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कलेक्ट्रेट पर धरने पर बैठे निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री, SIT जांच की रखी मांग

निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री बरेली कलेक्ट्रेट के बाहर धरने पर बैठ गए, जहां उन्होंने सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए. अग्निहोत्री ने अपने निलंबन को “साजिश” बताया और SIT जांच की मांग की.

कलेक्ट्रेट पर धरने पर बैठे निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री, SIT जांच की रखी मांग
  • बरेली के निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री बरेली कलेक्ट्रेट के बाहर धरना पर बैठ गए हैं
  • उन्होंने उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों को निशाना बनाए जाने और प्रशासन की निष्क्रियता का आरोप लगाया है
  • अग्निहोत्री ने माघ मेले में साधुओं के साथ मारपीट और केंद्र सरकार के नए UGC नियमों पर आपत्ति जताई है
बरेली:

बरेली में निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री अब अपने निलंबन और आरोपों को लेकर खुलकर मोर्चा खोल चुके हैं. सोमवार को इस्तीफा देने के एक दिन बाद मंगलवार को वे बरेली कलेक्ट्रेट के बाहर धरने पर बैठ गए, जहां उन्होंने सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए. उनका कहना है कि यह धरना “अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने” और “सच सामने लाने” के लिए है.

अलंकार अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में लंबे समय से “ब्राह्मणों को निशाना बनाए जाने का अभियान” चल रहा है. उन्होंने पिछले दो सप्ताह में हुई कुछ घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि किसी जगह “डिप्टी जेलर ब्राह्मण को पीट रहा है”, तो कहीं “एक विकलांग ब्राह्मण की थाने में मौत हो गई.”

प्रशासन पर लगाया गंभीर आरोप

उन्होंने प्रयागराज के माघ मेले की घटना का भी ज़िक्र किया. अग्निहोत्री ने कहा कि मौनी अमावस्या के दिन ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्यों के साथ “जूते‑लात से मारपीट” हुई. उनके मुताबिक, “अगर प्रशासन ही साधुओं को पीटेगा, तो समाज में गलत संदेश जाएगा.”

उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से 13 जनवरी 2026 को जारी UGC नियमों पर भी आपत्ति जताई. उनका कहना है कि नए नियमों से विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले सामान्य वर्ग के छात्रों को “गलत तरीके से आरोपी” बनाया जा सकता है और “झूठी शिकायतों” का दुरुपयोग हो सकता है.

जनप्रतिनिधियों पर चुप्पी साधने का लगाया आरोप

अलंकार अग्निहोत्री ने ब्राह्मण समुदाय के जनप्रतिनिधियों पर चुप्पी साधने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा, “हमारे सांसद‑विधायक मौन दर्शक बने बैठे हैं. समय आ गया है कि वे इस्तीफा देकर समुदाय के साथ खड़े हों, वरना भारी नुकसान होगा.” अलंकार ने रविवार को अपना इस्तीफा राज्यपाल, यूपी CEO और डीएम को ईमेल के जरिए भेजा था. उसी दौरान वह यह आरोप भी लगा चुके हैं कि डीएम कैंप कार्यालय पर उन्हें “पूरी रात रोककर रखने की साजिश” की गई थी. उन्होंने दावा किया कि एक फोन कॉल आया था कि “इस पंडित को यहां से मत जाने दो.”

उनका कहना है कि उन्होंने बार एसोसिएशन के सचिव को मीडिया को सूचना देने को कहा, जिसके बाद “जब प्रशासन को पता चला कि मामला बाहर पहुंच गया है, तभी उन्हें जाने दिया गया.” धरने पर बैठे अग्निहोत्री का कहना है कि वह अपने निलंबन को अदालत में चुनौती देंगे और SIT जांच की मांग कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “पूरे फोन कॉल की जांच होनी चाहिए. जल्द हम आगे की रणनीति तय करेंगे.” बरेली कलेक्ट्रेट के बाहर उनका धरना जारी है और प्रशासनिक हलकों में इस घटना ने हलचल मचा दी है.

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