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'ये इमरजेंसी से कम भी नहीं है...', जब आपातकाल को लेकर अखिलेश-रिजिजू में हुई नोकझोंक

लोकसभा में पेपर लीक को रोकने वाले लाए गए बिल पर चर्चा के दौरान अखिलेश यादव और किरेन रिजिजू के बीच इमरजेंसी को लेकर बहस देखने को मिली.

अखिलेश यादव और किरेन रिजिजू.
IANS
नई दिल्ली:

एंटी-पेपर लीक बिल पर मंगलवार को लोकसभा में चर्चा हो रही है. ये बिल 2024 में आए पेपर लीक कानून को और सख्त बनाने के लिए लाया गया है. चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि जब 2024 में कानून आ गया था तो 2026 में पेपर कैसे लीक हो गया?

अखिलेश ने हाल ही में हुए छात्रों के प्रदर्शन पर कहा कि ये पहला आंदोलन था जिसमें मां-बाप ने बच्चों का साथ दिया, क्योंकि पेपर लीक से लोग दुखी हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि जो कानून पहले बनाया गया था, उसी में संशोधन कर लेकर आए हैं. अगर कानून से ही बचा होता तो भाजपा सरकार में 20 परीक्षाओं के पेपर कैसे लीक हो गए?

इमरजेंसी को लेकर रिजिजू-अखिलेश में बहस

अखिलेश यादव का भाषण जब खत्म होने वाला था, तभी संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू खड़े हुए और उन्होंने कहा, 'अखिलेश जी तो समाजवादी हैं. मैं पूछना चाहता हूं कि छात्रों का आंदोलन के बाद सरकार उनकी बात सुनकर पार्लियामेंट में बिल लेकर आता है, या जो आंदोलन होता है, उसको कुचलने के लिए देश में इमरजेंसी लगा देते हैं, वो अच्छा है?'

इस पर अखिलेश ने जवाब देते हुए कहा, 'मैं इमरजेंसी को तो नहीं देखा हूं, लेकिन इमरजेंसी में क्या-क्या हुआ है, वो दिल्ली में देखने को मिल गया. आंसू गैस के गोले और लकड़ी के डंडे में नुकीली चीजें... उस समय करंट नहीं लगाया जाता था, इस समय करंट लगाया गया है. तो ये इमरजेंसी के बराबर ही हमला हुआ है. कम नहीं है. इमरजेंसी से कम अन्याय नहीं कर रहे हैं आप लोग. अगर इमरजेंसी याद आ गई है तो इमरजेंसी के बाद भी परिवर्तन हुआ था और हमें भरोसा है कि इसके बाद भी परिवर्तन होगा.'

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आपको भगवान भी माफ नहीं करेंगेः अखिलेश

अखिलेश यादव ने आगे कहा कि कानून से नहीं, बल्कि नीयत से नीट की परीक्षा साफ होगा. उन्होंने कहा, 'सवाल कानून का नहीं है, आपकी नीयत साफ नहीं है और जब आपकी नीयत साफ होगी तो परीक्षा भी साफ हो जाएगी.'

उन्होंने आगे कहा, 'आज मौका नहीं है लेकिन आपको भगवान भी माफ नहीं करेंगे क्योंकि आप चढ़ावा चोरी में शामिल हुए हैं. और चढ़ावा ही नहीं, गुप्तदान भी चोरी हुआ है और ये पाप की श्रेणी में नहीं आता है, महापाप की श्रेणी में आता है.'

आखिर में अखिलेश ने कहा कि मैं आखिरी में यही कहना चाहता हूं, शिक्षा के लिए जो आंदोलन हुए हैं, वो हमेशा जीतेंगे.

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