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This Article is From Aug 10, 2023

"देश भरोसा रखे, मणिपुर में शांति का सूरज जरूर उगेगा": लोकसभा में बोले पीएम मोदी

लोकसभा में पीएम मोदी ने कहा, "मणिपुर में एक अदालत का फैसला आया. उसके पक्ष-विपक्ष में परिस्थिति बनी और हिंसा का दौर शुरू हुआ. दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार काम कर रही है. देश भरोसा रखे, मणिपुर में शांति का सूरज जरूर उगेगा."

लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर पीएम मोदी का जवाब.
नई दिल्ली:

लोकसभा में विपक्ष की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) पर गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने जवाब दिया. पीएम मोदी ने इस दौरान मणिपुर (Manipur Issue) पर बयान दिया. उन्होंने कहा, "मणिपुर में एक अदालत का फैसला आया. उसके पक्ष-विपक्ष में परिस्थिति बनी और हिंसा का  दौर शुरू हुआ. कई लोगों ने अपनों को खोया, महिलाओं के साथ अपराध हुआ. दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार काम कर रही है. देश भरोसा रखे, मणिपुर में शांति का सूरज जरूर उगेगा. मणिपुर के लोगों से भी कहना चाहता हूं कि देश आपके साथ है, हम आपके साथ हैं." पीएम के भाषण के बाद अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज हो गया.

पीएम मोदी ने मणिपुर पर बोलते हुए विपक्ष पर तंज कसे. उन्होंने कहा कि मणिपुर पर विपक्ष सिर्फ राजनीति कर रहा है. हमने कितनी बार कहा कि मणिपुर पर चर्चा करिए. गृहमंत्री ने स्पीकर को चर्चा के लिए चिट्ठी भी लिखी. लेकिन विपक्ष सिर्फ सुनाने की इच्छा रखता है. सुनने की नहीं. पीएम मोदी के भाषण के बीच विपक्षी नेताओं ने सदन से वॉकआउट किया. उनका कहना था कि मोदी मणिपुर पर नहीं बोल रहे हैं. 

मोदी ने कहा कि लोकतंत्र में जिनका भरोसा नहीं होता है वो सुनाने को तैयार होते हैं लेकिन सुनने को तैयार नहीं होते. वे झूठ फैलाकर भाग जाते हैं. मोदी ने कहा, "अगर विपक्ष ने गृह मंत्री की चर्चा पर सहमति जताई होती, तो मणिपुर पर लंबी चर्चा हो सकती थी. अगर सिर्फ मणिपुर पर चर्चा की बात थी गृहमंत्री ने पत्र लिखकर कहा था लेकिन विपक्ष का इरादा चर्चा का नहीं था. इनके पेट में दर्द था लेकिन फोड़ सिर रहे थे" उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टियां अविश्वास प्रस्ताव पर सभी विषयों पर बोले, हमारा भी दायित्व बनता है कि देश के विश्वास को प्रकट करें और सब चीजों के बारे में बताएं.

इस दौरान पीएम मोदी ने मणिपुर पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा. पीएम ने कहा, "वंदे मातरम गीत ने हिंदुस्तान के हर कोने में चेतना फैलाई, तुष्टिकरण की राजनीति के चलते वंदे मातरम गीत के भी टुकड़े कर दिए. ये लोग भारत तेरे टुकड़े होंगे गैंग को बढ़ावा देने के पहुंच जाते हैं. ये उन लोगों की मदद कर रहे हैं, जो कहते हैं कि सिलिगुड़ी के पास जो कॉरिडोर है, उसे काट दें तो नॉर्थ ईस्ट अलग हो जाएगा. ये उनका समर्थन करते हैं. तमिलनाडु से आगे श्रीलंका से पहले एक टापू किसने किसी दूसरे देश को दिया था, कब दिया था. तब वो मां भारती का अंग नहीं था? इसको भी आपने तोड़ा, कौन था उस समय. श्रीमती इंदिरा गांधी के नेतृत्व में ये हो रहा था. कांग्रेस का इतिहास मां भारती को छिन्न-भिन्न करने का रहा."

देश आपके साथ है-PM
प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं मणिपुर के लोगों, माता, भाइयों, बहनों से कहना चाहूंगा कि देश आपके साथ है. ये सदन आपके साथ है. हम सब मिलकर इस चुनौती का समाधान निकालेंगे. मणिपुर विकास की राह पर आगे बढ़ेगा. मैं लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि आने वाले समय में मणिपुर में शांति बहाल होगी. कांग्रेस पूर्वोत्तर की सभी समस्याओं की जड़ है. पूर्वोत्तर हमारे लिए जिगर का टुकड़ा है. कांग्रेस का इतिहास देश तोड़ने वाला रहा है. कांग्रेस ने मिजोरम में वायुसेना से हमला करवाया था. मणिपुर पर विपक्ष का दर्द और संवेदना सेलेक्टिव है, वे राजनीति से परे सोच ही नहीं पाते.

मिलकर रास्ते निकाले
पीएम मोदी ने कहा, "140 करोड़ देशवासियों के सपनों को अपनी आंखों के सामने रखकर चल रहा हूं. सदन के साथियों से निवेदन है देश में मणिपुर से भी गंभीर समस्याएं आईं, लेकिन मिलकर रास्ते निकाले. मिलकर चलें, मणिपुर को भरोसा देकर चलें, राजनीति के लिए मणिपुर का दुरुपयोग ना करें, दर्द की दवा बनकर काम करें. हमारी तरफ से तो समृद्ध चर्चा हुई. ये प्रस्ताव देश से विश्वासघात का प्रस्ताव है.

मणिपुर हिंसा में अब तक 160 से ज्यादा मौतें
मणिपुर हिंसा में अब तक 160 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें 3-5 मई के बीच 59 लोग, 27 से 29 मई के बीच 28 लोग और 13 जून को 9 लोगों की हत्या हुई थी. 16 जुलाई से लेकर 27 जुलाई तक हिंसा नहीं हुई थी.


कैसे शुरू हुआ विवाद 
मणिपुर की आबादी करीब 38 लाख है. यहां तीन प्रमुख समुदाय हैं- मैतेई, नगा और कुकी. मैतेई ज्यादातर हिंदू हैंमैतेई समुदाय की मांग है कि उन्हें भी जनजाति का दर्जा दिया जाए. समुदाय ने इसके लिए मणिपुर हाईकोर्ट में याचिका लगाई. समुदाय की दलील थी कि 1949 में मणिपुर का भारत में विलय हुआ था. उससे पहले उन्हें जनजाति का ही दर्जा मिला हुआ था. इसके बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से सिफारिश की कि मैतेई को अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल किया जाए. बाकी दोनों जनजाति मैतेई समुदाय को आरक्षण देने के विरोध में हैं. इनका कहना है कि राज्य की 60 में से 40 विधानसभा सीट पहले से मैतेई बहुल इंफाल घाटी में हैं. ऐसे में ST वर्ग में मैतेई को आरक्षण मिलने से उनके अधिकारों का बंटवारा होगा. विवाद और हिंसा इसी को लेकर है.

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