मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध के बीच भारत की एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर बड़ी खबर आ रही है.केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी आज 9 अप्रैल को दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर कतर रवाना हो रहे हैं. यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब ईरान के मिसाइल हमलों ने कतर के गैस उत्पादन को हिला कर रख दिया है. चूंकि भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा कतर से मंगवाता है, इसलिए यह यात्रा भारत की रसोई और इंडस्ट्री के लिए बेहद अहम है.
आइए समझते हैं कि इस दौरे के क्या मायने हैं और क्या आपके घर आने वाले एलपीजी (LPG) सिलेंडर पर इसका कोई असर पड़ेगा.
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कतर दौरा क्यों है जरूरी? LNG सप्लाई पर बढ़ा खतरा
भारत अपनी जरूरत का लगभग 40% लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) कतर से आयात करता है. हालिया युद्ध के दौरान ईरान ने कतर के बड़े नेचुरल गैस प्लांट्स पर मिसाइल हमला किया, जिससे कतर की 17% एक्सपोर्ट कैपेसिटी प्रभावित हुई है. 'कतरएनर्जी' के मुताबिक, इन प्लांट्स को ठीक होने में 3 से 5 साल लग सकते हैं. ऐसे में भारत के लिए गैस की बिना रुकावट सप्लाई सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती है, जिस पर चर्चा करने के लिए मंत्री पुरी कतर के अधिकारियों से मिलेंगे.
क्या रसोई गैस (LPG) की होगी कमी? सरकार ने दिया भरोसा
गैस सप्लाई को लेकर फैल रही चिंताओं के बीच पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया है कि देश में एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है. मंत्रालय के मुताबिक 7 अप्रैल को एक ही दिन में रिकॉर्ड 53.5 लाख से अधिक घरेलू सिलेंडर डिलीवरी किए गए. ऑनलाइन बुकिंग में 95% का उछाल आया है, जिससे सप्लाई चेन पारदर्शी हुई है. ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए 'डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड' (DAC) का इस्तेमाल 91% तक बढ़ गया है.
PNG की ओर बढ़ते कदम और नए रास्तों की तलाश
सरकार अब गैस के लिए सिर्फ एक देश पर निर्भर नहीं रहना चाहती. युद्ध की वजह से सप्लाई बाधित न हो, इसके लिए भारत ने अब अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और रूस जैसे नए बाजारों से हाथ मिलाया है. साथ ही, देश में पीएनजी (PNG) कनेक्शन का विस्तार तेजी से किया जा रहा है. मार्च 2026 से अब तक करीब 3.87 लाख लोग एलपीजी छोड़कर पीएनजी पर शिफ्ट हो चुके हैं, और 4.21 लाख नए ग्राहकों ने रजिस्ट्रेशन कराया है.
प्रधानमंत्री मोदी और कतर के शेख की बातचीत
इससे पहले मार्च में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से फोन पर बात की थी. पीएम मोदी ने एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए सुरक्षित व्यापार सुनिश्चित करने पर जोर दिया. भारत का लक्ष्य 2030 तक अपनी कुल ऊर्जा खपत में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी बढ़ाकर 15% करना है, और कतर इसमें एक बड़ा साझेदार है.
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