- विपक्ष ने सरकार से साफ कह दिया है कि वह इन बिलों के खिलाफ है.
- सरकार छात्र आंदोलन पर सदन में चर्चा कराने के लिए तैयार है.
- परिसीमन बिल पर भी पूरी तरह से सस्पेंस बना हुआ है.
नई दिल्ली: मॉनसून सत्र का अंतिम सप्ताह है और सोमवार के बाद अब सिर्फ तीन दिन बचे हैं. इन तीन दिनों में सरकार विदेशी अंशदान विधेयक यानि एफसीआरए और परिसीमन बिल पर क्या करने वाली है यह साफ नहीं हो पाया है. विपक्ष ने सरकार से साफ कह दिया है कि वह इन बिलों के खिलाफ है. कांग्रेस के नेता के सी वेणुगोपाल ने साफ कहा है, “लोकसभा अध्यक्ष ने हमने से संपर्क किया था, हमने साफ कह दिया है कि हम एफसीआरए बिल के खिलाफ हैं और इस बिल को संयुक्त संसदीय समिति को भेजे जाने का भी विरोध कर रहे हैं. सरकार इस बिल को वापस ले.”
एफसीआरए बिल का दक्षिण और उत्तर पूर्व के राज्यों के सांसद विरोध कर रहे हैं. सरकार ने इस मामले पर इस बिल से संबंधित कई संस्थाओं और मुख्यमंत्रियों से भी बात की है. हालांकि, अभी तक आम सहमति नहीं बन पाई है. वहीं, दूसरा महत्वपूर्ण बिल है परिसीमन का, जिसे सरकार पास तो कराना चाहती है, लेकिन उनके पास इसको पास कराने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है.
चूंकि यह संविधान संशोधन विधेयक है, इसलिए इसको पास कराने के लिए सरकार को दो तिहाई बहुमत चाहिए. इस बिल को पास कराने के लिए डीएमके का सरकार के पक्ष में वोट करना जरूरी है. उसके बिना यह बिल लोकसभा से पारित नहीं हो पाएगा. इस बिल पर डीएमके के राज्य सभा में नेता त्रिचि शिवा ने साफ करते हुए कहा, “इस बिल पर हमारे रुख को लेकर कई तरह की बातें कही जा रही है, इसलिए मैं आपसे साफ कर देना चाहता हूं कि हमारे रुख में कोई बदलाव नहीं हुआ है. सरकार से हमारी कोई बात नहीं हुई है. हमारा रुख वही है जो हमने स्टालिन के मुख्यमंत्री रहते दक्षिण राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में लिया था. हम इस बिल में किसी भी किसी भी तरह के बदलाव का समर्थन नहीं करेंगे, जिससे दक्षिण के राज्यों के हित का नुकसान होता हो.”
सरकार ने कहा- सदन में चर्चा के लिए तैयार हैं
अब सरकार ने विपक्ष के पास हाथ बढ़ाते हुए कहा है कि सरकार छात्र आंदोलन पर सदन में चर्चा कराने के लिए तैयार है. गृहमंत्री हर चीज का जवाब देने के लिए तैयार हैं, बर्शते सदन की कार्यवाही शांतिपूर्ण ढंग से चले. लेकिन अभी भी विपक्ष सदन अपनी बात पर अड़ा है कि राम मंदिर में चंदा चोरी पर बहस होनी चाहिए, जिस पर सरकार का जवाब है कि चूंकि इस पर सरकार ने एक एसआईटी गठित कर रखी है, जिसकी वजह से इस पर सदन में चर्चा नहीं हो सकती.
कुल मिलाकर सदन चले या नहीं, इस पर सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध बना हुआ है. हालांकि, सरकार इसी शोरगुल में अपने बिल भी पास करा ले रही है, लेकिन वो बिल फंस गए हैं, जिस पर आम राय नहीं है.
सरकार बुला सकती है एक विशेष सत्र
मॉनसून सत्र के खत्म होने में केवल तीन दिन बचे हैं और जो जो स्थिति बनी हुई है उसमें एफसीआरए बिल पेश तो हो जाएगा, लेकिन क्या पारित भी हो जाएगा? इस पर संदेह बना हुआ है, जबकि परिसीमन बिल पर पूरी तरह से सस्पेंस बना हुआ है. हो सकता है आने वाले दिनों में सरकार एक विशेष सत्र बुलाकर इसे पास कराने की कोशिश करे.
यह भी पढ़ें- केंद्र सरकार छात्रों के प्रोटेस्ट पर चर्चा को तैयार, रिजिजू बोले-शाह बोलें तो शांति से सुने विपक्ष
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं