- पिंक बस सेवा में अब पूरी तरह महिलाएं ड्राइवर और कंडक्टर के रूप में कार्य करेंगी, पुरुष ड्राइवर नहीं होंगे
- वर्तमान में छह महिला ड्राइवर प्रशिक्षण ले रही हैं, जो महादलित समुदाय से आती हैं और उनकी उम्र 21 से 22 वर्ष है
- बेबी, आरती, गायत्री, सावित्री, रागिनी और अनिता पहली बार पिंक बसों को चलाने के लिए तैयार हो रही हैं
बिहार में पिंक बसों का संचालन पूरी तरह महिलाएं ही करेंगी. अब महिला ड्राइवर भी तैयार हो रही हैं. गणतंत्र दिवस पर वे झांकी का भी हिस्सा बनेंगी. पहले चरण में 6 महिला ड्राइवर ट्रेनिंग ले रही हैं. यह सभी समाज में सबसे पिछड़े महादलित समुदाय से आती हैं. फिलहाल वे पटना के परिवहन कार्यालय में 26 जनवरी के कार्यक्रम में हिस्सा लेने की तैयारियों में जुटी हैं. दरअसल, परिवहन विभाग ने पिछले साल मई में पिंक बस सेवा की शुरुआत की. तब यह सोचा गया था कि इसमें ड्राइवर, कंडक्टर सभी महिलाएं ही होंगी.
पुरुष ड्राइवर ही अब तक करते रहे हैं संचालन
हालांकि विभाग को कंडक्टर तो मिल गईं लेकिन महिला ड्राइवर नहीं मिल पाईं. अभी 100 पिंक बसें चल रही हैं लेकिन इनमें ड्राइवर पुरुष ही हैं. हालांकि अब विभाग ड्राइवर प्रशिक्षण संस्थान के साथ मिलकर महिलाओं को तैयार कर रहा है. बेबी, आरती, गायत्री, सावित्री, रागिनी और अनिता पहले चरण में बस ड्राइवर के रूप में उतरेंगी. पुरुषों के दबदबे वाले इस काम में उनकी एंट्री इतनी आसान नहीं थी, लेकिन संघर्ष और इच्छा शक्ति के कारण अब यह महिलाएं बस के स्टीयरिंग को अपने हाथ में ले रही हैं.
21 - 22 साल है उम्र
इन सबकी उम्र 21 - 22 साल है. इनमें बेबी कुमारी कद में सबसे छोटी हैं. वे बताती हैं कि उनके हाइट के कारण अक्सर लोग उनका मजाक बनाते थे. जब वे ट्रेनिंग के लिए पहुंची तो लोग कहते थे कि तुम्हारा पांव सीट से एक्सीलरेटर तक नहीं पहुंचेगा. तुम कैसे गाड़ी चलाओगे? लेकिन बेबी ने इन तानों को हौसले में बदला. उन्हें सायकिल चलाना नहीं आता लेकिन बस को वे आसानी से दाहिने, बाएं मोड़ पा लेती हों, जैसे यह अब उनके लिए किसी खेल जैसा हो. बेबी अपने घर की इकलौती सदस्य हैं जिन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उनके दोनों भाई और पिता मजदूरी करते हैं लेकिन बेबी SDM बनना चाहती हैं. वे BPSC की परीक्षा दे रही हैं.
इन 6 लड़कियों में सरस्वती और अनिता शादीशुदा हैं. अनीता बिहार पुलिस भर्ती की तैयारी कर रही हैं. वे बिहार पुलिस में ड्राइवर के लिए आयोजित परीक्षा पास कर चुकी हैं. फिजिकल टेस्ट क्लियर होने का इंतजार है. वे बताती हैं कि शादी के बाद रिश्तेदार सास, ससुर को मना करते थे. वे कहते कि शादीशुदा लड़की को इतने दिन तक बाहर भेजना ठीक नहीं. लेकिन हमने परिवार को तैयार किया, मनाया और अब यहां तक आए हैं.
21 हजार रुपए मिलेंगे वेतन
इन लड़कियों को प्रशिक्षण पूरा होने के बाद बस चलाने के लिए उतारा जाएगा. इन्हें वेतन के रूप में 21 हजार रुपए मिलेंगे. उससे पहले 26 जनवरी को यह लड़कियां गांधी मैदान में बस चलाते हुए दिखेंगी. विभाग के मंत्री श्रवण कुमार कहते हैं कि हमें सवा दो सौ से अधिक महिला ड्राइवर की आवश्यकता है. हमने तय किया है कि जो भी महिला प्रशिक्षण लेना चाहेंगी, उन्हें निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं