- राजस्थान की पचपदरा रिफाइनरी की तकनीक गाढ़ा कच्चा तेल आसानी से करेगा पतला.
- राजस्थान का बाड़मेर में हैं कच्चे तेल के 550 कुएं. इन कुओं का तेल होगा रिफाइनरी में सप्लाई.
- पचपदरा रिफाइनरी से स्थानीय स्तर पर मिलेगा लोगों को रोजगार.
राजस्थान के बाड़मेर और सांचौर बेसिन में कच्चे तेल के 550 कुएं हैं. जिनका भारत के घरेलू तेल उत्पादन में करीब 25 फीसदी हिस्सा है. जो एक बड़ा नेचुरल रिसोर्स माना जाता है. इस कच्चे के तेल के सबसे बड़े उत्पादक मंगला, भाग्यम और ऐश्वर्या हैं. 550 कुओं का यह विशाल नेटवर्क अब सीधे बालोतरा जिले में स्थापित की जा रही अत्याधुनिक पचपदरा रिफाइनरी से कनेक्ट होने जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 जुलाई को इसका उद्घाटन कर दिया है. यह भारत की पहली ग्रीनफील्ड इंटीग्रेटेड रिफाइनरी-कम-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स है. जिसमें कच्चे तेल को उच्च गुणवत्ता वाले तेल में बनाने के लिए तैयार किया गया है. ताकि भारत में पेट्रोकेमिकल उद्योगों को बढ़ावा दिया जा सके. ऐसे में राजस्थान को तो इसका लाभ होगा ही साथ ही देश में तेल की सप्लाई भी तेज होगी.
तेल के 550 कुओं का पचपदरा रिफाइनरी से कनेक्शन
बाड़मेर जिले के रेगिस्तान में स्थापित कच्चे तेल के यह 550 से ज्यादा कुओं से कच्चा तेल निकाला जाता है. लेकिन यहां का कच्चा तेल काफी गाढ़ा होता है. ऐसे में इस तेल को रिफाइनरी तक पहुंचाने के लिए खास पाइपलाइन नेटवर्क को हाई-टेक हीटिंग सिस्टम से तैयार किया गया है. जिसमें 12 इंच व्यास (डायमीटर) वाली 73 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछी है. पचपदरा रिफाइनरी की आधुनिक इकाइयां इस विशिष्ट कच्चे तेल को बीएस-व्ही आई मानक के पेट्रोल, डीजल और अन्य मूल्यवान पेट्रोकेमिकल उत्पादों में बदलने के लिए पूरी तरह तैयार की गई हैं. यानि कच्चे तेल को उच्च गुणवत्ता के पेट्रोल और डीजल में बदला जाएगा.

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अब तक गुजरात भेजा जाता था तेल
दरअसल, अब तक मंगला, भाग्यम और ऐश्वर्या फील्ड्स के 550 कुओं से निकलने वाला कच्चा तेल दुनिया की सबसे लंबी इंसुलेटेड हीटेड पाइपलाइन के जरिए गुजरात की सलाया और अन्य रिफाइनरियों में भेजा जाता था. लेकिन अब पचपदरा रिफाइनरी शुरू होने से यह कच्चा तेल सीधे यहां भेजा जाएगा. यह रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स (HPCL) और राजस्थान सरकार का संयुक्त उपक्रम है. जो साला 9 मिलियन टन कच्चे तेल को प्रोसेस करने की क्षमता रखता है, जिसमें स्थानीय क्रूड की भूमिका सबसे अहम होगी.
राजस्थान के लिए गेम-चेंजर होगा तेल का यह कनेक्शन
राजस्थान के बाड़मेर बेसिन से निकलने वाला कच्चा तेल अब आसानी से पचपदरा रिफाइनरी तक आ सकेगा. इसे सीधा पाइप लाइन के जरिए भेजा जाएगा. इससे कच्चे तेल के ट्रांसपोर्टेशन का खर्च भी कम होगा. क्योंकि ट्रेन और ट्रक टैंकर से तेल को भेजने में ट्रांसपोर्टेशन का खर्चा बढ़ जाता है. इस तेल कनेक्शन और रिफाइनरी परिसर के कारण मारवाड़ क्षेत्र में बड़े पैमाने पर 'पेट्रोकेमिकल डाउनस्ट्रीम इंडस्ट्रीज'जिसमें प्लास्टिक, टेक्सटाइल और केमिकल उद्योग का जाल बिछ रहा है. जिससे स्थानीय स्तर पर लाखों लोगों को रोजगार भी मिलेगा. बाड़मेर के कुओं से पचपदरा रिफाइनरी तक का यह सफर भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में भी मजबूत करेगी.
क्यों खास है पचपदरा रिफाइनरी
रिफाइनरी के एक पेट्रोकेमिकल एक्सपर्ट ने NDTV को बताया कि यह रिफाइनरी खास तौर पर लगभग 27 API वाले कच्चे तेल के लिए डिजाइन की गई है. थोड़ी प्रोसेसिंग करके हम किसी भी तरह के कच्चे तेल को रिफाइन कर उच्च गुणवत्ता वाले तेल में बदल सकते हैं. यह प्लानिंग का हिस्सा है. हमें जैसा कच्चा तेल मिलता है, हम उसी के हिसाब से योजना बनाते हैं और उसे अच्छे तेल में बदल देते हैं. उन्होंने बताया कि इस रिफाइनरी में एक पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स भी है, जो इसे भारत की अपनी तरह की पहली रिफाइनरी बनाता है. यहां पॉलीइथिलीन, पॉलीप्रोपाइलीन, बेंजीन, ब्यूटाडाइन वगैरह जैसे पेट्रोकेमिकल बाय-प्रोडक्ट्स का लगभग 26 प्रतिशत प्रोडक्शन होगा. यही बात इस रिफाइनरी को बहुत कुशल और कीमती बनाती है.
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