- दिल्ली के स्कूल में तीन साल की बच्ची के साथ हुए रेप मामले में राजनीतिक कनेक्शन होने का दावा किया गया है.
- पीड़ित परिवार ने अस्पताल में भर्ती बच्ची के इलाज के लिए सरकार से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है.
- स्कूल के ट्रस्टियों के आने-जाने का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग उठाई गई है ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके.
आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने जिस स्कूल में तीन साल की बच्ची के साथ रेप हुआ, उसके राजनीतिक कनेक्शन होने का दावा करते हुए दिल्ली सरकार के मंत्रियों पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार इस स्कूल के ट्रस्टियों के आने और जाने का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक करे ताकि पीड़ित परिवार को सच्चाई पता चल सके.
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि बच्ची के पैरेंट्स का कहना है कि वे जब भी थाने गए, तो स्कूल के जनकपुरी ब्रांच के मैनेजर उन्हें मिले. उन्होंने कहा कि आज तीन साल की रेप पीड़ित बच्ची तबीयत बिगड़ने की वजह से अस्पताल में भर्ती है. इसके बावजूद स्कूल मैनेजमेंट को क्यों बचाया जा रहा है? उन्होंने आशीष सूद से स्कूल की फाइल सार्वजनिक करने की मांग की है, ताकि लोगों को भी पता चल सके कि स्कूल का राजनीतिक संबंध है या नहीं है.
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि घटना के बाद से लड़की की तबीयत ठीक नहीं थी. उसने खाना-पीना बेहद कम कर दिया था और उसे यूरिन पास करने तक में तकलीफ हो रही थी. परिवार ने अल्ट्रासाउंड कराया तो उसमें भी बच्ची को काफी दिक्कतें बताई गईं. गुरुवार को उस बच्ची की तबीयत इतनी खराब हो गई कि उसे हॉस्पिटल में एडमिट कराना पड़ा. मां-बाप के हालात ऐसे हैं कि वे फोन करके पूछ रहे हैं कि अगर पैसे की दिक्कत हुई और सरकार ने पैसे नहीं दिए तो वे क्या करेंगे? हमने परिवार से कहा है कि वे पैसे की चिंता न करें, उन्हें दिक्कत नहीं होने दी जाएगी और वे बस इलाज कराएं. मगर यह बड़े शर्म की बात है कि देश की राजधानी दिल्ली के अंदर आज स्कूल जाने वाली एक मासूम बच्ची के साथ ऐसे हालात हो गए हैं.
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि गुरुवार को दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद पहली बार इस मामले पर बोले, जबकि यह उनके अपने क्षेत्र जनकपुरी का एक जाना-माना स्कूल है. यह स्कूल उनके घर से दो मिनट की दूरी पर है, इसलिए वे ऐसा नहीं कह सकते कि वे इस स्कूल को नहीं जानते. मार्च में आशीष सूद ने खुद इस स्कूल के अंदर दिल्ली सरकार द्वारा भजन क्लबिंग वाला एक भव्य कार्यक्रम कराया था. हजारों लोग उसमें आए थे. उस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और आशीष सूद दोनों मौजूद थे. ऐसे किसी अनजान स्कूल के अंदर सरकारें सरकारी खर्च से बड़े-बड़े प्रोग्राम नहीं रखा करतीं.
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पांच-सात आदमियों का एक ट्रस्ट होता है जो स्कूल को चलाता है. स्कूलों के ट्रस्ट का खेल यह होता है कि दो ट्रस्टी रिजाइन करते हैं और दो नए आ जाते हैं. फिर दो और रिजाइन करते हैं और दो नए आ जाते हैं. धीरे-धीरे पुराने ट्रस्टी गायब हो जाते हैं और नए ट्रस्टी आ जाते हैं, जिनमें से एक आदमी चेयरमैन बन जाता है. इस तरह 500 करोड़ की संपत्ति कुछ हाथों से दूसरे हाथों में पहुंच जाती है और इसके लिए पैसे का सारा लेनदेन ब्लैक और कैश में होता है. सरकार के पास फाइल है और सब रजिस्ट्रार के पास यह जानकारी जमा करनी पड़ती है कि कौन ट्रस्टी बाहर गया और कौन अंदर आया. जब हमने सब रजिस्ट्रार के पास पता किया, जहां कोई भी व्यक्ति फीस देकर फाइल का इंस्पेक्शन कर सकता है. तो हमें बताया गया कि वह फाइल गायब हो गई है.
सौरभ भारद्वाज ने कुछ कागजात दिखाते हुए कहा कि बीते अप्रैल महीने में फेसबुक पर अमरजीत सिंह बब्बू नामक व्यक्ति ने एक पोस्ट डाली थी. उन्होंने फेसबुक पर लिखा कि स्कूल का ट्रस्टी बनाने पर प्रवेश वर्मा को बहुत-बहुत धन्यवाद. एक आदमी अपने फेसबुक पर दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा को धन्यवाद दे रहा है कि उन्होंने उसे ट्रस्टी बना दिया. सवाल उठता है कि प्रवेश वर्मा का इस ट्रस्ट से क्या लेना-देना है कि वे किसी को ट्रस्टी बना सकते हैं? थोड़ी देर बाद वह फेसबुक पोस्ट डिलीट कर दी गई.
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि वह तीन साल की बच्ची आज भी अस्पताल में है. उसकी मां ने बताया कि वह अभी तक डायपर पहनकर स्कूल जाती थी और खुद टॉयलेट भी नहीं जा पाती थी. घटना वाले दिन भी उसने डायपर पहना हुआ था. ऐसे पापी और राक्षस हैं जिन्होंने उस बच्ची का डायपर हटाकर घिनौना काम किया और पुलिस उसके मां-बाप को धमका रही है. वह बच्ची पिछले 14 दिन से खाना-पीना नहीं कर पा रही है, टॉयलेट नहीं जा पा रही है और उसे उल्टियां लगी हुई हैं. ऐसे में सरकार को पीड़ित परिवार के साथ खड़े होना चाहिए.
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