राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की मीटिंग में महासचिव चंपत राय का इस्तीफा मंजूर हो गया है. बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा शामिल नहीं थे और उन्हें दूर ही रखा गया. वहीं इस मीटिंग में शामिल अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास और कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी समेत ज्यादातर लोग भावुक नजर आए. कई लोगों ने कहा कि चढ़ावा चोरी के मामले ने कलंक लगा दिया है. संत समाज से जुड़े सदस्यों ने कहा कि यह बड़ा पाप हुआ है और भक्तों के बीच राम मंदिर ट्रस्ट का भरोसा कायम करना होगा. महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि हम लोगों ने राम मंदिर के लिए अपना पूरा जीवन दे दिया. वहीं स्वामी विश्वप्रशन्नतीर्थ ने कहा कि ये कलंक लगा है.
ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने कहा कि गड़बड़ी करने वालों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए. जानकारी मिली है कि इस पूरे मामले के एक अन्य आरोपी गोपाल राव भी बैठक में पहुंचे थे, लेकिन उन्हें बाहर भेज दिया गया. ऐसा इसलिए क्योंकि वह ट्रस्ट के नियमित सदस्य नहीं हैं. उनकी भूमिका विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर ही है. बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा की भूमिका पर सदस्यों ने नाराज़गी जताई. कई लोगों ने कहा कि इस मामले में लापरवाही हुई है. अन्यथा ऐसा होने की कोई संभावना नहीं थी.
चंपत राय की भूमिका को लेकर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि चढ़ावा चोरी का मास्टरमाइंड जिस टिन्नू यादव को बताया जा रहा है, वह उनका ड्राइवर था. इसके अलावा चंपत राय खुद अयोध्या में ही रहते थे और उनकी निगरानी में ही सारा कामकाज होता था. भले ही वह किसी भी काम में सीधे तौर पर शामिल नहीं थे, लेकिन यदि व्यवस्था में कोई चूक है तो जिम्मेदारी उनकी ही है, ऐसा कई लोगों ने कहा.
इस बीच पूरी संभावना है कि चंपत राय की जगह पर विश्व हिंदू परिषद के नेता बजरंग लाल बागड़ा को महासचिव बनाया जा सकता है. वह फिलहाल विश्व हिंदू परिषद के महामंत्री हैं. इससे पहले वह सरकारी नवरत्न कंपनी नाल्को के सीएमडी रहे थे. उन्होंने वीआरएस लेकर विश्व हिंदू परिषद में काम करना शुरू किया था. हालांकि खबर यह भी है कि चंपत राय की जगह पर नए महासचिव का ऐलान तुरंत नहीं होगा और इस फैसले को एक से दो सप्ताह के अंदर लिया जाएगा.
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