- भारत ने 18 मई 1974 को राजस्थान के पोखरण में पहला सफल परमाणु परीक्षण स्माइलिंग बुद्धा किया था
- परमाणु परीक्षण को डॉ. राजा रमन्ना और एपीजे अब्दुल कलाम जैसे वैज्ञानिकों ने अंजाम दिया
- इस गुप्त मिशन में वैज्ञानिकों ने अमेरिकी सैटेलाइट निगरानी से बचने के लिए कई रणनीतियां अपनाईं
तारीख 18 मई 1974... सुबह के ठीक 8 बजकर 5 मिनट और राजस्थान के रेगिस्तान की छाती को चीरती हुई एक बेहद तेज गड़गड़ाहट. यह महज एक विस्फोट नहीं था बल्कि वो पल था जब भारत ने सुपर पावर बनने की दिशा में पहला कदम रखा. यह वो दिन था जब पूरी दुनिया ने भारत की शक्ति को पहचाना. उस दिन इतिहास के पन्नों पर भारत ने अपनी ताकत की ऐसी इबारत लिखी, जिसने तमाम महाशक्तियों की नींद उड़ा दी.
यह कहानी है भारत के पहले सफल परमाणु परीक्षण 'स्माइलिंग बुद्धा' की. यह परमाणु परीक्षण राजस्थान के पोखरण में हुआ. इस परीक्षण को अंजाम दिया डॉ. राजा रमन्ना और एपीजे अब्दुल कलाम जैसे जांबाज वैज्ञानिकों ने. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की दूरगामी सोच और अडिग फैसले ने इसे मुमकिन बनाया. जब इस धमाके की कामयाबी के बाद डॉ. रमन्ना ने दिल्ली फोन कर पीएम इंदिरा को गुप्त कोड में कहा, 'बुद्ध मुस्कुरा दिए,' तो वह सिर्फ एक संदेश नहीं था, बल्कि दुनिया के नक्शे पर एक नए और आत्मनिर्भर परमाणु-संपन्न भारत के उदय की हुंकार थी. आज इस परमाणु परीक्षण को 52 साल पूरे हो गए हैं और भारत परमाणु शक्ति के क्षेत्र में काफी आगे बढ़ गया है.
बेहद सीक्रेट था पूरा मिशन
भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण ऐसे वक्त में किया जब अमेरिका जैसे सुपर पावर देश ऐसी घटनाओं पर पैनी नजर रख रहे थे. अमेरिकी सीक्रेट एजेंट एक्टिव थे. अमेरिका सैटेलाइट के जरिए पूरी दुनिया पर नजर रख रहा था. ऐसे में पोखरण में खुले रेगिस्तान में महीनों तक इस मिशन को छिपाना लगभग नामुमिकिन था. इस पूरे मिशन को बेहद गोपनीय रखा गया. यह इतना गुप्त था कि तत्कालीन रक्षा मंत्री को भी इसकी भनक परीक्षण से ऐन पहले लगी. वहीं पोखरण में वैज्ञानिक कई महीने तक कैद होकर रहे और दिन रात परीक्षण को अंजाम देने में जुटे रहे.

कैसे पूरा हुआ भारत का पहला परमाणु परीक्षण?
18 मई 1974 को सुबह करीब 7 बजे वैज्ञानिकों की टीम ने पोखरण में बने 107 मीटर गहरे कुएं में परमाणु उपकरण की आखिरी जांच पूरी की. वैज्ञानिकों ने पूरे सिस्टम को बारीकी जांचा ताकि परीक्षण के दौरान किसी कमी की गुंजाइश न रहे. इसके बाद परीक्षण का प्रोसेस शुरू किया गया. सुबह ठीक 8 बजे वैज्ञानिकों और सेना के कमांडरों की मौजूदगी में परमाणु परीक्षण का काउंटडाउन शुरू हुआ. इसके बाद ठीक 8 बजकर 5 मिनट पर बटन दबाते हुए जोरदार विस्फोट हुआ. रेगिस्तान की रेल कई फीट ऊपर उठ गई और परीक्षण वाली जगह विशालकाय गड्ढा बन गया.
जब इंदिरा गांधी को फोन पर कोड में भेजा संदेश
जब वैज्ञानिकों ने परीक्षण सफल होने की पुष्टि की, तो अगला काम था देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को इसकी जानकारी देना. दिल्ली में पीएम इंदिरा गांधी भी इसी का इंतजार कर रही थीं. इसी बीच सवा 8 बजे इस परीक्षण को लीड कर रहे डॉ राजा रमन्ना ने इंदिरा गांधी को फोन मिलाया. इस फोन पर महज कुछ शब्दों में ही बात हुई. रमन्ना ने कोड वर्ड में कहा- 'बुद्ध मुस्कुरा दिए.' (स्माइलिंग बुद्धा) इसका मतलब था कि परीक्षण सफल हो गया है. यह शब्द सुनते ही पीएम इंदिरा गांधी के चेहरे पर राहत और गर्म की मुस्कान आ गई.

