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This Article is From Mar 07, 2022

Ukraine Russia Crisis : प्यास बुझाने के लिए पिघलती बर्फ पर आश्रित भारतीय छात्र, निराश छात्रों को सुमी से निकासी का इंतजार

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि सरकार छात्रों के तब तक बाहर निकालने के पक्ष में नहीं है जब तक सुरक्षित रास्ता उपलब्ध नहीं हो जाता.

Ukraine Russia Crisis : प्यास बुझाने के लिए पिघलती बर्फ पर आश्रित भारतीय छात्र, निराश छात्रों को सुमी से निकासी का इंतजार
विदेश मंत्रालय ने कहा कि सरकार छात्रों के तब तक बाहर निकालने के पक्ष में नहीं है जब तक सुरक्षित रास्ता उपलब्ध नहीं हो जाता.
नई दिल्ली:

प्यास बुझाने के लिए पिघलती बर्फ पर आश्रित और जरूरी चीजें तेजी से खत्म होने के बीच युद्धग्रस्त देश यूक्रेन के सुमी में फंसे सैकड़ों भारतीय छात्र हर सुबह इस उम्मीद में सड़कों पर खड़े होते हैं कि ‘‘आज का दिन वह दिन होगा'' जब उन्हें युद्ध की बर्बरता से बचाया जाएगा. हालांकि, उनका इंतजार लंबा होता गया, क्योंकि भयंकर लड़ाई ने रूसी सीमा के पार सुरक्षित जाने के रास्ते अवरुद्ध कर दिए हैं. भारत सरकार द्वारा छात्रों को सुरक्षित निकालने का आश्वासन दिए जाने के एक दिन बाद उन्होंने गोलाबारूद और मिसाइल हमलों के बीच पैदल रूसी सीमा तक जाने की कठिन यात्रा करने का विचार त्याग दिया है. मेडिकल की छात्रा 25 वर्षीय जिसना जिजी ने कहा कि उनके पास धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है क्योंकि रूसी सीमा तक चलकर जाना खतरे से खाली नहीं है.

सुमी में मौजूद हताश छात्रों ने शनिवार को एक वीडियो क्लिप पोस्ट करते हुए घोषणा की थी कि उन्होंने लड़ाई के बीच भयंकर ठंड में रूसी सीमा तक चलकर जाने का जोखिम उठाने का फैसला किया था, जिससे भारत में सत्ता के गलियारों में उनकी सुरक्षा के बारे में आशंका बढ़ गई थी. वीडियो वायरल होने के तुरंत बाद भारत सरकार ने छात्रों को आश्रयों में रहने के लिए कहा और आश्वासन दिया कि उन्हें जल्द ही वहां से निकाल लिया जाएगा.

मेडिकल के छात्र आशिक हुसैन सरकार ने ट्वीट किया, ‘‘हर दिन सुबह छह बजे सुमी में छात्र सड़क पर बसों का इंतजार कर रहे होते हैं. हर दिन हम यही मानते हैं कि आज हमें यहां से निकाल लिया जाएगा. लेकिन हर रोज तारीख बदलती रहती है. इसलिए कृपया हमारी उम्मीदों को नहीं तोड़ें.'' शहर में अधिकांश सड़कें और पुल नष्ट हो गए हैं और कोई परिवहन उपलब्ध नहीं है. जिजी ने कहा कि सीमा तक पहुंचना ‘‘असंभव'' है.

जिजी ने कहा, ‘‘इसके अलावा, हमने सुना है कि कुछ विदेशी छात्र जो सीमा तक पहुंचने में कामयाब रहे थे, उन्हें सेना ने वापस भेज दिया था. इसलिए हमने इंतजार करने का फैसला किया है.'' जिजी ने कहा कि बहुत से छात्र अपने छात्रावासों के तहखाने में जमा हो गए, बर्फ पिघलाकर उन्होंने अपनी प्यास बुझाई, खाने की चीजें थोड़ी ही बची हैं और बिजली और पानी की लाइनें टूट गईं हैं. वीडियो संदेश में एक लड़की ने कहा, ‘‘हम अब भी सुमी में हैं. हमें अब तक कोई अपडेट नहीं मिला है कि हमें कब निकाला जाएगा. लेकिन हम इसे अधिक समय तक जारी नहीं रख सकते. हमारी समस्याएं दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं. हम सरकार से हमें तुरंत अपडेट करने की अपील करते हैं.''

उसी वीडियो में एक और निराश छात्र ने कहा, ‘‘यहां पानी नहीं है, बिजली आपूर्ति बाधित है. एटीएम में पैसे नहीं हैं, लड़कियों के पास सैनिटरी नैपकिन नहीं है.'' भारत ने शनिवार को सुमी में तत्काल युद्धविराम के लिए कई माध्यम से रूस और यूक्रेन की सरकारों पर ‘‘दृढ़ता से दबाव'' डाला था ताकि वहां फंसे लगभग 700 भारतीय छात्रों के लिए एक सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित किया जा सके.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि सरकार छात्रों के तब तक बाहर निकालने के पक्ष में नहीं है जब तक सुरक्षित रास्ता उपलब्ध नहीं हो जाता. बागची ने यह भी कहा कि खारकीव और पिसोचिन से भारतीयों की सुरक्षित निकासी लगभग पूरी होने के बाद भारत का मुख्य ध्यान अब सुमी में फंसे छात्रों को निकालने पर है.

एक अन्य मेडिकल छात्र जन कलाजी ने ट्वीट किया, ‘‘सुमी के छात्रों से पूछना बंद करें कि हमने सुमी क्यों नहीं छोड़ा. मानो हमारे पास कोई विकल्प था और हम उसके साथ नहीं गए. सुमी के छात्रों को बचाएं.'' पिछले कुछ दिनों से छात्र त्राहिमाम संदेश भेज रहे हैं और सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर रहे हैं, जिसमें उन्हें वहां से तत्काल निकाले जाने की गुहार लगाई जा रही है. युद्ध प्रभावित यूक्रेन से अपने नागरिकों को निकालने के लिए भारत सरकार ने ‘ऑपरेशन गंगा' शुरू किया है, जिसके तहत हजारों फंसे हुए लोगों ज्यादातर छात्रों को पश्चिमी यूक्रेन की सीमा से लगे देशों से निकाला गया है. हालांकि, पूर्वी हिस्से से निकासी एक चुनौती बनी हुई है.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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