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फ्लावर के फायर बनते ही ‘पुष्पा’ का सरेंडर, जहांगीर आखिर क्यों गए डर?

फाल्टा सीट पर पुनर्मतदान से पहले TMC उम्मीदवार जहांगीर खान के अचानक चुनाव से हटने से सियासत गरमा गई है. 'पुष्पा' स्टाइल में चुनौती देने वाले खान के इस फैसले पर विपक्ष ने इसे दबाव में लिया गया 'सरेंडर' बताया और 'डायमंड हार्बर मॉडल' पर सवाल खड़े किए हैं.

फ्लावर के फायर बनते ही ‘पुष्पा’ का सरेंडर, जहांगीर आखिर क्यों गए डर?
फाल्टा से TMC उम्मीदवार जहांगीर खान.
  • फाल्टा विधानसभा सीट पर टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली
  • भाजपा ने जहांगीर के हटने को जनता की जीत बताया, पार्टी बोली-फाल्टा में दबाव और डर की राजनीति को नकारा गया
  • जहांगीर खान ने गिरफ्तारी की आशंका जताकर हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दी
कोलकाता:

पश्चिम बंगाल की राजनीति में जिस 'डायमंड हार्बर मॉडल' का जोर‑शोर से जिक्र हो रहा था, अब उसी मॉडल पर सवाल उठने लगे हैं. इसकी वजह बने हैं फाल्टा सीट से टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान. यह वही जहांगीर खान हैं, जिन्होंने चुनावी रैलियों में 'पुष्पा स्टाइल' दिखाते हुए दावा किया था, 'मैं झुकेगा नहीं…' लेकिन अब उसी जहांगीर खान ने घुटने टेक दिए हैं. यानि जहांगीर के ही शब्दों में कहें तो फ्लावर के फायर बनते ही पुष्पा ने सरेंडर कर दिया. दरअसल, यहां 'फ्लावर' का सीधा मतलब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के चुनाव चिह्न 'कमल का फूल' से है. पश्चिम बंगाल की चुनावी तपिश में जैसे ही भाजपा का यह 'कमल का फूल' आक्रामक होकर 'फायर' बना, वैसे ही खुद को बाहुबली समझने वाले 'पुष्पा' यानी जहांगीर खान ने मैदान छोड़ दिया.

48 घंटे पहले मैदान छोड़ने से हड़कंप

फाल्टा विधानसभा सीट पर 21 मई को पुनर्मतदान होना था, लेकिन वोटिंग से ठीक 48 घंटे पहले जहांगीर खान ने अपनी उम्मीदवारी वापस लेने का ऐलान कर दिया. यह वही सीट है जहां पहले चरण के मतदान के दौरान हिंसा, बूथ कब्जाने और वोटरों को डराने के गंभीर आरोप लगे थे. हालात को देखते हुए चुनाव आयोग ने सभी बूथों पर मतदान रद्द कर दोबारा चुनाव का फैसला किया था.

‘डायमंड हार्बर मॉडल' पर सियासी घेरा

अब पुनर्मतदान से ठीक पहले उम्मीदवार का हटना सिर्फ एक राजनीतिक घटनाक्रम नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे टीएमसी के कथित 'डायमंड हार्बर मॉडल' की कसौटी के तौर पर देखा जा रहा है. विपक्ष का दावा है कि जिस मॉडल को टीएमसी अपनी सबसे मजबूत राजनीतिक रणनीति बताती थी, वही दबाव में कमजोर पड़ता दिख रहा है.

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जहांगीर का बयान और बढ़ी सियासत

जहांगीर खान ने अपने फैसले को 'शांति और विकास' से जोड़ा और खुद को 'फाल्टा का बेटा' बताया. उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इलाके के लिए पैकेज देने का वादा किया है, इसलिए वह चुनाव से हट रहे हैं. इस बयान ने राजनीतिक हलकों में और हलचल बढ़ा दी. सोशल मीडिया पर तंज हुए,  'पुष्पा अब सिस्टम के साथ है!'

BJP का पलटवार- ‘जनता की जीत'

बीजेपी ने इस पूरे घटनाक्रम को जनता की जीत बताया है. पार्टी नेताओं का कहना है कि फाल्टा में लोगों ने डर और दबाव की राजनीति को नकार दिया. उनके मुताबिक पुनर्मतदान के फैसले के बाद ही साफ हो गया था कि माहौल बदल चुका है.

हाई-वोल्टेज सीट बनी फाल्टा

पिछले कुछ हफ्तों में फाल्टा बंगाल की सबसे चर्चित सीट बन गई थी. बूथ हिंसा के आरोप, 'डायमंड हार्बर मॉडल' पर घमासान, चुनाव आयोग की सख्ती और आईपीएस अजय पाल शर्मा की तैनाती जैसे कदमों ने इस सीट को हाई‑वोल्टेज बना दिया था.

TMC का बयान: ‘व्यक्तिगत फैसला'

टीएमसी ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर साफ किया कि जहांगीर खान का चुनाव न लड़ने का फैसला उनका व्यक्तिगत निर्णय है, पार्टी का नहीं. पार्टी ने आरोप लगाया कि 4 मई को चुनाव परिणाम आने के बाद से फाल्टा क्षेत्र में उसके 100 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है.

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TMC के अनुसार, पार्टी कार्यालयों में तोड़फोड़, जबरन कब्जा और डराने‑धमकाने की घटनाएं हुईं, लेकिन चुनाव आयोग ने शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की.

भाजपा पर दबाव की राजनीति का आरोप

टीएमसी ने बीजेपी पर एजेंसियों और प्रशासन के जरिए दबाव बनाने का आरोप लगाया और कहा कि इस माहौल में भी उनके कार्यकर्ता मजबूती से डटे रहे. हालांकि पार्टी ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ लोग दबाव में आकर मैदान से हट गए, जिसकी उसने निंदा की है. टीएमसी ने कहा कि 'बांग्ला विरोधी बीजेपी' के खिलाफ उसकी लड़ाई जारी रहेगी.

कोर्ट पहुंचे थे जहांगीर खान

बता दें कि इससे पहले जहांगीर खान ने अपनी गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दायर की थी. जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए मामले की सुनवाई तय की है. खान ने अपनी याचिका में दावा किया कि उनके खिलाफ झूठे मामलों के तहत एफआईआर दर्ज की गई हैं और उन्होंने कोर्ट से सभी एफआईआर की जानकारी मांगी है.

‘सरेंडर' बन गया सियासी नैरेटिव

अब जबकि टीएमसी उम्मीदवार खुद मैदान छोड़ चुके हैं, विपक्ष इसे राजनीतिक सरेंडर और मॉडल की हार बताने में जुटा है. फिलहाल, फाल्टा सीट ने बंगाल की राजनीति को एक नया जुमला जरूर दे दिया है, 'झुक गया पुष्पा!'

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