
नई दिल्ली:
नौसेना प्रमुख एडमिरल रोबिन धोवन ने कहा है कि स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी अरिहंत के परीक्षणों से वह बेहद संतुष्ट हैं। धोवन नेवल वैमानिकी पर सेमिनार के दौरान मीडिया से बात कर रहे थे।
धोवन ने कहा कि अरिहंत पनडुब्बी के साथ कोई समस्या नहीं है, उसके ट्रायल जारी हैं, लेकिन मैं कोई समय सीमा नहीं दे सकता। हालांकि भारत की नीति पहले परमाणु हथियार इस्तेमाल न करने की है, लेकिन अरिहंत भारत के लिए काफी कारगर परमाणु पनडुब्बी होगी। भारत की समुद्री सीमाओं में गश्ती के लिहाज से अरिहंत की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। दुश्मन की ओर से परमाणु हमला होने की सूरत में एक परमाणु पनडुब्बी जवाब देने के लिए बेहद सक्षम और कारगर हथियार होती है।
360 फीट लंबी और 44 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाली अरिहंत समुद्र में छिपी रहकर महज़ कुछ सेंकेड्स में ही हमला कर सकती है। इतना ही नहीं अरिहंत जैसी परमाणु पनडुब्बी किसी परम्परागत पनडुब्बी के उलट लगातार दो महीने तक पानी में बने रह सकती हैं। अरिहंत का रिएक्टर भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र में रूस की मदद से बना है।
इस परमाणु पनडुब्बी के समुद्री-ट्रायल बीते साल दिसंबर में शुरू हुए थे और अभी कुछ और महीनों तक जारी रहेंगे। उम्मीद है कि नौसेना के बेड़े में अरिहंत 2016 तक शामिल हो पाएगी।
नौसेनाध्यक्ष धोवन ने यह भी बताया कि, नौसेना अपनी वैमानिक क्षमताओं को बढ़ाने की योजना पर तेज़ी से काम कर रही है। चाहे एयरक्राफ्ट कैरियर हो या फिर लंबी, मध्यम और क़रीबी निगरानी रखने वाले वायुयान, हेलिकॉप्टर या फिर वक़्त रहते सूचना देने के उपकरण... सभी पर संतोषजनक तरीक़े से काम चल रहा है।
धोवन ने कहा कि अरिहंत पनडुब्बी के साथ कोई समस्या नहीं है, उसके ट्रायल जारी हैं, लेकिन मैं कोई समय सीमा नहीं दे सकता। हालांकि भारत की नीति पहले परमाणु हथियार इस्तेमाल न करने की है, लेकिन अरिहंत भारत के लिए काफी कारगर परमाणु पनडुब्बी होगी। भारत की समुद्री सीमाओं में गश्ती के लिहाज से अरिहंत की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। दुश्मन की ओर से परमाणु हमला होने की सूरत में एक परमाणु पनडुब्बी जवाब देने के लिए बेहद सक्षम और कारगर हथियार होती है।
360 फीट लंबी और 44 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाली अरिहंत समुद्र में छिपी रहकर महज़ कुछ सेंकेड्स में ही हमला कर सकती है। इतना ही नहीं अरिहंत जैसी परमाणु पनडुब्बी किसी परम्परागत पनडुब्बी के उलट लगातार दो महीने तक पानी में बने रह सकती हैं। अरिहंत का रिएक्टर भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र में रूस की मदद से बना है।
इस परमाणु पनडुब्बी के समुद्री-ट्रायल बीते साल दिसंबर में शुरू हुए थे और अभी कुछ और महीनों तक जारी रहेंगे। उम्मीद है कि नौसेना के बेड़े में अरिहंत 2016 तक शामिल हो पाएगी।
नौसेनाध्यक्ष धोवन ने यह भी बताया कि, नौसेना अपनी वैमानिक क्षमताओं को बढ़ाने की योजना पर तेज़ी से काम कर रही है। चाहे एयरक्राफ्ट कैरियर हो या फिर लंबी, मध्यम और क़रीबी निगरानी रखने वाले वायुयान, हेलिकॉप्टर या फिर वक़्त रहते सूचना देने के उपकरण... सभी पर संतोषजनक तरीक़े से काम चल रहा है।
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