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This Article is From Dec 14, 2025

पंजाब: जिला परिषद, पंचायत समिति चुनाव में दोपहर 12 बजे तक 19 प्रतिशत मतदान

तरन तारन के काजी कोट गांव में आम आदमी पार्टी (आप) और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए और एक-दूसरे पर पत्थर फेंके. फिरोजपुर के बेतु कदीम गांव में भी दो गुटों ने एक-दूसरे पर पत्थर फेंके.

पंजाब: जिला परिषद, पंचायत समिति चुनाव में दोपहर 12 बजे तक 19 प्रतिशत मतदान
  • पंजाब में जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव में दोपहर 12 बजे तक लगभग उन्नीस प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था
  • कुल 1.36 करोड़ मतदाता 22 जिला परिषदों और 153 पंचायत समितियों के लिए मतदान करने के पात्र हैं
  • चुनाव के दौरान कई स्थानों पर मतदाता और नेताओं ने मतदान किया, कुछ जगहों पर हिंसा भी हुई.
चंडीगढ़:

पंजाब में रविवार को जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव में दोपहर 12 बजे तक 19 प्रतिशत मतदान हुआ. अधिकारियों ने यह जानकारी दी.
मतदान सुबह आठ बजे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हुआ और यह शाम चार बजे तक जारी रहेगा. मतों की गिनती 17 दिसंबर को होगी. राज्य में 22 जिला परिषदों के 347 जोन और 153 पंचायत समितियों के 2,838 जोन के सदस्यों के चुनाव के लिए मतदान जारी है. कुल 9,000 से अधिक उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं. कुल 1.36 करोड़ मतदाता वोट डालने के पात्र हैं.

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर अपने पोस्ट में मतदाताओं से अपने घरों से निकलने और बड़ी संख्या में मतदान करने की अपील की है. कई मतदाता, विशेषकर बुजुर्ग और महिलाएं अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए सुबह-सुबह विभिन्न मतदान केंद्रों पर पहुंचे.

राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस, कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुद्दियां, विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल, संदीप जाखड़ और पूर्व मंत्री सुरजीत सिंह रखरा सहित कई नेताओं और मंत्रियों ने सुबह ही मतदान कर लिया.

इस बीच, कांग्रेस की पंजाब इकाई के प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा ‘वडिंग' ने आरोप लगाया कि मुक्तसर जिले के गिद्दरबाहा विधानसभा क्षेत्र के बाबानिया गांव में एक मतदान केंद्र पर स्थानीय विधायक के इशारे पर कब्जा कर लिया गया था. उन्होंने दावा किया कि कुछ उपद्रवियों ने मतदान केंद्रों से मतदान एजेंटों को बाहर जाने के लिए कहा और बताया कि उन्होंने इस मामले में मुक्तसर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से बात की है और राज्य निर्वाचन आयोग में शिकायत दर्ज कराई है. वडिंग ने कहा, ‘‘किसी भी प्रकार की गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं की जाएगी.''

तरन तारन के काजी कोट गांव में आम आदमी पार्टी (आप) और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए और एक-दूसरे पर पत्थर फेंके. फिरोजपुर के बेतु कदीम गांव में भी दो गुटों ने एक-दूसरे पर पत्थर फेंके.

अधिकारियों ने बताया कि मतपत्रों में छपाई की त्रुटि पाए जाने के बाद अमृतसर जिले के वरपाल और खासा गांवों में मतदान स्थगित कर दिया गया. पटियाला के समाना निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पांच गांवों - कोटली, भेदपुरी, डोधरा, सहजपुर कलां और सहजपुर खुर्द में ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार किया. उन्होंने विरोध जताया कि इन गांवों को समाणा के बजाय पतरान ब्लॉक में शामिल किया गया है. ग्रामीणों के अनुसार, दोपहर 12 बजे तक इन गांवों में एक भी वोट नहीं डाला गया.

स्थानीय लोगों ने कहा कि अपने गांवों को समाना से पतरान स्थानांतरित करने का निर्णय अस्वीकार्य है क्योंकि समाना शहर भौगोलिक रूप से करीब है जबकि पतरान लगभग 30 किलोमीटर दूर है जिससे नियमित सेवाओं तक पहुंच मुश्किल हो जाती है.

शिअद ने राज्य निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि फतेहगढ़ साहिब में आप के एक उम्मीदवार ने मतदान शुरू होने से लगभग 10 घंटे पहले सोशल मीडिया पर मतपत्रों की तस्वीरें पोस्ट की थीं. पार्टी ने दावा किया कि इन तस्वीरों में स्पष्ट रूप से मुद्रित क्रमांक वाले मतपत्र दिखाई दे रहे हैं और यह आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है. शिअद नेता अर्शदीप सिंह कलेर ने मांग की कि मतदान से पहले उम्मीदवार को मतपत्र कैसे प्राप्त हुए, इसकी गहन और स्वतंत्र जांच की जानी चाहिये.

अधिकारियों ने बताया कि 18,224 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं. स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित कराने के लिए राजपत्रित स्तर के अधिकारियों की देखरेख में लगभग 44,000 पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है. पंजाब राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव पर्यवेक्षकों और पुलिस पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है और इस बात पर जोर दिया है कि वह चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है.

सभी प्रमुख राजनीतिक दलों आप, कांग्रेस, शिअद और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार इन चुनाव में किस्मत आजमा रहे हैं. चुनाव प्रचार के दौरान सत्तारूढ़ ‘आप' ने भगवंत मान सरकार द्वारा किए गए कार्यों के आधार पर वोट मांगे.

चुनाव से पहले विपक्षी दलों ने मान सरकार को निशाना बनाते हुए आरोप लगाया कि वह सरकारी तंत्र का इस्तेमाल कर उनके उम्मीदवारों को नामांकन पत्र दाखिल करने से रोक रही है और उनके नामांकन पत्रों को खारिज करवा रही है.

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