- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्लोवाकिया दौरे पर बिहार-झारखंड के पारंपरिक मिठाई ठेकुआ को उपहार के रूप में दिया.
- ठेकुआ गेहूं के आटे, गुड़, सौंफ और घी से बनाया जाता है और यह छठ पूजा का विशेष प्रसाद है.
- ठेकुआ लंबे समय तक खराब नहीं होता है इसलिए यह यात्रा के दौरान पौष्टिक और टिकाऊ भोजन माना जाता है.
बिहार का स्वाद, महापर्व छठ का प्रसाद और अब दुनिया का पसंदीदा पकवान... जी हां, हमारा 'ठेकुआ' अब पूरी तरह से 'ग्लोबल' हो चुका है. PM मोदी के जरिए इस पारंपरिक मिठास ने यूरोप के देश स्लोवाकिया तक का सफर तय कर लिया है. अपने स्लोवाकिया दौरे पर पीएम मोदी जहां कई कीमती उपहार ले गए थे. वहीं, उन्होंने दुनिया को बिहार-झारखंड की सांस्कृतिक पहचान से रूबरू कराने के लिए खास तौर पर 'ठेकुआ' को भी इन तोहफों की लिस्ट में शामिल किया. इसके साथ ही ठेकुआ ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के पारंपरिक जायके का मान बढ़ा दिया है.
पीएम नरेंद्र मोदी ने स्लोवाकिया के राष्ट्रपति और संसद के स्पीकर को ठेकुआ का तोहफा दिया. ठेकुआ भारत के बिहार और झारखंड राज्यों का एक पारंपरिक मीठा स्नैक भी है, जिसे गेहूं के आटे, गुड़ या चीनी, सौंफ और घी से बनाया जाता है. इसे खास तौर पर त्योहारों, खासकर छठ पूजा के दौरान बनाया जाता है. अपनी आसान सामग्री, लंबे समय तक खराब न होने की खूबी और घर के बने स्वाद के लिए मशहूर ठेकुआ सांस्कृतिक परंपरा, त्योहारों के जश्न और क्षेत्रीय खान-पान की विरासत को दर्शाता है.
उपहारों में बिहार-झारखंड की पहचान ठेकुआ शामिल
पीएम नरेंद्र मोदी ने स्लोवाकिया के राष्ट्रपति और संसद के स्पीकर को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक, शिल्प और ज्ञान परंपरा से जुड़े विशेष उपहार भेंट किए. उपहारों में ब्रास डोकरा एंटेलोप सेट, जीआई-टैग प्राप्त हिमरू सिल्क टाई और पॉकेट स्क्वायर, राजस्थान की पारंपरिक कोथेवा कला से बने कफलिंक्स, आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथ चरक संहिता और सुश्रुत संहिता और बिहार-झारखंड की सांस्कृतिक पहचान ठेकुआ शामिल रहे. ये उपहार भारत की विविध कला, हस्तशिल्प, ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक हैं.
Gift given by PM Modi to Speaker of Slovakia Richard Raši | Thekua is a traditional sweet snack from the Indian states of Bihar and Jharkhand, made using wheat flour, jaggery or sugar, fennel seeds, and ghee. It is especially prepared during festivals, most notably Chhath Puja.… pic.twitter.com/p77Z3GqSiO
— ANI (@ANI) June 19, 2026
'ठेकुआ' कैसे बनता है?
ठेकुआ को तैयार करने के लिए सबसे पहले पिसे गेहूं के आटे में शुद्ध देसी घी मिलाया जाता है, फिर आटे में सौंफ, हरी इलायची पाउडर और सूखा नारियल मिलाया जाता है और फिर गुड़ या चीनी के गाढ़े पानी की मदद से कड़ा आटा गूंथा जाता है. बाद में इसे आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाकर लकड़ी के पारंपरिक सांचे पर रखकर हथेली से दबाया जाता है, जिससे इसपर डिजाइन उभर आते हैं. अंत में कढ़ाई में शुद्ध घी या रिफाइन डालकर बिल्कुल धीमी आंच पर दोनों तरफ से सुनहरा भूरा होने तक तला जाता है. धीमी आंच पर तलने के कारण यह अंदर तक अच्छी तरह पक जाता है और बाहर से एकदम क्रिस्पी बनता है.
पीएम नरेंद्र मोदी ने स्लोवाकिया के राष्ट्रपति और संसद के स्पीकर को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक, शिल्प और ज्ञान परंपरा से जुड़े विशेष उपहार भेंट किए।
— PB-SHABD (@PBSHABD) June 19, 2026
उपहारों में ब्रास डोकरा एंटेलोप सेट, जीआई-टैग प्राप्त हिमरू सिल्क टाई एवं पॉकेट स्क्वायर, राजस्थान की पारंपरिक कोथेवा कला से बने… pic.twitter.com/7GEBtac0f4
दुनिया में क्यों फेमस है बिहार का ठेकुआ
छठ में यह मुख्य महाप्रसाद होता है, जिसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है. इस व्यंजन में गुड़ होता है, जो शरीर में आयरन की कमी पूरी करता है. गेहूं का आटा फाइबर देता है. ठेकुआ की सबसे बड़ी खासियत इसकी लंबी शेल्फ-लाइफ है, जिसके कारण यह बिना फ्रिज या केमिकल के भी महीने भर तक खराब नहीं होता और सफर के लिए एक बेहतरीन पौष्टिक आहार साबित होता है. आमतौर पर बिहार-झारखंड के लोग अपने यात्रा के दौरान ठेकुआ ले जाते हैं.
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