'बुद्ध मुस्कुरा गए..' यही कीवर्ड क्यों?
जिस दिन यह परमाणु परीक्षण हुआ उस दिन भारत में बुद्ध पूर्णिमा मनाई जा रही थी. देशभर में यहां त्योहार मनाया जा रहा था वहीं भारत के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी इबारत लिख दी, जिसे हमेशा याद किया जाएगा.

परमाणु परीक्षण में थी तीन सबसे बड़ी चुनौतियां
यह परमाणु परीक्षण बेहद चुनौती भरा था. उन दिनों भारत की हर सैन्य और वैज्ञानिक एक्टिविटी पर चीन और अमेरिका जैसे देश नजर रख रहे थे. अमेरिका कभी नहीं चाहता कि भारत न्यूक्लियर पावर बने.
- अमेरिका की सैटेलाइट जासूसी: अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA अपने सैटेलाइट के जरिए भारत की हर एक्टिविटी पर नजर रख रही थी. इससे बचने के लिए भारत के वैज्ञानिकों ने सेना की वर्दी पहनी और मिशन का ज्यादातर काम रात के अंधेरे में किया. इसके अलावा जब अमेरिकी सैटेलाइट भारत के ऊपर आता तो वैज्ञानिक परीक्षण वाली जगह को ढक देते. इस तरह उन्होंने कई दिनों तक अमेरिकी सैटेलाइट को चकमा दिया.
- भीषण गर्मी में मिशन को पूरा करना था मुश्किल: वहीं मई के महीने में राजस्थान के रेगिस्तान में भीषण गर्मी पड़ती है. तापमान 50 डिग्री के आसपास तक पहुंच जाता है. इतने ज्यादा तापमान में संवेदनशील उपकरणों को सुरक्षित रखना और रेत के तूफानों के बीच काम करना एक बेहद मुश्किल काम था. हालांकि वैज्ञानिकों के हौसले और जज्बे ने यह संभव कर दिखाया. इस मिशन में वैज्ञानिकों की भारतीय सेना के कुछ अधिकारियों ने भी मदद की.
- सीमित बजट और संसाधन: जिस वक्त भारत ने इस परमाणु परीक्षण को किया, उस समय देश आर्थिक तंगी और युद्ध के दौर से गुजरा था. वैज्ञानिकों के पास आधुनिक तकनीक नहीं थी, फिर भी उन्होंने स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल कर इस नामुमकिन काम को मुमकिन कर दिखाया.

परमाणु परीक्षण के बाद लगे वैश्विक प्रतिबंध
प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जानती थीं कि इस परमाणु परीक्षण के बाद भारत को कई वैश्विक प्रतिबंधों से गुजरना पड़ेगा. लेकिन वो इसके लिए तैयार थीं. हुआ भी कुछ ऐसा ही. जैसे ही भारत ने परमाणु परीक्षण का ऐलान किया, अमेरिका जैसे देशों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया. अमेरिका और कनाडा सहित कई पश्चिमी देशों ने भारत पर कड़े आर्थिक और तकनीकी प्रतिबंध लगा दिए. वहीं इंदिरा गांधी ने पूरी दुनिया को दो टूक जवाब दिया कि भारत का यह परीक्षण किसी पर हमले के लिए नहीं, बल्कि अपनी सुरक्षा और शांति के लिए है.
स्माइलिंग बुद्धा केवल एक परमाणु परीक्षण नहीं था. यह भारत के न्यूक्लियर ताकत बनने की पहली सीढ़ी थी. इसके बाद 1998 में भारत ने पोखरण-2 मिशन पूरा किया, जिसका नाम ऑपरेशन शक्ति रखा गया. वहीं आज 2026 में भारत दुनिया के सबसे ताकतवर परमाणु शक्ति वाले देशों में शामिल है. भारत अब आसमान, जमीन और समुद्र से ही परमाणु हमले करने की ताकत रखता है. लेकिन यह संभव हो पाया 18 मई 1974 के उस पहले परमाणु परीक्षण से ही.
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