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This Article is From Jul 30, 2025

SC ने जज पर आपत्तिजनक आरोप लगाने वाले याचिकाकर्ता और वकीलों को भेजा अवमानना नोटिस

पीठ ने इन आरोपों पर तीखी नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि याचिकाकर्ता उनके वकीलों से माफी मांगें और वह सच्ची प्रतीत होगी तो ही कोर्ट नरम रुख अपनाने पर विचार करेगा. यह आरोप उस याचिका में लगाए गए थे जिसमें याचिकाकर्ता ने एक मामले को तेलंगाना हाईकोर्ट से किसी अन्य अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की थी.

SC ने जज पर आपत्तिजनक आरोप लगाने वाले याचिकाकर्ता और वकीलों को भेजा अवमानना नोटिस
  • SC ने तेलंगाना HC की न्यायाधीश के खिलाफ आपत्तिजनक आरोप लगाने वाले याचिकाकर्ता और वकीलों को अवमानना नोटिस भेजा
  • पीठ ने कहा कि न्यायाधीशों के खिलाफ निराधार आरोप लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी और वकील भी जिम्मेदार माने जाएंगे
  • याचिकाकर्ता पेड्डी राजू और उनके वकील से माफी मांगने को कहा गया है, तभी कोर्ट नरम रुख अपनाने पर विचार करेगा
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट की न्यायाधीश पर आपत्तिजनक आरोप लगाने वाले याचिकाकर्ता और वकीलों को अवमानना नोटिस जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिकाकर्ता पेड्डी राजू और उनके वकीलों को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि अदालत क्यों न आपके खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्यवाही शुरू करे. यह नोटिस तेलंगाना हाईकोर्ट की जज जस्टिस मौसमी भट्टाचार्य के खिलाफ कथित तौर से आपत्तिजनक और आधारहीन आरोप लगाने पर जारी किया गया है. यह मामला एन. पेड्डी राजू बनाम अनुमुला रेवंत रेड्डी शीर्षक से अदालत में दर्ज है.

चीफ जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई और जस्टिस विनोद के चंद्रन की पीठ ने कहा कि वह किसी भी याचिकाकर्ता को किसी जज के खिलाफ निराधार आरोप लगाने की अनुमति नहीं देगी. जस्टिस गवई ने टिप्पणी की कि हम यह अनुमति नहीं दे सकते कि न्यायाधीशों को निशाने पर लेकर कोई भी ऐसे निराधार और मनगढ़ंत आरोप लगाए. यहां हम तो वकीलों की रक्षा करने की कोशिश कर रहे थे.
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जस्टिस भट्टाचार्य के खिलाफ आपत्तिजनक आरोप लगाए गए हैं. यह आरोप लगाने में याचिकाकर्ता के वकील भी उत्तरदायी माने जाएंगे.

पीठ ने इन आरोपों पर तीखी नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि याचिकाकर्ता उनके वकीलों से माफी मांगें और वह सच्ची प्रतीत होगी तो ही कोर्ट नरम रुख अपनाने पर विचार करेगा. यह आरोप उस याचिका में लगाए गए थे जिसमें याचिकाकर्ता ने एक मामले को तेलंगाना हाईकोर्ट से किसी अन्य अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की थी. इसमें तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को राहत मिली थी. ये 
मामला SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 के तहत दर्ज कुछ आपराधिक धाराएं हाईकोर्ट ने रद्द कर दी थीं. इसके खिलाफ पेड्डी राजू ने यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरण याचिका दायर की थी कि राज्य में इस मुद्दे पर निष्पक्षता से सुनवाई नहीं हो सकती.

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी देखा कि इस याचिकाकर्ता ने उस निर्णय देने वाली न्यायाधीश के खिलाफ भी आपत्तिजनक आरोप लगाए हैं. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि तेलंगाना हाईकोर्ट की वर्तमान न्यायाधीश के खिलाफ आपत्तिजनक आरोप लगाए गए हैं. यह तय है कि केवल याचिकाकर्ता ही नहीं, बल्कि उस याचिका पर हस्ताक्षर करने वाले वकील भी अवमानना के दोषी माने जाएंगे. अतः हम पेड्डी राजू और वकील रितेश पाटिल तथा AoR (अधिवक्ता ऑन रिकॉर्ड) को नोटिस जारी करते हैं. उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न की जाए. नोटिस के जवाब पर अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी.

जब कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर आपत्ति जताई तो उनके वकीलों ने स्थानांतरण याचिका को वापस लेने की अनुमति मांगी लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि आप माफ़ीनामा दाखिल कीजिए। हम देखेंगे कि उसे स्वीकार करना है या नहीं. देखेंगे कि वह माफ़ी सच्ची भावना में है या नहीं. जब हमने भाषा पर नाराजगी जताई, तब याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी गई. लिहाजा हमने यह अनुरोध खारिज कर दिया.

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