अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में राजनीतिक बयानबाजी का दौर जारी है. विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर बीजेपी सरकार को घेर रहा है. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव मुखर होकर इस मुद्दे पर बीजेपी पर निशाना साध रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर से चंदा चोरी करके कर्नाटक तक भेजा गया. इस बीच सोशल मीडिया पर समाजवादी पार्टी के सीनियर नेता राम गोपाल यादव का संसद में दिया गया एक बयान जमकर वायरल हो रहा है. उन्होंने संसद में कथित तौर पर रामलला को बाबरी मस्जिद में 'अवैध कब्जेदार' बताया था. यह बयान 21 दिसंबर 1992 का है. आखिर राम गोपाल यादव ने उस दिन संसद में क्या-क्या कहा था? पूरा भाषण यहां जानिए.
सोशल मीडिया पर राम गोपाल यादव का करीब 50 सेकंड का बयान वायरल है. लेकिन उन्होंने 21 दिसंबर 1992 को राज्यसभा में अयोध्या विवाद पर करीब 12 मिनट का भाषण दिया था. संसद के रिकॉर्ड में यह पूरा भाषण दर्ज है.
'यह निश्चित है कि वहां बाबरी मस्जिद थी'
राम गोपाल यादव ने कहा, 'मुझे दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि इस देश में राजनीतिक स्वार्थ के लिए और अलोकप्रियता से बचने के लिए जो तथ्य हैं उनको भी सही तरीके से देश के सम्मुख प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है. अयोध्या में जिस जगह बाबरी मस्जिद थी वह राम जन्मभूमि थी या नहीं यह अनिश्चित है. लेकिन यह निश्चित है कि वहां एक मस्जिद थी. यह भी निश्चित है कि 1949 में एक रात में वहां मूर्तियां रख दी गई थी.
उन्होंने आगे कहा कि प्रश्न यह उठता है कि जिस चीज के बारे में जिन तथ्यों के बारे में अनिश्चितता हो हिन्दुस्तान की सरकार निरन्तर उसको राम जन्म भूमि के नाम से क्यों लिखती आ रही है?
'राम लला मस्जिद में अवैध कब्जेदार'
किसी के घर में दूसरा घुस जाए तो उसको क्या कहते हैं, अनऑथराइज ऑक्यूपेंट (अवैध कब्जेदार), जिन्हें आप राम लला कहते हैं, क्या वह मस्जिद में अवैध कब्जेदार नहीं थे. जो कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए थी, वह नहीं की गई. यह सारी समस्या का मूल कारण है. हटा देना चाहिए था. आप क्यों डरते हैं? आप मस्जिद को मस्जिद नहीं कह सकते, आप जबदस्ती मूर्तियों को हटाने की बात नहीं कह सकते हैं? आप धर्मनिरपेक्षता और सेक्युलरिज्म की बात कहते हैं. मैं आपसे कहता हूं आप सही बात नहीं कह रहे हैं.
'लोग मस्जिद के गुंबद पर चढ़ तो गए लेकिन उतर नहीं सके'
सपा नेता ने आगे कहा, 'उस वक्त मुलायम सिंह सहमत नहीं थे. अगर मुलायम सिंह से केंद्र सरकार ने पूरा सहयोग किया होता तो यह निश्चित था कि जो तब कहा गया था कि बाबरी मस्जिद पर कोई परिंदा पर नहीं मार सकता तो नहीं मार सकता था. फिर भी मुलायम सिंह के चलते जिन्होंने बाबरी मस्जिद को छूने की कोशिश की, वह गुम्बद पर चढ़ तो गये लेकिन उतर नहीं सके. यह रिकार्ड है. इस बात का समाजवादी पार्टी और उसके नेताओं को न कभी अफसोस था, न है और न कभी रहेगा. चाहे उनको मौलाना मुलायम कहें, मुल्ला मुलायम कहें, चाहे हिन्दू मानें या न मानें, चाहे हिन्दू वोट दें या न दें.'
'क्या गृह मंत्री ने निर्देश दिया था कि गोली न चलाई जाए?'
उन्होंने कहा, 'मैं कुछ सुझाव गृह मंत्री जी के सामने रखना चाहूंगा. अगर यह सच मान लिया जाए कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश नहीं दिया था, तो क्या वे अधिकारी इस बात से बच सकते कि राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद 30 घंटे तक उनको किसने रोक रखा था? क्या हिन्दुस्तान के गृह मंत्री का निर्देश था कि गोली न चलाई जाए? यह सारी कारवाई होती रहे. मेक शिफ्ट टेम्पल बन गया ? किस के दौर में बना किस के जमाने में बना? मैं चाहूंगा इसकी जांच होनी चाहिए. मैं यह भी चाहूंगा कि पिछले 16 महीने के शासन के दौरान उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने जिस तरह से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ताओं को पुलिस में और अन्य जगहों में भर्ती किया है जो आगे चल कर देश की साम्प्रदायिक एकता के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं, उनकी जांच होनी चाहिए.
उन्होंने आगे कहा कि उन अधिकारियों की जांच होनी चाहिए जिनका बैकग्रांऊंड भी आरएसएस का है. अगर ऐसा नहीं होता है तो निश्चत रूप से यह देश के लिए घातक होगा. ऐसा नहीं है कि जो पुलिस पर आरोप लगता है सारे पुलिस वाले इस तरह के हों ऐसा नहीं है कि सारी पीएसी इस तरह की है. इसी पुलिस और पीएसी ने 1990 में बाबरी मस्जिद की रक्षा की थी. अगर नेतृत्व गलत होगा, लीड करने वाला गलत होगा तो उसी दिशा में लोग चलेंगे.
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