- विक्रमजीत सिंह साहनी ने पंजाब के हितों को ध्यान में रखते हुए आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा का साथ चुना है
- विक्रमजीत सिंह ने कहा कि AAP ने राघव चड्ढा और संदीप पाठक को साइड लाइन कर दिया था जिससे सांसद नाराज थे
- पंजाब में केंद्र और राज्य के बीच तालमेल न होने के कारण इन सभी सांसदों ने भाजपा में शामिल होने का फैसला किया
आम आदमी पार्टी छोड़ भारतीय जनता पार्टी का साथ थामने वाले विक्रमजीत सिंह साहनी ने अपने फैसले को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि हम सभी सांसदों ने जो फैसला लिया है वो पंजाब के हितों को ध्यान में रखते हुए ये फैसला किया है. NDTV से खास बातचीत में विक्रमजीत सिंह साहनी ने कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी के शानदार काम करने वालों में संदीप पाठक और राघव चड्ढा थे. इनकी मेहनत के कारण ही पार्टी को पिछली बार पंजाब में भारी बहुमत मिला था. मुझे तो राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी में शामिल कराया था. बीते कुछ समय से आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा और संदीप पाठक को साइड लाइन कर दिया था. वो इस बात से खासे नाराज थे. उन्होंने कई बार ये बातें मुझसे भी साझा की कि जिस पार्टी के लिए हम लोगों ने इतना कुछ किया उसने बाद में हम लोगों को ही किनारे कर दिया है. पिछले एक साल से पार्टी राघव चड्ढा और संदीप पाठक के साथ पार्टी अलग व्यवहार कर रही थी. इस बात से वो काफी दुखी थे.
'हम केंद्र और राज्य के बीच ब्रिज बनना चाहते थे'
पार्टी और राघव चड्ढा के बीच दिल्ली चुनाव में हारे के बाद से हालात और ज्यादा बिगड़ गए. आम आदमी पार्टी ने कभी हमे या हरभजन सिंह जैसे लोगों नहीं कहा था कि आप पार्टी ज्वाइन करें. लेकिन जब हम पार्टी में शामिल हुए तो हमे कहा गया कि आप लोग पार्टी में एक दोस्त की तरह रहेंगे. हमे आपके जैसे ही साफ सुधरी छवि वाले लोग चाहिए थे. केजरीवाल ने हमे पंजाब में अलग से काम करने के लिए भी कहा था. हम पंजाब को लेकर काम कर भी रहे थे. हमने पंजाब को लेकर केंद्र और राज्य के बीच एक ब्रिज बनने की कोशिश भी की लेकिन पंजाब सरकार रोज सुबह पीएम मोदी और अमित शाह को लेकर उल्टी बात करते थे. जिस वजह से सिर्फ लड़ाई झगड़े में ही चार साढ़े चार साल निकल गए.
'वो पंजाब के लिए कुछ कर ही नहीं रहे थे'
उन्होंने आगे कहा कि मान साहेब काफी बिजी रहते थे तो उनसे मिलना मुश्किल था. हर एक किसी का अपना तरीका है काम करने का. हमने केजरीवाल जी को बीते कुछ महीने में कई सुझाव दिए थे ताकि पंजाब को लेकर कोई इफेक्टिव चेंज लाया जाए. लेकिन उसका कभी कोई फायदा नहीं है. मैंने कई बार बोला था हमे दिल्ली में पंजाब के लिए आवाज बनना है लेकिन इसे कोई अगले दिन मानता नहीं था. पंजाब के अलग-अलग मुद्दों पर ये सभी साथ नहीं आते थे. इसलिए हमने पंजाब के लिए कुछ करने के लिए बीजेपी की तरफ जाने का फैसला किया. हमने काफी कोशिश की थी कि केंद्र और राज्य के बीच तालमेल हो जाए लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी जब केजरीवाल और भगवंत मान ने कुछ नहीं किया तो हमने ये फैसला लिया.
'पार्टी छोड़ने से पहले केजरीवाल से की थी मुलाकात'
मैंने पार्टी छोड़ने से पहले बुधवार को केजरीवाल से मुलाकात की थी. उन्होंने मेरे काम को सराहा था. मैंने उनसे खुलकर बात की थी. उनको तब तक विश्वास नहीं था कि संदीप पाठक जाएंगे. लेकिन मैंने उनको कहा था कि सर ऐसा होने वाला है. इसलिए आप देख लीजिए. उन्होंने कहा था कि आप देख लीजिए. मैं फिर ये कहना चाहता हूं कि हमने जो किया है वो जज़्बाती फैसला था क्योंकि पंजाब के लिए कुछ कर नहीं पा रहे थे. पंजाब को लेकर कभी कोई चिंतन बैठक नहीं होती थी.आम आदमी पार्टी में किसी के पास पंजाब को लेकर दस या पंद्रह साल का प्लान नहीं था. सबका ध्यान इस बात पर है कि 2027 में हम कैसे कुर्सी संभालेंगे. ये लोग किसानों और युवाओं के लिए कुछ नहीं सोच रहे हैं.
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