- तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में पहली बार मैदान में उतरी विजय की पार्टी टीवीके ने 108 सीटें जीती हैं
- टीवीके ने युवा मतदाताओं में भारी लोकप्रियता हासिल की है, खासकर 18 से 34 वर्ष के युवाओं ने इसे अधिक वोट दिए हैं
- महिलाओं और शहरी इलाकों में टीवीके को काफी समर्थन मिला है
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही राज्य में सियासी उठक-पटक देखने को मिल रही है. इसकी वजह है अभिनेता से नेता बने विजय और उनकी पार्टी टीवीके. विधानसभा चुनाव में पहली बार मैदान में उतरी टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. टीवीके ने 108 सीटें जीतीं हैं. हालांकि यह अभी भी बहुमत के आंकड़े 118 से पीछे है. विजय अब तक तीन बार राज्यपाल से मिलकर सरकार का दावा पेश कर चुके हैं. लेकिन सूत्रों के अनुसार विजय राज्यपाल को बहुमत के दावे से संतुष्ट नहीं कर पाए. हालांकि टीवीके ही सरकार बनाने की तरफ बढ़ रही है. अगर ऐसा हुआ तो यह तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव होगा. तमिलनाडु की राजनीति दशकों से 'द्रविड़' विचारधारा के दो ध्रुवों DMK और AIADMK के बीच झूलती रही है. लेकिन अब विजय की पार्टी ने पारंपरिक सियासी समीकरणों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है.
55% वोट शेयर के साथ युवाओं की पहली पसंद
TVK की सफलता का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला कारक 'यूथ पावर' बनकर उभरा है. आंकड़ों के मुताबिक, 18 से 34 साल के युवाओं ने पारंपरिक द्रविड़ पार्टियों को नकारते हुए विजय पर भरोसा जताया है. 18-24 साल के युवाओं ने DMK को 28% और ADMK को सिर्फ 15% वोट दिए, वहीं TVK ने 49% वोटों के साथ एकतरफा बढ़त बनाई. इसी तरह TVK ने 25-34 साल के युवाओं के बीच 55% वोट हासिल किए.

महिलाओं और शहरी मतदाताओं का भरोसा
तमिलनाडु में हमेशा से माना जाता रहा है कि महिला वोट बैंक 'अम्मा' (जयललिता) की विरासत या DMK की कल्याणकारी योजनाओं के इर्द-गिर्द रहता है. लेकिन इस बार 40% महिलाओं ने TVK को चुना, जबकि DMK को 30% और ADMK को 24% ही वोट मिले. शहरी इलाकों में भी TVK ने 39% वोटों के साथ सेंध लगाई है. हालांकि, ग्रामीण इलाकों में मुकाबला अभी भी कड़ा है, जहां ADMK (33%) और DMK (30%) के मुकाबले TVK 29% पर रही.

क्या चला सिनेमा का जादू?
दक्षिण भारत में सिनेमा और राजनीति का रिश्ता नया नहीं है. एमजीआर और जयललिता से लेकर हाल ही में आंध्र प्रदेश में पवन कल्याण की 'जनसेना' का 100% स्ट्राइक रेट इसका सबूत है. विजय की ऑन-स्क्रीन लोकप्रियता ने उन्हें एक मजबूत आधार दिया, लेकिन सिर्फ 'स्टार पावर' ही जीत की वजह नहीं थी. विजय ने बहुत ही सधे हुए तरीके से DMK को अपना राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और BJP को वैचारिक विरोधी घोषित किया. उन्होंने 'धर्मनिरपेक्ष सामाजिक न्याय' का नारा देकर उन मतदाताओं को अपनी ओर खींचा जो सत्ता-विरोधी लहर से परेशान थे, लेकिन सांप्रदायिक राजनीति के भी खिलाफ थे.
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फ्री योजनाओं ने भी बदला गेम
तमिलनाडु में टीवी, मिक्सर और ग्राइंडर बांटने की राजनीति बहुत पुरानी है. लेकिन TVK ने 'मुफ्त' को 'सशक्तिकरण' से जोड़ने की कोशिश की है. जहां अन्य पार्टियां राशन और बिजली पर केंद्रित रहीं, वहीं विजय के वादे आधुनिकता और भविष्य की तकनीक पर आधारित हैं. विजय ने सरकार बनने के बाद AI मंत्रालय, AI यूनिवर्सिटी और AI सिटी बनाने का वादा किया. इसके अलावा 5 लाख सरकारी नौकरियां और उच्च शिक्षा के लिए 20 लाख रुपये तक के एजुकेशन लोन जैसे वादे किए. विजय के इन वादों ने उन्हें युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय बना दिया. इसका असर चुनावी नतीजों में देखने को भी मिला है.
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