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जब सुरेश कलमाड़ी को जिताने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी ने लगा दिया था पूरा जोर

मद्रास में 1944 में जन्मे कलमाड़ी ने पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज से पढ़ाई की. बाद में उन्होंने इस शहर का संसद में प्रतिनिधित्व किया. राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व छात्र और 1971 के भारत-बांग्लादेश युद्ध में भाग लेने वाले वायु सेना के पायलट कलमाड़ी 1982 में सांसद बने.

जब सुरेश कलमाड़ी को जिताने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी ने लगा दिया था पूरा जोर
कांग्रेस नेता सुरेश कलमाड़ी और भारत के पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी.
  • कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुरेश कलमाड़ी का पुणे में लंबी बीमारी के बाद 81 वर्ष की उम्र में निधन हो गया.
  • कलमाड़ी का खेल प्रशासन में दो दशकों से अधिक का अनुभव था और उन्होंने 2010 राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन भी संभाला.
  • वे चार बार राज्यसभा और तीन बार लोकसभा सांसद रहे, साथ ही रेल राज्य मंत्री के रूप में भी कार्य किया.
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पुणे:

Suresh Kalmadi News: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश कलमाड़ी का लंबी बीमारी के बाद मंगलवार तड़के पुणे में निधन हो गया. वह 81 वर्ष के थे. कलमाड़ी के पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि उन्होंने करीब तीन बजकर 30 मिनट पर अंतिम सांस ली. कलमाड़ी का राजनीति और खेल प्रशासन में लंबा करियर रहा है. उनकी गिनती भारत के प्रभावशाली खेल प्रशासकों में होती रही है. कलमाड़ी दो दशकों से अधिक समय तक खेल प्रशासन में विभिन्न भूमिकाओं में रहे. भारतीय खेलों पर उनकी पकड़ ने सफलता और विवाद दोनों को जन्म दिया. कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 के सफल आयोजन के बाद उनके दामन पर भ्रष्टाचार के छींटे भी पड़े. उन्हें जेल भी जाना पड़ा.

कलमाड़ी के सियासी जीवन में एक ऐसा दौर भी आया, जब अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें जिताने के लिए पूरा जोर लगा दिया था. अटल बिहारी वाजपेयी भाजपा के केंद्रीय नेता थे, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने सुरेश कलमाड़ी की जीत के लिए न केवल प्रचार किया बल्कि जनसभा को भी संबोधित किया.

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1997 में कलमाड़ी की जीत के लिए अटल ने लगाया था जोर

दरअसल यह कहानी है कि 1997 की. तब कांग्रेस ने कलमाड़ी को पुणे से लोकसभा का टिकट नहीं दिया. इसके बाद कलमाड़ी ने पुणे विलास अघाड़ी नामक पार्टी बना ली. उस चुनाव में भाजपा ने भी कांग्रेस उम्मीदवार विठ्ठल तुपे के खिलाफ कलमाड़ी का समर्थन किया था. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी उनके लिए प्रचार करने आए और उन्होंने फर्ग्यूसन कॉलेज के मैदान में एक जनसभा की. हालांकि, कलमाड़ी उस चुनाव में हार गये.

मद्रास में जन्म, पुणे से पढ़ाई और फिर राजनीति

मद्रास में 1944 में जन्मे कलमाड़ी ने पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज से पढ़ाई की. बाद में उन्होंने इस शहर का संसद में प्रतिनिधित्व किया. राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व छात्र और 1971 के भारत-बांग्लादेश युद्ध में भाग लेने वाले वायु सेना के पायलट कलमाड़ी 1982 में सांसद बने. वह चार बार राज्यसभा के सदस्य रहे. लोकसभा में उन्होंने तीन बार पुणे का प्रतिनिधित्व किया.

4 बार राज्यसभा के सांसद भी बने कलमाड़ी

शरद पवार की नजर उन पर पड़ी थी और उसके बाद उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ. उन्हें पुणे युवा कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. बाद में वह संजय गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के करीब आ गए. सन् 1980 के दशक में कांग्रेस के विभाजन के बाद कलमाड़ी कांग्रेस के साथ रहे तथा 1982, 1988, 1994 और 1998 में राज्यसभा के लिए चुने गए.

उन्होंने पी.वी. नरसिंह राव की सरकार में 1995 से 1996 तक रेल राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया. वह रेल बजट प्रस्तुत करने वाले एकमात्र रेल राज्य मंत्री थे. उनके कार्यकाल के दौरान पुणे रेलवे मंडल की स्थापना हुई और शहर से कई लंबी दूरी की ट्रेन शुरू की गईं.

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राष्ट्रमंडल खेल के आयोजन में लगे करप्शन के आरोप

कलमाड़ी का भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के प्रमुख के रूप में कार्यकाल 1996 से 2011 तक चला. उन पर 2011 में राष्ट्रमंडल खेल (सीडब्ल्यूजी) के आयोजन में भ्रष्टाचार के आरोप लगे, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें गिरफ्तार किया गया. हालांकि, इस साल अप्रैल में प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में ‘क्लोजर रिपोर्ट' दाखिल कर उन्हें क्लीन चिट दे दी.

कलमाड़ी ने पुणे आईटी हब बनाया

कलमाड़ी के नेतृत्व में, नयी दिल्ली में 2010 राष्ट्रमंडल खेलों और पुणे में 2008 राष्ट्रमंडल युवा खेलों समेत कई प्रमुख खेल आयोजनों के साथ-साथ कई राज्यों में राष्ट्रीय खेलों का आयोजन किया गया. कलमाड़ी ने पुणे को एक प्रमुख आईटी, औद्योगिक और खेल केंद्र में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

उनकी पहल में बालेवाड़ी खेल परिसर, पुणे महोत्सव, पुणे अंतरराष्ट्रीय मैराथन, पुणे अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव और पुणे मेट्रो परियोजना के लिए मंजूरी प्राप्त करना शामिल रहा. उन्होंने शहर के विकास के लिए लगभग 2,500 करोड़ रुपये की केंद्रीय निधि की व्यवस्था भी की.

कलमाड़ी के परिवार में कौन-कौन?

कलमाड़ी के परिवार में उनकी पत्नी, बेटा और बहू, दो विवाहित बेटियां और दामाद तथा पोते-पोतियां हैं. उपमुख्यमंत्री अजित पवार, भाजपा मंत्री चंद्रकांत पाटिल और स्थानीय सांसद मुरलीधर मोहोल समेत सभी दलों के नेता कार्वे रोड स्थित कलमाड़ी के आवास पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए पहुंचे.

शरद पवार ने कहा- देश ने एक अनुभवी नेता खो दिया

कलमाड़ी का दोपहर बाद नवी पेठ स्थित वैकुंठ श्मशान में अंतिम संस्कार किया गया. अनुभवी नेता और राकांपा (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने कहा कि देश ने एक अनुभवी नेता खो दिया है, जो संघर्षों से परिपूर्ण थे और उन्होंने सार्वजनिक जीवन की एक लंबी विरासत को आगे बढ़ाया.

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