राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में विशेष जांच दल (SIT) एक बार फिर अयोध्या पहुंची है. SIT की टीम ने अयोध्या पहुंच कर सबसे पहले ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा और मंदिर के व्यवस्थापक गोपाल राव इस मामले में पूछताछ के लिए बुलाया. गोपाल राव से लगभग पांच घंटे की पूछताछ की गई है. शुक्रवार सुबह अनिल मिश्रा और गोपाल राव को फिर से पूछताछ में शामिल होने को कहा गया है. साथ ही उन्हें अपने साथ कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी लेकर आने के लिए कहा गया है. आपको बता दें कि SIT की पहली बार जांच के बाद आठ आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई थी. फिलहाल इस मामले में सभी आरोपी जेल में हैं. सूत्रों के अनुसार गोपाल राव पिछले हफ्ते कर्नाटक गए थे. SIT के दोबारा आने के पहले ही अयोध्या आकर पुनः मंदिर व्यवस्था में अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.
अनिम मिश्रा के पास थी सुप्रीम पावर
अभी तक की जांच में इस मामले में कई बड़े खुलासे हुए हैं. राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने चंदा चोरी के आरोपी अनिल मिश्रा को सुप्रीम पावर दी थी.मार्च 2025 में ट्रस्ट ने कैश काउंटिंग के लिए 10 नए लोगों की भर्ती की थी. चंपत राय ने इन सभी को अनिल मिश्रा के पास भेजा था. अनिल मिश्रा ने उनका इंटरव्यू लिया और उन्हें काम पर रखा. इसके बाद 2 मार्च को चंपत राय ने सभी उम्मीदवारों को बुलाकर अनिल मिश्रा से मिलने के लिए कहा.
4 मार्च को सभी उम्मीदवार अनिल मिश्रा से मिले. 6 मार्च 2025 को 10 लोगों की नियुक्ति हुई और सभी ने काम शुरू कर दिया. शुरुआत में किसी का आई-कार्ड नहीं बना था. ट्रस्ट की ओर से एक ड्यूटी शीट दी गई थी, जिसे दिखाकर मंदिर परिसर में प्रवेश मिल जाता था.सभी नए कर्मचारियों को ट्रस्ट की ओर से 18,000 रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाता था. ड्यूटी का समय सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक था और दोपहर 1:30 बजे लंच ब्रेक होता था.
कौन अहम किरदार?
टिन्नू यादव मंदिर के एक तरह से सर्वेसर्वा थे और उनकी इच्छा के अनुसार ही काम होता था. सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी और आरोपी सुभाष श्रीवास्तव काउंटिंग प्रक्रिया के इंचार्ज थे. उनकी जिम्मेदारी दान पेटियों से नकदी निकलवाने, उसे काउंटिंग रूम तक पहुंचाने और अंत में एसबीआई को सौंपने तक की थी. सूत्रों के अनुसार, आभूषणों का कभी व्यवस्थित हिसाब-किताब नहीं रखा गया, जिससे उनकी चोरी करना अपेक्षाकृत आसान था.सूत्रों के मुताबिक, फरवरी में ही पहली बार चोरी की जानकारी सामने आ गई थी. काउंटिंग टीम के ही एक सदस्य ने इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव को जाकर बताया था कि काउंटिंग के दौरान पैसे चोरी किए जा रहे हैं. आरोप है कि इस पर सुभाष श्रीवास्तव ने जवाब दिया था कि 'प्रभु देख ही रहे हैं, कौन सा हमारे-आपके घर से जा रहा है.'
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