- संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है जिसमें महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल शामिल हो सकते हैं
- एक देश एक चुनाव के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति की रिपोर्ट मॉनसून सत्र से पहले प्रस्तुत नहीं की जाएगी
- जेपीसी ने अभी तक केवल दस राज्यों का दौरा किया है और राजनीतिक दलों से विस्तृत चर्चा कर रही है
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है. इसी के साथ चर्चा जोरों पर है कि सरकार की तरफ से कौन कौन सा बिल इस सत्र में लाया जा सकता है. वैसे सरकार ने मानसून सत्र के लिए अपना एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया है, मगर इतना तो जरूर कहा जा सकता है कि सरकार के एजेंडे में महिला आरक्षण बिल, परिसीमन बिल, 30 दिनों तक जेल जाने पर सदस्यता खत्म होने के कानून वाला बिल जरूर होंगे. एक देश एक चुनाव के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति सरकार ने बनाई हुई है. इसके चेयरमैन का कहना है कि वो अपनी कमिटी की रिपोर्ट मानसून सत्र के पहले नहीं दे सकते हैं.
क्यों नहीं दे सकते
इस जेपीसी के चेयरमैन पीपी चौधरी ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा है कि “हम सरकार से और समय मांगेंगे, क्योंकि हमारा काम अभी खत्म नहीं हुआ है. अभी तक हमने केवल 10 राज्यों का ही दौरा किया है. हमें बाकी राज्यों में भी जाना है. हम अभी तक जिन राज्यों में गए हैं, वहां के राजनीतिक दलों से मुलाकात की है. वहां के स्पीकर, डिप्टी स्पीकर, विपक्ष के नेताओं से मुलाकात करते हैं और ये सब इतनी जल्दी नहीं हो पाएगा. यही नहीं जहां भी हम गए हैं, वहां पर अन्य राजनीतिक ग्रुपों से भी मिलते हैं.”
एक कारण ये भी
एक देश एक चुनाव वाली यह जेपीसी अभी तक सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों, लॉ कमीशन के चेयरमैन, आर्थिक मामलों के जानकारों, पद्म अवार्ड से सम्मानित लोगों से भी मिल चुकी है. कहने का मतलब है कि एक देश एक चुनाव के संयुक्त समिति के रिपोर्ट के लिए सरकार को अभी इंतजार करना पड़ेगा. इसका मतलब ये है कि परिसीमन बिल और एक देश एक चुनाव का बिल मॉनसून सत्र में नहीं आएगा. क्योंकि ये दोनों बिल संविधान संशोधन विधेयक हैं, जिसके लिए सरकार को संसद के दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत चाहिए.
कब होगा एक देश एक चुनाव
बंगाल के तीन राज्यसभा उपचुनाव के बाद बीजेपी अकेले राज्यसभा में बहुत मजबूत हो जाएगी और एनडीए दो तिहाई तक पहुंच जाएगा. मगर दिक्कत लोकसभा में है. वहां यदि डीएमके भी सरकार का साथ दे दे तो भी थोड़ी दिक्कत है. केवल तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना उद्धव गुट के टूटने से बात नहीं बन रही है. अभी तक इस संयुक्त समिति का कार्यकाल मानसून सत्र के अंतिम दिन तक बढाया गया है, यानी 14 अगस्त तक. मगर जैसा कि जेपीसी के चेयरमैन पीपी चौधरी ने कहा कि सरकार को इसका कार्यकाल और आगे बढ़ाना पड़ेगा. वैसे भी जेपीसी को ये मालूम है कि रिपोर्ट वो चाहे जितनी जल्दी दे दें, एक देश एक चुनाव 2034 के आम चुनाव से पहले लागू नहीं हो सकता है.
माना जा रहा है कि एक देश एक चुनाव के लागू होने से 7 लाख करोड़ रुपये की बचत देश को होगी. वहीं 62 लाख नए ईवीएम लाने होंगे. इस जेपीसी में कुल 39 सदस्य हैं. जिनमें से 27 लोकसभा से और 12 राज्यसभा से हैं. प्रमुख सदस्यों में प्रियंका गांधी, मनीष तिवारी, अनुराग ठाकुर, बांसुरी स्वराज, सुप्रिया सुले, धर्मेंद्र यादव, कल्याण बनर्जी शामिल हैं.
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