सुप्रीम कोर्ट ने SIR पर फैसला देते हुए साफ कहा कि चुनाव आयोग को एसआईआर कराने का अधिकार है. कोर्ट ने कहा कि इससे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की संवैधानिक क्षमता आगे बढ़ती है.चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि यह नहीं कह सकते हैं कि चुनाव आयोग ने SIR का प्रयोग करके अपने संवैधानिक अधिकारों की सीमा से बाहर जाकर काम किया है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद आरजेडी की तरफ से एसआईआर के खिलाफ याचिका दाखिल करने वाले राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा कि हमने फैसले की डिटेल नहीं देखी है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट अब इसपर फैसला दे दिया है तो इसमें क्या ही कहा जाए.
डिटेल नहीं देखा है
मनोज झा ने कहा कि फैसले की डिटेल हमने नहीं देखा है, क्या ही कहूं, सुप्रीम कोर्ट से हमें उम्मीद थी हमारी चिंता इस बात की थी, आज भी बंगाल में लाखों लोग बाहर हैं महज चंद लोगों को शामिल किया गया. हमने चुनाव आयोग के अधिकार को चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है तो इसमें कुछ कहने को बचता नहीं है. अभी डिटेल की प्रतीक्षा करते हैं. चुनाव आयोग के अधिकार में है या नहीं इसपर सवाल नहीं था. ये अचानक से नाम काटने की क्षमता पर सवाल था. एक बार विपक्ष की सारी पार्टियां बैठेंगी उसके बाद हम देखेंगे कि कोर्ट से इस पहलू पर अन्य निर्देश की गुंजाइश को देखेंगे.
#WATCH | Delhi: On Supreme Court upholding ECI's decision to undertake SIR of voter rolls that started in Bihar, RJD MP Manoj Kumar Jha says, "...What can I say? We had hopes with the Supreme Court. What were we concerned about? We were questioning 'exclusion, instead of… pic.twitter.com/MJuJ6b1AGt
— ANI (@ANI) May 27, 2026
बीजेपी ने विपक्ष को निशाने पर लिया
बीजेपी नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने सुप्री कोर्ट के फैसले पर कहा कि देखिए SIR की जो प्रक्रिया है, वह कोई नई नवेली प्रक्रिया नहीं है. एसआईआर की प्रक्रिया जो है एक संवैधानिक प्रक्रिया है. आजादी के बाद से लगातार चलती रही है. उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि जिस तरह से एसआईआर को लेकर के इस पर जो है वह कम्युनल कन्फ्यूजन क्रिएट करने की कोशिश की, काल्पनिक कन्फ्यूजन क्रिएट करने की कोशिश की वह जो है वह देश हित में नहीं है. इस SIR में जो है वो ये है कि वैध मतदाता हों या जो वैध नागरिक हों. इसमें जो अवैध मतदाता या अवैध नागरिक हैं उनकी समीक्षा है. इसमें किसी तरह का कोई कन्फ्यूजन नहीं है.
कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि SIR पर जो फैसला सुप्रीम कोर्ट ने दिया है कि उसका विस्तृत अध्ययन करने के बाद मैं बोलूंगा. मैं इतना कहना चाहता हूं कि एसआईआर संवैधानिक है कि नहीं ये बात नहीं है, जिस ढंग से चुनाव आयोग ने लागू किया उसपर सवाल है. हमारे समय में भी एसआईआर हुआ था. सवाल ये था कि आप इसे दो तीन साल के अंदर कराइए. तीन-चार महीने में नहीं. मुद्दा ये था कि जिन लाखों लोगों को नाम कटा जब वो कोर्ट में गए तो 6 हजार का स्वीकार हो गया. अब अगर फैसला उनके पक्ष में आ भी गया तो उनका तो अधिकार गया.
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