NASA Astronaut's Success Story : कहते हैं कि सपने देखने की कोई सीमा नहीं होती, लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए हिम्मत, मेहनत और लगातार कोशिश की जरूरत होती है. आज की हमारी कहानी इसी इच्छाशक्ति की मिसाल है. लॉस एंजिल्स में जन्मे सल्वाडोरन-अमेरिकी फ्रैंक रुबियो (Frank Rubio) ने जिंदगी में कई काम किए हैं. कभी उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई शुरू की, फिर अमेरिकी सेना में शामिल होकर ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर उड़ाए और युद्ध अभियानों में हिस्सा लिया. इसके बाद उन्होंने दोबारा मेडिकल की पढ़ाई पूरी की और सेना में डॉक्टर बने. लेकिन बचपन से अंतरिक्ष को लेकर देखा सपना उनके मन में कहीं जिंदा था. आखिरकार उन्होंने NASA के लिए आवेदन किया और अपने सपने को साकार कर लिया.
मेडिकल की पढ़ाई छोड़ी, सेना में हुए शामिल
फ्रैंक रुबियो ने शुरुआत में डॉक्टर बनने का सपना देखा था. हालांकि, उन्होंने अपनी पढ़ाई से ब्रेक लेकर अमेरिकी सेना में भर्ती होने का फैसला किया. सेना में उन्होंने पायलट बनकर ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर उड़ाए. इस दौरान उन्होंने बोस्निया, अफगानिस्तान और इराक में सैन्य अभियानों में हिस्सा लिया. करीब आठ साल सेना में बिताने के बाद रुबियो अपने पुराने सपने यानी मेडिसिन की ओर लौटे. मेडिकल की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने अमेरिकी सेना में फैमिली मेडिसिन डॉक्टर के तौर पर काम किया.
डॉक्टर से एस्ट्रोनॉट बनने का सपना
सेना में डॉक्टर के तौर पर काम करते हुए रुबियो के मन में बचपन का एक सपना फिर से जागा. इसलिए उन्होंने 2017 NASA एस्ट्रोनॉट कैंडिडेट क्लास के लिए आवेदन कर दिया. इसके लिए करीब 18,000 लोगों ने आवेदन किया था, लेकिन रुबियो समेत सिर्फ 12 उम्मीदवारों इस क्लास में शामिल हो पाए. इसके बाद उन्हें एस्ट्रोनॉट बनने के लिए कठोर ट्रेनिंग से गुजरना था. ट्रेनिंग में प्लेन उड़ाना सीखने से लेकर रूसी भाषा पढ़ना और अंतरिक्ष मिशनों से जुड़ी कई तकनीकी तैयारियां शामिल थीं.
सिंगल मदर के बेटे ने बदली अपनी किस्मत
रुबियो की कहानी इसलिए भी खास है, क्योंकि वे एक सामान्य परिवार से आते हैं. उन्होंने टाइम मैगजीन को दिए अपने इंटरव्यू में खुद बताया था कि वे सिंगल मदर के बेटे हैं. उनकी मां किशोर अवस्था में ही मां बन गई थीं और परिवार को संभालने के लिए उन्होंने कई कम आय वाली नौकरियां कीं. रुबियो बताते हैं कि वह एक साधारण परिवार से आते हैं और उनके लिए यहां तक पहुंचना किसी सपने से कम नहीं था. उनकी कहानी बताती है कि किसी व्यक्ति की शुरुआत उसकी मंजिल तय नहीं करती.
शिक्षा, मेहनत और समर्पण को बनाया हथियार
2017 में अमेरिकी तत्कालीन उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने भी रुबियो की कहानी को प्रेरणादायक बताया था. उन्होंने कहा था कि शिक्षा, मेहनत और समर्पण के साथ कुछ भी असंभव नहीं है. फ्रैंक रुबियो की यात्रा इसी सोच को साबित करती है. डॉक्टर बनने से लेकर सेना में हेलीकॉप्टर उड़ाने और फिर NASA के स्पेस प्रोग्राम तक पहुंचने वाला उनका सफर बताता है कि अगर लक्ष्य बड़ा हो और कोशिश लगातार जारी रहे, तो जिंदगी की मुश्किल परिस्थितियां भी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकतीं. रुबियो की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने की हिम्मत रखते हैं.
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