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This Article is From Dec 23, 2020

UP के धर्मांतरण-रोधी कानून पर बोले SC के रिटायर्ड जस्टिस- 'कोर्ट के सामने नहीं टिक पाएगा'

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मदन बी लोकुर ने उत्तर प्रदेश के धर्मांतरण-रोधी नये कानून में कानूनी एवं संवैधानिक दृष्टिकोण से कई खामियां बताते हुए इसकी आलोचना की और कहा कि यह कोर्ट में टिक नहीं सकेगा.

UP के धर्मांतरण-रोधी कानून पर बोले SC के रिटायर्ड जस्टिस- 'कोर्ट के सामने नहीं टिक पाएगा'
रिटायर्ड जस्टिस मदन बी लोकुर ने यूपी के धर्मांतरण-रोधी कानून की आलोचना की. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मदन बी लोकुर (Justice Madan B Lokur) ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के धर्मांतरण-रोधी (UP's Anti-Conversion Law) नये कानून की आलोचना करते हुए कहा कि यह कोर्ट में टिक नहीं सकेगा क्योंकि इसमें कानूनी एवं संवैधानिक दृष्टिकोण से कई खामियां हैं. उन्होंने यह भी कहा कि ‘सामाजिक न्याय' का विचार ठंडे बस्ते में चला गया है क्योंकि शीर्ष न्यायालय इस विषय पर उतनी सक्रियता नहीं दिखा रहा है, जितनी सक्रियता उसे दिखानी चाहिए थी. उन्होंने कहा कि ‘उत्‍तर प्रदेश विधि विरूद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्‍यादेश, 2020' में कई खामियां हैं और यह न्यायालय में टिक नहीं पाएगा.

दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश दिवंगत राजेंद्र सच्चर पर पुस्तक ‘In Pursuit of Justice-An Autobiography' के विमोचन के अवसर पर उन्होंने ‘व्यक्तिगत स्वतंत्रता एवं न्यायपालिका' विषय पर ये बातें कहीं. पुस्तक को न्यायमूर्ति सच्चर के मरणोपरांत उनके परिवार के सदस्यों द्वारा विमोचित किया गया. न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) लोकुर ने कहा, ‘संविधान कहता है कि अध्यादेश तब जारी किया जा सकता है जब फौरन किसी कानून को लागू करने की जरूरत हो. जब विधानसभा का सत्र नहीं चल रहा था तब इसे (अध्यादेश को) तुरंत जारी करने की क्या जरूरत थी? बेशक कुछ नहीं...कहीं से भी यह अध्यादेश नहीं टिकेगा.'

उन्होंने शीर्ष न्यायालय के बारे में कहा, ‘दुर्भाग्य से (कोविड-19) महामारी के चलते कुछ खास स्थिति पैदा हो गई और उच्चतम न्यायालय को बड़ी संख्या में लोगों के हितों, उदाहरण के लिए प्रवासी श्रमिकों, नौकरी से निकाल दिए गए लोगों, सभी तबके के लोगों के लिए पहले की तुलना में कहीं अधिक सक्रियता दिखानी पड़ी.' न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) लोकुर ने कार्य्रक्रम को वीडियो कांफ्रेंस के जरिए संबोधित करते हुए कहा, ‘उच्चतम न्यायालय ने इस साल जैसा कार्य किया, उससे निश्चित तौर पर कहीं बेहतर किया जा सकता था. पिछले कुछ वर्षों में सामाजिक न्याय का विचार ठंडे बस्ते में चला गया है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन हमें इसके साथ जीना होगा.' उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों को लोकोन्मुखी होना चाहिए और संविधान हर चीज से ऊपर है.

यह भी पढ़ें : अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने के लिए हो रहा कानून का दुरुपयोग : सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश

कार्यक्रम के अवसर पर पूर्व अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने पूर्व न्यायाधीश लोकुर के इन विचारों से सहमति जताई कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामले पीछे छोड़ दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि हालांकि समस्या यह है कि शीर्ष न्यायालय ने काफी भार अपने ऊपर ले लिया है.

पूर्व अटार्नी जनरल ने उप्र के धर्मांतरण-रोधी कानून पर कहा कि कथित तौर पर जबरन धर्मांतरण एवं विवाह हो रहे हैं, अब एक कानून लाया गया है. उन्होंने कहा, ‘कानून लाना विधायकों की इच्छा पर निर्भर करता है. न्यायालय सिर्फ इस चीज पर फैसला करेगा कि क्या यह संविधान के अनुरूप वैध है या नहीं.'

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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