कर्नाटक की दो महिला अधिकारी सीनियर आईपीएस डी. रूपा मौदगिल और सीनियर आईएएस अधिकारी रोहिणी सिंधुरी के बीच चल रहे विवाद को अब पूर्व जज सुलझाएंगे. शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने दोनों महिला अधिकारियों के बीच लंबे समय से चल रहे मानहानि के विवाद को अब मध्यस्थता के जरिए दूर करने का फैसला किया है. सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि लगातार कानूनी लड़ाई से दोनों महिला अधिकारी एक दूसरे के करियर को नुकसान पहुंचा रही हैं. जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने राय दी है कि लंबी कार्यवाही की जगह इस विवाद को मध्यस्थता से सुलझा लिया जाना चाहिए.
पूर्व जज सुलझाएंगे दोनों का विवाद
दोनों महिला अधिकारियों के बीच साल 2023 से झगड़ा चल रहा था. दोनों ने एक दूसरे पर सोशल मीडिया के जरिए सार्वजनिक रूप से आरोप लगाए थे. शुक्रवार को सु्प्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट रिटायर्ड जज जस्टिस कुरियन जोसेफ को दोनों के बीच सुलह कराने की जिम्मेदारी दी है. अब दोनों पक्षों को जस्टिस कुरियन जोसेफ के सामने पेश होना होगा. हालांकि दोनों पक्षों को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत भी मिली है. जिसमें दोनों पक्षों के बीच चल रहे दोनों मामलों की आगे की कार्यवाही पर फिलहाल रोक रहेगी.
कर्नाटक हाईकोर्ट ने खारिज की थी सिंदूरी की याचिका
इससे पहले कर्नाटक हाई कोर्ट ने हाल ही में सिंदूरी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने मौदगिल की शिकायत पर अपने खिलाफ शुरू की गई आपराधिक मानहानि की कार्रवाई को चुनौती दी थी. हाई कोर्ट ने मौदगिल की शिकायत पर संज्ञान लेने वाले ट्रायल कोर्ट के आदेश को सही ठहराया. कोर्ट ने कहा कि आदेश में मामले पर उचित तरीके से विचार किया गया था और हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र के तहत इसमें दखल देने की कोई जरूरत नहीं है. हाई कोर्ट ने कहा कि यही सिद्धांत दोनों पक्षों पर समान रूप से लागू होना चाहिए. पिछले फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि जो बात एक पक्ष के लिए सुनवाई योग्य मुद्दा मानी गई थी, वह दूसरे पक्ष के लिए शुरुआती स्तर पर ही कार्यवाही रद्द करने का आधार नहीं बन सकती.
क्या है दोनों महिला अधिकारियों का विवाद
दोनों महिला अधिकारियों के बीच विवाद 18 फरवरी 2023 को एक फेसबुक पोस्ट के बाद शुरू हुआ था. जब आईपीएस डी. रूपा मौदगिल ने अपने फेसबुक अकाउंट पर आईएएस रोहिणी सिंधुरी को लेकर कुछ पोस्ट की थी. इस पोस्ट में दावा किया गया था कि सिंदूरी ने जलाहल्ली में एक बड़ा बंगला बनवाया था. लेकिन ऑल इंडिया सर्विस अधिकारियों को समय-समय पर अपनी अचल संपत्ति की जानकारी में इसका खुलासा नहीं किया था. इसके बाद इसके बाद सिंदूरी ने मौदगिल के खिलाफ कथित तौर पर झूठे और मानहानिकारक बयान देने से रोकने के लिए स्थायी निषेधाज्ञा की मांग करते हुए एक सिविल मानहानि का मुकदमा दायर किया था. जिसके बाद से ही दोनों के बीच विवाद चल रहा है जो सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है. जिसमें अब सर्वोच्च न्यायालय ने मध्यस्था के लिए पूर्व जज को नियुक्त किया है.
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