- मिडिल ईस्ट संकट के कारण भारत को कतर से मिलने वाली एलएनजी सप्लाई प्रभावित हुई, जिससे ऊर्जा जरूरतों पर दबाव पड़ा
- कतरएनर्जी ने फोर्स मैज्योर घोषित किया, जिससे भारत के एलएनजी आयात में कमी आई और सप्लाई बाधित हुई
- शेल पीएलसी ने अपनी भारतीय इकाई के जरिए एलएनजी आयात बढ़ाकर मार्च में सबसे बड़ा मासिक आयात रिकॉर्ड किया
मिडिल ईस्ट में जारी संकट और US‑Iran War के असर के बीच भारत की ऊर्जा जरूरतों को लेकर चिंता बढ़ गई है. इस संकट का सीधा असर एलएनजी सप्लाई चेन पर पड़ा है. पीटीआई की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि भारत के सबसे बड़े एलएनजी सप्लायर कतर ने इस हालात में हाथ पीछे खींच लिए हैं. ऐसे में ग्लोबल एनर्जी सेक्टर की दिग्गज कंपनी शेल पीएलसी (Shell PLC) ने भारत के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं और एलएनजी की आपूर्ति तेज कर दी है.
कतर से सप्लाई बाधित, शेल ने संभाला मोर्चा
सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण कतर से भारत को मिलने वाली एलएनजी सप्लाई प्रभावित हुई है, क्योंकि कतर भारत का सबसे बड़ा एलएनजी सप्लायर है और लंबी अवधि के करार के तहत भारत की 45–50 प्रतिशत एलएनजी जरूरतें यहीं से पूरी होती रही हैं. लेकिन क्षेत्रीय संकट के चलते कतरएनर्जी ने फोर्स मैज्योर घोषित किया, जिससे भारत की एलएनजी सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा. इसी बीच शेल पीएलसी की भारतीय यूनिट ने स्थिति को संभालते हुए भारत के लिए एलएनजी आयात बढ़ा दिया. सूत्रों के मुताबिक, मार्च महीने में शेल ने भारत में अब तक का सबसे बड़ा मासिक एलएनजी आयात किया.
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उर्वरक सेक्टर को प्राथमिकता, शेल बना बड़ा सप्लायर
रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार ने खाड़ी देशों से सीमित सप्लाई के बीच यूरिया उत्पादन के लिए फीडस्टॉक सुनिश्चित करने के मकसद से बड़े पैमाने पर एलएनजी खरीद की. पिछले महीने भारतीय उर्वरक कंपनियों द्वारा जारी टेंडर में कुल 6 ट्रिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (TBtu) की मांग रखी गई थी, जिसमें से 4 TBtu की सप्लाई शेल ने हासिल की.
सूत्रों ने बताया कि पश्चिम एशिया के संकट के चलते पैदा हुई सप्लाई चेन रुकावट के बीच शेल भारत के लिए एक प्रमुख सप्लायर के रूप में उभरा है. उर्वरक सेक्टर के अलावा शेल इंडिया ने अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं और रिटेलर्स को भी गैस की आपूर्ति की. मार्च में शेल भारत में आयातित गैस का सबसे बड़ा सप्लायर बन गया.
वैश्विक LNG पोर्टफोलियो बनी ताकत
शेल की सप्लाई बढ़ाने की क्षमता उसके मजबूत वैश्विक एलएनजी पोर्टफोलियो से जुड़ी है. कंपनी के पास गुजरात के हजीरा में 50 लाख टन सालाना क्षमता वाला एलएनजी आयात टर्मिनल और उससे जुड़ा स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर है. इसके अलावा शेल दुनिया की सबसे बड़ी एलएनजी पोर्टफोलियो कंपनियों में से एक है, जिससे वह पश्चिम एशिया से बाहर भी कई देशों से कार्गो जुटा सकती है.
सूत्रों के मुताबिक, शेल ने ओमान, ऑस्ट्रेलिया और नाइजीरिया जैसे देशों से एलएनजी कार्गो का इस्तेमाल किया. कंपनी के पास 65 से ज्यादा चार्टर्ड एलएनजी कैरियर्स का बड़ा शिपिंग फ्लीट भी है, जिससे भारत के मुख्य सप्लायर द्वारा फोर्स मैज्योर घोषित किए जाने के बावजूद गैस की डिलीवरी संभव हो सकी.
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भारत की गैस जरूरतें और सप्लाई का दबाव
भारत अपनी प्राकृतिक गैस जरूरतों का लगभग आधा हिस्सा आयात करता है. इस गैस का इस्तेमाल उर्वरक उत्पादन, बिजली उत्पादन, परिवहन के लिए सीएनजी, घरेलू पाइप्ड कुकिंग गैस और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में होता है. फोर्स मैज्योर की वजह से भारत के करीब 27 मिलियन टन एलएनजी आयात में से लगभग 11.2 मिलियन टन की सप्लाई बाधित हुई. इस दौरान गेल (इंडिया) लिमिटेड जैसी सरकारी कंपनियों ने अमेरिका और रूस सहित वैकल्पिक सप्लायरों से सीमित मात्रा में कार्गो मंगाए, लेकिन शिपिंग क्षमता एक बड़ी चुनौती बनी रही.
शिपिंग संकट के बीच शेल को बढ़त
सूत्रों के मुताबिक अमेरिका जैसी दूर वाली जगह से एलएनजी लाने में यात्रा 45 दिन तक लग सकती है और एलएनजी कैरियर्स की उपलब्धता सीमित रही. हालांकि शेल अपने वैश्विक पोर्टफोलियो और खुद के शिपिंग फ्लीट के चलते इस बाधा से काफी हद तक सुरक्षित रहा और तेजी से कार्गो डायवर्ट कर सका. शेल द्वारा लाई गई सप्लाई, गेल और अन्य सरकारी कंपनियों के सीमित आयात और देश में प्रतिदिन लगभग 92 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर घरेलू उत्पादन के साथ मिलकर गैस की उपलब्धता को स्थिर करने में मदद मिली.
उर्वरक और सिटी गैस पर असर
शुरुआत में गैस की कमी के चलते कुछ औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए सप्लाई में कटौती की गई, ताकि उर्वरक संयंत्रों और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन को प्राथमिकता दी जा सके. औद्योगिक उपभोक्ताओं को लगभग 40 प्रतिशत तक सप्लाई कट का सामना करना पड़ा. अतिरिक्त आयात के बाद मार्च में स्थिति में सुधार हुआ. उर्वरक संयंत्रों को दी जाने वाली गैस सप्लाई धीरे‑धीरे बढ़ाकर 6 अप्रैल तक करीब 90 प्रतिशत और 9 अप्रैल तक लगभग 95 प्रतिशत कर दी गई.
अप्रैल में भी जारी रह सकती है बढ़ी सप्लाई
6 अप्रैल से अन्य औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों, जिनमें सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क भी शामिल हैं, उसको गैस की उपलब्धता 10 प्रतिशत बढ़ाई गई. सूत्रों का कहना है कि शेल द्वारा बढ़ाई गई एलएनजी सप्लाई अप्रैल में भी जारी रहने की संभावना है. इसके अलावा, शेल के मध्य अप्रैल में उर्वरक कंपनियों द्वारा लाए जाने वाले 10–12 TBtu गैस सप्लाई टेंडर में एक बड़ा बोलीदाता बने रहने की भी संभावना है.
(पीटीआई इनपु्ट्स के साथ)
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