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सीटों की दावेदारी में उलझे सपा और कांग्रेस, इधर नितिन नवीन ने यूपी में लकीर खींच दी; किसे मिलेगा फायदा

भाजपा ने 2014 के बाद से ही यूपी में सहयोगी दलों को साथ लिया है. खासतौर पर ओम प्रकाश राजभर, संजय निषाद, अनुप्रिया पटेल जैसे पिछड़े समाज के कई नेताओं को साथ लेकर भाजपा ने गैर-यादव ओबीसी वर्ग को साधा है.

सीटों की दावेदारी में उलझे सपा और कांग्रेस, इधर नितिन नवीन ने यूपी में लकीर खींच दी; किसे मिलेगा फायदा
नई दिल्ली:

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज गया है. भाजपा यहां चुनावी तैयारियों से लेकर सहयोगी दलों से तालमेल तक के मामले में बढ़त बनाती दिख रही है. एक तरफ जहां समाजवादी पार्टी और कांग्रेस में सीट बंटवारे को लेकर रस्साकशी दिख रही है, वहीं भाजपा ने साफ कर दिया है कि हम सहयोगी दलों के साथ मिलकर काम करेंगे. दो दिनों के दौरे पर यूपी आए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने रविवार को यह बात कही. उन्होंने कहा कि हम सहयोगी दलों के साथ मिलकर चुनाव में उतरेंगे और एक बार फिर से पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएंगे. इस तरह उन्होंने भाजपा की नीति स्पष्ट कर दी है कि चुनावी रणनीति तय करने में सहयोगी दलों को महत्व दिया जाएगा.

वहीं कांग्रेस ने चुनाव से महीनों पहले ही समाजवादी पार्टी पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है. पार्टी के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने सीट बंटवारे को लेकर बराबरी वाली डील की बात कही है. उनका कहना था कि बराबरी वाली बात होनी चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने बसपा सुप्रीमो मायावती की भी तारीफ की. ऐसे में चर्चा है कि कांग्रेस की कोशिश यह है कि सपा को दबाव में लाकर ज्यादा से ज्यादा सीटें हासिल की जा सके. हालांकि दबाव वाली इस रणनीति में समय भी गुजरने का डर रहेगा. यदि सपा और कांग्रेस ऐसे ही रस्साकशी करते रहे तो फिर विधानसभा चुनाव की तैयारी करने में देरी होगी.

वहीं भाजपा सहयोगी दलों के साथ मिलकर पहले ही सीट बंटवारा करना चाहेगी. पहले से सीटें तय होने की स्थिति में उम्मीदवारों के लिए चुनावी तैयारी करना आसान होता है. यदि कहीं सीट बंटवारे में कुछ बदलाव हुए तो फिर समस्या पैदा होती है. इसके अलावा आपसी कलह की संभावना भी बढ़ जाती है. इसलिए यदि भाजपा सहमति बनाती दिख रही है तो यह उसके हित में ही होगा. नितिन नवीन ने ताज होटल में सहयोगी दलों के नेताओं के साथ मुलाकात भी की है. इसके बाद उन्होंने मिलकर काम करने की बात कही. इस मीटिंग को लेकर माना जा रहा है कि भाजपा हाईकमान ने सबको साथ लेकर चलने का भरोसा दिलाने के लिए यह मीटिंग की थी. 

बता दें कि भाजपा ने 2014 के बाद से ही यूपी में सहयोगी दलों को साथ लिया है. खासतौर पर ओम प्रकाश राजभर, संजय निषाद, अनुप्रिया पटेल जैसे पिछड़े समाज के कई नेताओं को साथ लेकर भाजपा ने गैर-यादव ओबीसी वर्ग को साधा है. भाजपा की यह रणनीति अब तक सफल ही रही है. ऐसे में एक बार फिर यदि भाजपा उसी रणनीति पर ऐक्टिव है तो उसकी तैयारी को समझा जा सकता है. 

(पीटीआई का इनपुट भी शामिल)

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