दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में एक बड़ा हादसा हुआ है जहां एक बहुमंजिला इमारत गिरने की वजह से कई छात्र मलबे में फंस गए हैं. अभी भी रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है और कई लोगों के फंसे होने की आशंका है.
अब जिस सत्य निकेतन में यह हादसा हुआ है, वहां बड़ी संख्या में PG, रेंटेड रूम और हॉस्टल संचालित होते हैं. दरअसल, सत्य निकेतन इलाके को DU साउथ कैंपस के आसपास का एक बड़ा स्टूडेंट हब माना जाता है. यह साउथ-वेस्ट दिल्ली में पड़ता है और धौला कुआं, मोती बाग, आरके पुरम और आनंद निकेतन वाले बेल्ट के काफी करीब है.
कौन-कौन से कॉलेज पास हैं?
यहां श्री वेंकटेश्वर कॉलेज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज, मैत्रेयी कॉलेज, DU South Campus और दुर्गाबाई देशमुख साउथ कैंपस मेट्रो मौजूद हैं. इसी वजह से पूरे इलाके में बड़ी संख्या में छात्रों की आवाजाही और मौजूदगी देखने को मिलती है.
जिस जगह यह हादसा हुआ है, वहां भी धड़ल्ले से PG और रेंटेड रूम संचालित हो रहे थे. इसके अलावा, इसी इलाके में कई और PG और हॉस्टल मौजूद हैं. यानी यह सिर्फ एक सामान्य रिहायशी कॉलोनी नहीं है, बल्कि स्टूडेंट अकोमोडेशन के लिए भी एक बड़ा हब है. अगर इलाके की भौगोलिक स्थिति की बात करें, तो यहां छोटी-छोटी गलियां हैं और घनी आबादी के बीच कई बहुमंजिला मकान मौजूद हैं.
अब यह कोई पहली बार नहीं है जब इस तरह के हादसे हुए हों. राजधानी दिल्ली में कई जगह ऐसे ही पीजी संचालित हो रहे हैं, कई जगह ऊंची-ऊंची इमारतें खड़ी कर दी गई हैं, लेकिन नियमों की अनदेखी रहती है. दिल्ली में नियमों की अनदेशी और प्रशासन की बेरुखी की वजह से पहले भी कई बड़े हादसे हो चुके हैं. कुछ महीने पहले दिल्ली के मालवीय नगर में एक रेस्टोरेंट में लगी भीषण आग ने भयावह रूप ले लिया था और कई लोगों ने अपनी जान गंवाई थी.
अब सत्य निकेतन मामले में भी पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. किस वजह से यह बिल्डिंग भरभरा कर गिर गई, अभी स्पष्ट नहीं. लेकिन हर पहलू से जांच की जा रही है. पता तो यह भी चला है कि पिछले साल इस बिल्डिंग को एक बार दिल्ली पुलिस ने बंद करवा दिया था, वहां संचालित हो रहे पीजी को भी बंद करवाया गया था. लेकिन कुछ महीने पहले फिर वहां पर पीजी शुरू हो गया. अब यह कैसे हुआ, किसने परमीशन दी, इन्हीं पहलुओं पर जांज की जा रही है.
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