- पंजाब के 5 जिलों में पराली जलाने की कुल 405 घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें से 183 मामलों की मौके पर जांच नहीं की गई.
- केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 10 नवंबर तक जवाब मांगा है
- दिल्ली का 24 घंटे का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स बुधवार को 377 दर्ज किया गया, जो जनवरी के बाद सबसे खराब स्तर है
पंजाब के पांच जिलों में पराली जलाने की 405 घटनाएं दर्ज हुईं, लेकिन इनमें से 183 मामलों की मौके पर जांच ही नहीं की गई. इस पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने बुधवार को जिलों के वरिष्ठ अफसरों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. नोटिस ऐसे समय जारी हुए हैं, जब दिल्ली की हवा 'बहुत खराब' श्रेणी में पहुंच चुकी है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक, बुधवार शाम 4 बजे दिल्ली का 24 घंटे का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 377 दर्ज किया गया. मंगलवार को यह 350 और सोमवार को 324 था. राजधानी में जनवरी के बाद यह सबसे खराब स्तर है.
कहां कितनी घटनाएं, कितनी जांच?
CAQM की समीक्षा के अनुसार, 15 सितंबर से 3 नवंबर तक बठिंडा, बरनाला, फरीदकोट, जालंधर और फाजिल्का में पराली जलाने की कुल 405 घटनाएं दर्ज हुईं. इनमें से सिर्फ 222 की मौके पर जांच हुई. बठिंडा में 148 घटनाएं सामने आईं, लेकिन 68 की जांच हुई. बरनाला में 82 में से सिर्फ 28 मामलों का सत्यापन किया गया. फरीदकोट में 66 में से 49, जालंधर में 57 में से 44 और फाजिल्का में 52 में से 33 घटनाओं की जांच हुई.
आयोग ने बठिंडा, फरीदकोट, फाजिल्का और जालंधर के डिप्टी कमिश्नरों तथा बरनाला के एसएसपी से 10 नवंबर तक स्पष्टीकरण मांगा है. नोटिस में पूछा गया है कि निगरानी और रोकथाम में कथित चूक पर उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए. आयोग ने यह भी पाया कि बठिंडा, बरनाला, फाजिल्का और जालंधर में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ CAQM कानून की धारा 14 के तहत कार्रवाई की जानकारी नहीं दी गई. फरीदकोट में ऐसी तीन अभियोजन कार्रवाइयां दर्ज थीं.
एक दिन में पराली जलाने की 584 घटनाएं, CAQM की बैठक
पंजाब में मंगलवार को पराली जलाने की 584 घटनाएं दर्ज हुईं, जो इस सीजन का सबसे बड़ा एकदिवसीय आंकड़ा है. 15 सितंबर से कुल घटनाएं बढ़कर 2,196 हो गईं. हालांकि पिछले साल इसी अवधि में 2,518 मामले दर्ज किए गए थे. इस बढ़ोतरी के बाद CAQM के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने बुधवार को पंजाब के पर्यावरण और कृषि सचिवों के साथ 12 जिलों के डिप्टी कमिश्नरों और पुलिस प्रमुखों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठक की.
इसमें फिरोजपुर, फरीदकोट, फाजिल्का, जालंधर, बठिंडा, पटियाला, बरनाला, लुधियाना, मलेरकोटला, मोगा, संगरूर और मानसा के अधिकारी शामिल हुए. आयोग ने साफ किया कि निगरानी में ढिलाई या खेतों में आग रोकने में नाकामी पर नोडल अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी. बठिंडा में CAQM की एक उच्चस्तरीय टीम जमीनी हालात भी देख रही है.
हरियाणा का उदाहरण, पावर प्लांटों को चेतावनी
बैठक में हरियाणा का उदाहरण देते हुए पंजाब से बेहतर योजना और पराली प्रबंधन पर जोर देने को कहा गया. आयोग ने स्थानीय समुदाय के नेताओं को जोड़ने, पराली का इस्तेमाल औद्योगिक बॉयलरों में बढ़ाने और ताप बिजलीघरों में कम से कम पांच फीसदी बायोमास पेलेट के इस्तेमाल का लक्ष्य पूरा करने को कहा. लक्ष्य नहीं मानने वाले संयंत्रों पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई. इससे पहले गुरदासपुर और कपूरथला के अधिकारियों को भी नोटिस भेजे गए थे. दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण रोकने के लिए ग्रैप-2 की पाबंदियां लागू हैं. हालांकि, राजधानी की हवा बिगड़ने के पीछे पराली जलाने के साथ वाहनों का धुआं, धूल और मौसम की परिस्थितियां भी जिम्मेदार हैं.
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