते हैं. बुंदेलखंड क्षेत्र में यह छह साल के भीतर दूसरी बड़ी जहरीली शराब त्रासदी है, जिससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है.लेकिन सवाल यह है कि क्या सस्ती शराब की यह आदत अब लोगों की जान पर भारी पड़ रही है?
13 मौतों के बाद फिर चर्चा में आया 'UP कनेक्शन'
सागर में जहरीली शराब से हुई मौतों की जांच कर रहे अधिकारियों की नजर उत्तर प्रदेश से जुड़े संभावित लिंक पर है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, एमपी-यूपी सीमा से लगे इलाकों में बड़ी संख्या में लोग शराब खरीदने के लिए दूसरे राज्य का रुख करते हैं क्योंकि वहां कीमतें कम हैं. यही वजह है कि हर बड़ी शराब त्रासदी के बाद जांच एजेंसियां सप्लाई चेन और खरीदारी के नेटवर्क को खंगालना शुरू कर देती हैं लेकिन इस पर प्रभावी रोक के लिए कोई ठोस पहल नहीं होती है.
आखिर लोग UP से शराब खरीदने क्यों जाते हैं?
बुंदेलखंड के कई जिलों की सीमा सीधे उत्तर प्रदेश से लगती है. गांवों के बीच कई जगह ऐसी सड़कें हैं, जहां एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने में कुछ ही मिनट लगते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि शराब ही नहीं, पेट्रोल भी यूपी में अपेक्षाकृत सस्ता पड़ता है. ऐसे में सीमावर्ती इलाकों के लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी बॉर्डर पार जाते हैं. इसी आवाजाही के बीच शराब का कारोबार भी फलता-फूलता है .
यह पहली बार नहीं हुआ
सागर कांड से पहले फरवरी 2021 में बुंदेलखंड के ही छतरपुर जिले में ऐसी ही दर्दनाक घटना सामने आई थी. तब कथित तौर पर यूपी की एक दुकान से खरीदी गई 'दिलसे' नाम की देसी शराब पीने के बाद चार लोगों की मौत हो गई थी.
लोग कुछ रुपये बचाने के लिए सस्ती शराब की तलाश में दूसरे राज्य पहुंचते हैं, लेकिन कई बार इसी चक्कर में नकली या संदिग्ध शराब उनके हाथ लग जाती है. परिणाम कभी-कभी इतना भयावह होता है कि पूरा इलाका मातम में डूब जाता है.
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
सागर की घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि शराब आखिर आई कहां से? क्या यह स्थानीय स्तर पर तैयार की गई थी या फिर किसी दूसरे राज्य से लाई गई थी? जांच एजेंसियां अब सप्लाई नेटवर्क, वितरण चैन और शराब के नमूनों की जांच में जुटी हैं. अगर अंतरराज्यीय नेटवर्क का कोई सुराग मिलता है तो कार्रवाई का दायरा और बड़ा हो सकता है. बुंदेलखंड में जहरीली शराब से मौतों की यह दूसरी बड़ी घटना है. 2021 में चार मौतें हुई थीं, अब 2026 में 11 लोगों की जान चली गई. आंकड़े भले बदल गए हों, लेकिन कहानी वही है, सस्ती शराब, कमजोर निगरानी और मौत का सिलसिला. अब देखना होगा कि सागर कांड की जांच सिर्फ आरोपियों तक पहुंचती है या फिर उस पूरे नेटवर्क को बेनकाब करती है जो सीमावर्ती इलाकों में वर्षों से फल-फूल रहा है.
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