सरकारी स्कूलों में बच्चों को सरस्वती वंदना, गायत्री मंत्र और गुरु मंत्र को गाने के लिए विवश नहीं किया जा सकता. छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से गायत्री मंत्र और सरस्वती वंदना गाए जाने को अनिवार्य किए जाने के फैसले पर यह बात कही है. जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की बेंच में राज्य सरकार ने यह भी कहा कि जून की शुरुआत में ही इस संबंध में सर्कुलर जारी किया गया था, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है. सरकार के इस बयान के बाद अदालत ने मामले को समाप्त कर दिया. इसके साथ ही याचिकाकर्ताओं को छूट दी कि यदि भविष्य में किसी बच्चे को हिंदू प्रार्थना गाने के लिए विवश किया जाता है तो वे अदालत आ सकते हैं.
बार ऐंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने कहा कि यदि किसी पर दबाव बनाने की बात सामने आई तो फिर उचित कार्रवाई की जाएगी. अदालत में यह अर्जी छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन अब्दुल सलाम रिजवी, अल्पसंख्यक विभाग के पूर्व चेयरमैन महेंद्र छाबड़ा और बिलासपुर के एक्टिविस्ट शफीक अहमद की ओर से दायर की गई थी. इन लोगों ने राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से जारी सर्कुलर की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाया था. सर्कुलर में कहा गया था कि राज्य में चलने वाले सभी सरकारी स्कूलों में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, गायत्री मंत्र, सरस्वती वंदना और गुरु मंत्रा का गायन अनिवार्य होगा.
इसके अलावा आदेश में यह भी कहा गया था कि मिड-डे मील से पहले भोजन मंत्र होना चाहिए. वहीं देश के नायकों के बारे में भी उन्हें बताना चाहिए. इस आदेश को याचियों ने यह कहते हुए चुनौती दी थी कि ऐसा फैसला सेकुलरिज्म के खिलाफ है. संविधान के मूल अधिकारों के भी यह खिलाफ है. याचिका में कहा गया, 'सरस्वती वंदना, गायत्री मंत्र, गुरु मंत्र और शांति मंत्र एक प्रकार से धार्मिक प्रकृति के हैं. सरकारी स्कूलों में एक धर्म विशेष को बढ़ावा देने जैसा है. इसलिए यह आदेश असंवैधानिक है.' याचिका में कहा गया कि इस सर्कुलर में उन लोगों के लिए कुछ नहीं कहा गया है, जो इनका गायन नहीं करना चाहते.
याचिकाकर्ता का कहना था कि इस सर्कुलर में उन लोगों के बारे में कुछ नहीं कहा गया है, जो इन्हें गाना नहीं चाहते. यह भी नहीं बताया गया कि उन्हें छूट मिलती है या नहीं. यदि वे अपनी धार्मिक मान्यता के अनुसार इन्हें नहीं गाना चाहते तो कैसे उनके इस अधिकार की रक्षा की जाएगी. याचिका का कहना था कि सरकार मानती है कि स्कूलों में किसी एक धर्म को थोपा नहीं जा सकता. ऐसे में यह आदेश उस नीति का भी उल्लंघन है.
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